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ध्रुव राठी का आरोप: बेडरूम से घसीटकर ले गए, चप्पल तक नहीं पहनने दी

यूट्यूबर ध्रुव राठी ने हिरासत में लिए जाने को 'किडनैपिंग' बताया, कहा- पुलिस ने की हाथापाई

झटपट समझें

यूट्यूबर ध्रुव राठी ने आरोप लगाया है कि उन्हें गुरुग्राम स्थित उनके घर से बेडरूम से घसीटकर ले जाया गया, चोटें पहुंचाई गईं और चप्पल तक पहनने का मौका नहीं दिया गया।

मुख्य बातें

  • ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया।
  • राठी ने इस घटना को किडनैपिंग बताया, न कि गिरफ्तारी या डिटेंशन।
  • उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में आए और उन्हें घसीटकर ले गए।
  • राठी ने कहा कि इस दौरान उन्हें चोटें आईं और चप्पल भी नहीं पहनने दी गई।
  • उन्हें 22-23 घंटे हिरासत में रखा गया और वकील से संपर्क नहीं करने दिया गया।
एक आदमी काले रंग की टी-शर्ट पहने हुए है और कैमरे की ओर देख रहा है।
ध्रुव राठी ने हिरासत में लिए जाने को किडनैपिंग बताया।

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए जर्मनी से भारत आए यूट्यूबर ध्रुव राठी को रविवार को रिहा कर दिया गया। शनिवार को गुरुग्राम के अपने घर से उठाए गए ध्रुव राठी ने हिरासत से निकलने के बाद इसे 'किडनैपिंग' कहा है। राठी ने एक वीडियो जारी करके आरोप लगाया कि सिविल ड्रेस में आए पुलिसकर्मी उन्हें घसीटते हुए अपने साथ ले गए। हरियाणा के रहने वाले सोशल मीडिया इंफ्लुएंशर ने कहा कि इस दौरान उन्हें चोटें आईं और चप्पल तक पहनने का मौका नहीं दिया गया।

8 अक्टूबर को बेंगुलुरु में आयोजित प्रदर्शन से ठीक पहले भारत लौटे ध्रुव राठी शनिवार को सीजेपी के जंतर-मंतर 2.O आंदोलन में हिस्सा लेना चाहते थे। एक दिन पहले उन्होंने इंडिया गेट के सामने वीडियो बनाते हुए इसकी घोषणा भी की थी। शनिवार सुबह ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। राठी ने कहा कि तब वह जागे भी नहीं थे जब पुलिस उनके घर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि घर पर वह अपने माता-पिता के साथ ठहरे हुए थे। वीडियो के शुरुआत में राठी ने अपना पासपोर्ट दिखाते हुए उनकी नागरिकता पर सालों से बने सस्पेंस को खत्म किया और कहा कि वह भारतीय हैं।

मुझे किडनैप किया गया: राठी ध्रुव राठी ने पुलिसकर्मियों को गुंडा बताते हुए कहा कि उन्हें बेडरूम से किडनैप कर लिया गया। उन्होंने कहा, '10 अक्टूबर को सुबह 7 बजे मैं अपने बेडरूम में सो रहा था। मेरी मम्मी सुबह उठकर दरवाजा खोलती हैं। बाहर काफी सारे लोग घूम रहे थे। पुलिसवाले नहीं, आम कपड़ों में लोग घूम रहे थे। एकदम से करीब 20 लोग उन्हें धक्का मारकर अंदर घुसते हैं घर में। ये घर में आते हैं और चारों तरफ फैल जाते हैं। मेरे बेडरूम में आते हैं। तब तक मेरी नींद नहीं खुली थी। जब बेडरूम का दरवाजा खुला तब मेरी नींद खुली। मैं देखता हूं कि क्या हो रहा है, इतने लोग कहां से आ गए। इससे पहले कि मैं कुछ रिएक्ट कर पाता। ये लोग मुझे किडनैप करके ले जाते हैं। मैं यहां किडनैप शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं क्योंकि यह कोई अरेस्ट नहीं है। कोई डिटेंशन नहीं है। डिटेंशन तब होता जब मैं प्रोटेस्ट में जाता और मुझे डिटेन कर लेते। अरेस्ट तब होता जब पुलिसवाला आता और अपनी वर्दी दिखाता-नेम प्लेट दिखाता, मुझे अरेस्ट वारंट दिखाता कि देखो ये धाराएं हैं, आप हमारे साथ पुलिस स्टेशन चलो। मैं खुशी-खुशी चल लेता। इसमें से कुछ नहीं हुआ। इन्होंने गुंडे भेजकर मुझे किडनैप किया, मेरे घर पर मुझे सोते-सोते। उस वक्त मेरे घर पर कोई नहीं था मेरे मम्मी-पापा के अलावा। हम बस तीन लोग थे घर में। मुझे बाद में पता चला कि यहां घर के बाहर 50 से ज्याद लोग थे, 50 से ज्यादा गुंडे थे।'

कहा- घसीटकर ले गए, चोटें आईं ध्रुव राठी ने आरोप लगाया कि उन्हें घसीटकर ले जाया गया और इस दौरान चोटें भी आईं। उन्होंने कहा, 'जब ये लोग अंदर आए और मेरी नींद खुली तो मैंने पूछा कि कौन हो, क्या हो। कुछ भी बोलने का मौका नहीं दिया। मुझे सीधा घसीटकर ले गए। कल्पना करो कि कैसे घसीटकर क्रिमिनल को ले जाया जाता है। मुझे बेडरूम से घसीटकर ले गए। सीढ़ियों से नीचे घसीटकर ले गए। मुझे काफी चोटें लगीं। पूरी बॉडी पर चोटें लगी हैं। मुझे चप्पल तक पहनने का मौका नहीं दिया गया। मुझे ऐसे ही उठाकर जीप में बंद कर दिया। जीप को तुरंत भगाकर ले गए पुलिस स्टेशन। फिर दूसरे पुलिस स्टेशन। इसका कोई वीडियो मौजूद नहीं है। मेरा फोन तुरंत छीन लिया था। मेरे पैरेंट्स का फोन भी छीन लिया। मैंने फोन मांगा वकील से संपर्क के लिए तो इनकार कर दिया गया। 22-23 घंटों तक मुझे बिठाकर रखा। मुझे कहा कि आप अरेस्ट या डिटेन नहीं हो। आप चिंता मत करो छोड़ दिया जाएगा। मैं तो कहूंगा कि मुझे किडनैप करके रखा।'

माता पिता संग हाथापाई का आरोप, मोदी सरकार पर हमला राठी ने आगे कहा, 'क्या आपने किसी लोकतांत्रिक देश में ऐसा सुना है कि किसी ने सच के लिए आवाज उठाई, देश के लिए आवाज उठाई हो, बेहतर चुनाव आयोग की मांग की तो इस तरह बेडरूम में घुसककर उठा लिया जाता है। किडनैप कर लिया जाता है। उसके माता पिता के साथ मार पीट की जाती है। हाथापाई की जाती है। उसे इस तरह ले जाया जाता है किसी लोकतांत्रिक देश में ऐसा नहीं होता है। नरेंद्र मोदी ने इस देश को डिक्टेटरशिप बना दिया है। यह अघोषित आपातकाल है।'

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