मंदसौर/नीमच: मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट चीता के विस्तार की दिशा में रविवार को एक और अहम कदम उठाया गया। बोत्सवाना से भारत लाई गई मादा चीता CCB-2 को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के soft-release enclosure में छोड़ा गया। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने राधाष्टमी के अवसर पर इस चीता का नाम ‘राधा’ रखा।
राधा के आने के बाद गांधी सागर में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। यहां पहले से दक्षिण अफ्रीका से आए दो नर चीते प्रभास और पावक तथा मादा चीता धीरा मौजूद हैं। इस तरह अभयारण्य में अब दो नर और दो मादा चीते हैं।
करीब तीन साल की राधा मूल रूप से बोत्सवाना से लाई गई थी। भारत पहुंचने के बाद उसे पहले Kuno National Park में रखा गया था। क्वारंटीन और अनुकूलन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद अब उसे कूनो से गांधी सागर स्थानांतरित किया गया है।
गांधी सागर को कूनो के बाद भारत में अफ्रीकी चीतों के दूसरे प्रमुख आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पूरी चीता आबादी को केवल एक क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग सुरक्षित परिदृश्यों में आबादी स्थापित करना है। राधा को अन्य चीतों से अलग एक सुरक्षित बाड़े में रखा गया है, जहां वन विभाग उसके व्यवहार, स्वास्थ्य और नए वातावरण में अनुकूलन की निगरानी करेगा।
इस स्थानांतरण का एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहलू आनुवंशिक विविधता भी है। गांधी सागर में पहले मौजूद तीन चीते दक्षिण अफ्रीकी मूल के हैं, जबकि राधा बोत्सवाना से आई है। अलग आनुवंशिक पृष्ठभूमि वाले नर और मादा चीतों की मौजूदगी भविष्य में स्वस्थ प्रजनन आबादी विकसित करने की रणनीति के लिए उपयोगी मानी जा रही है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में अब 56 चीते और शावक मौजूद हैं। इनमें गांधी सागर के चार चीते शामिल हैं, जबकि बाकी कूनो क्षेत्र में हैं। मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को भी भविष्य में चीतों के तीसरे आवास के रूप में तैयार किया जा रहा है।

