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दिल्ली दंगे: कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा सहित कई नेताओं को मिली राहत, हेट स्पीच याचिकाएं खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के दंगों से जुड़ी भड़काऊ भाषण की 15 याचिकाएं खारिज कीं।

झटपट समझें

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों में नेताओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में FIR दर्ज करने की मांग वाली 15 याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जिससे कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर जैसे नेताओं को बड़ी राहत मिली है।

मुख्य बातें

  • दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के दंगों से जुड़ी 15 याचिकाएं खारिज कीं।
  • याचिकाओं में नेताओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण के लिए FIR दर्ज करने की मांग की गई थी।
  • कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर के खिलाफ FIR की मांग की गई थी।
  • CAA-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान जामिया में पुलिस बर्बरता की SIT जांच की मांग भी खारिज हुई।
  • राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मनीष सिसोदिया और असदुद्दीन ओवैसी पर मुकदमा चलाने की मांग वाली याचिका भी खारिज हुई।
  • दंगों में दिल्ली पुलिस की भूमिका की SIT जांच और अंतरराष्ट्रीय साजिश के आरोपों वाली याचिकाएं भी खारिज हुईं।
दो भारतीय पुरुष माइक्रोफोन के सामने बोल रहे हैं, एक भूरे रंग की शर्ट में और दूसरा सफेद शर्ट में।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित भड़काऊ भाषणों के लिए नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2020 दंगों के मामले में भड़काऊ भाषणों को लेकर नेताओं के खिलाफ एफआईआदर्ज करने की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। हाई कोर्ट में 15 याचिकाएं दाखिल की गई थीं जिनमें नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।शेख मुज्तबा फारूक की ओर से दायर याचिका में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। हालांकि कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता के बड़ा झटका दिया है।

यह आदेश उन याचिकाओं पर दिया गया जिनमें CAA और एनआरसी के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान नेताओं द्वारा दिए गए भाषणों के लिए एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। आरोप है कि इन भाषणों ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़काए और 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।

एसआईटी जांच वाली याचिका भी खारिज इसके अलावा डिवीजन बेंच ने 2019 के CAA-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया में पुलिस की कथित बर्बरता की एसआईटी जांच की मांग वाली याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक लॉयर्स वॉइस' की एक और याचिका में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मनीष सिसोदिया और असदुद्दीन ओवैसी समेत विपक्ष के कई नेताओं और हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज पर मुकदमा चलाने की मांग की गई थी।

एसआईटी-एनआईए से जांच की मांग दूसरी याचिकाओं में दंगों में दिल्ली पुलिस की भूमिका की जांच एसआईटी से कराने और उस जांच की निगरानी कोर्ट की तरफ से किए जाने की मांग की गई थी। एक्टिविस्ट अजय गौतम की एक और याचिका में इन विरोध प्रदर्शनों की जांच एनआईए से कराने की मांग की गई। इसमें आरोप लगाया गया कि इसके पीछे एक 'अंतरराष्ट्रीय साज़िश' थी और एक्टिविस्टों को 'विदेशी फंडिंग' मिली थी।

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