एक घने जंगल के बीच एक सुंदर तालाब था, जहाँ बहुत सारी मछलियाँ खुशी से रहती थीं। तालाब का पानी साफ और ठंडा था, जिससे सभी मछलियाँ आनंद से तैरती थीं। रानी नाम की एक छोटी मछली भी उसी तालाब में रहती थी।
एक साल भीषण गर्मी पड़ी और कई महीनों तक बारिश नहीं हुई। सूरज की तेज़ गर्मी से तालाब का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा। कुछ दिनों बाद तालाब इतना छोटा हो गया कि मछलियों को तैरने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं बची।
पानी में तड़पते हुए रानी मछली ने कहा, “काश! बारिश जल्दी आ जाए। हमारा तालाब सूख रहा है।” एक बूढ़ी मछली ने चेतावनी दी, “हमें कोई रास्ता ढूँढना होगा, वरना हम सब मुश्किल में पड़ जाएँगे।”
रानी ने आसपास देखा और तालाब के एक किनारे पर थोड़ी गीली मिट्टी देखी। उसने सोचा, “शायद यहाँ से पानी कहीं जा रहा है।” रानी ने बाकी मछलियों को यह बात बताई। सभी मछलियाँ मिलकर उस जगह के पास तैरने लगीं, तभी उन्हें मिट्टी के नीचे से पानी की हल्की धार महसूस हुई।
खुशी से रानी बोली, “यहाँ पानी है! हमें इसे तालाब तक लाने का रास्ता बनाना होगा।” तालाब के पास रहने वाले कछुए ने यह बात सुनी। वह जंगल के जानवरों के पास गया और उनसे मदद माँगी।
खरगोश, बंदर और हिरण सभी वहाँ पहुँचे। उन्होंने मिलकर तालाब से उस गीली जगह तक मिट्टी हटाई। काफी मेहनत के बाद अचानक जमीन से पानी की छोटी-सी धार निकल आई। पानी धीरे-धीरे तालाब में आने लगा और मछलियाँ खुशी से तैरने लगीं।
लेकिन रानी ने कहा, “दोस्तों, अब हमें पानी बचाना भी सीखना होगा।” सभी जानवरों ने तालाब के आसपास पेड़ लगाए और तय किया कि कोई भी पानी बेकार नहीं बहाएगा।
कुछ दिनों बाद आसमान में काले बादल छा गए और टप... टप... टप... बारिश शुरू हो गई। फिर तेज़ बारिश हुई और तालाब पानी से भर गया। सभी मछलियाँ खुशी से उछलने लगीं।
रानी ने कहा, “देखा! अगर हम हिम्मत न हारते और मिलकर कोशिश करते, तो आज हमारा तालाब फिर से नहीं भरता।” यह कहानी हमें सिखाती है कि एकता, सूझबूझ और जल संरक्षण कितना महत्वपूर्ण है।

