लाइव टीवी

भारत-अमेरिका ट्रेड डील में फंसा पेंच, निर्मला सीतारमण ने बताई बड़ी वजह

वित्त मंत्री ने 5 अक्टूबर को कहा कि दोनों देश रियायत देने के मुश्किल मुकाम पर पहुंचे।

झटपट समझें

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की बातचीत मुश्किल में है क्योंकि दोनों पक्ष ऐसे मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां आगे और रियायत देना या लेना काफी मुश्किल होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 अक्टूबर को यह जानकारी दी।

मुख्य बातें

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 अक्टूबर को भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बयान दिया।
  • दोनों देश अब ऐसे स्तर पर हैं जहां आगे रियायत देना या लेना मुश्किल है।
  • बातचीत में व्यापार असंतुलन एक अहम मुद्दा बना हुआ है।
  • अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।
  • भारत अपने संवेदनशील क्षेत्रों के हितों को ध्यान में रख रहा है।
  • फरवरी में अंतरिम डील की रूपरेखा बनी थी, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
वित्त मंत्री एक मेज पर बैठे हैं, उनके सामने पानी की बोतलें और फूल हैं।
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की बातचीत में व्यापार असंतुलन एक प्रमुख मुद्दा है।

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील (Trade Deal) बातचीत अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन अब दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत एक मुश्किल मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 अक्टूबर को कहा कि दोनों पक्ष शायद ऐसे मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां आगे और रियायत देना या लेना काफी मुश्किल होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत जारी है और अगर आगे समझौते की कोई गुंजाइश बनती है, तो दोनों देश उस पर काम कर सकते हैं।

बातचीत में क्यों आई मुश्किल?

मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली में म्यूनिख नेताओं की बैठक (Munich Leaders Meeting) के दौरान सीतारमण ने कहा कि भारत-अमेरिका समझौते पर बातचीत काफी कठिन और गहन रही है। उनके मुताबिक, दोनों पक्षों ने अब तक कई मुद्दों पर चर्चा की है और मौजूदा स्थिति एक तरह के ‘Plateau’ यानी ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जहां आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त रियायत देना आसान नहीं होगा। फिलहाल, दोनों देशों के बीच अभी किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं।

व्यापार घाटे पर अमेरिका का फोकस

बातचीत में ट्रेड इम्बैलेंस (Trade Imbalance) यानी दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भी एक अहम मुद्दा बना हुआ है। सीतारमण के अनुसार, अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। उन्होंने कहा कि पहले व्यापार असंतुलन को बातचीत, बाजार खोलने और एक-दूसरे के उत्पादों को ज्यादा पहुंच देने जैसे तरीकों से सुलझाने की कोशिश की जाती थी। अब टैरिफ का इस्तेमाल भी व्यापार नीति के दबाव के तौर पर बढ़ा है।

फरवरी में बनी थी अंतरिम डील की रूपरेखा

बातचीत में ट्रेड इम्बैलेंस (Trade Imbalance) यानी दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भी एक अहम मुद्दा बना हुआ है। सीतारमण के अनुसार, अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। उन्होंने कहा कि पहले व्यापार असंतुलन को बातचीत, बाजार खोलने और एक-दूसरे के उत्पादों को ज्यादा पहुंच देने जैसे तरीकों से सुलझाने की कोशिश की जाती थी। अब टैरिफ का इस्तेमाल भी व्यापार नीति के दबाव के तौर पर बढ़ा है।

फरवरी में बनी थी अंतरिम डील की रूपरेखा

वित्त मंत्री ने इंडिया-EU ट्रेड एग्रीमेंट का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत बातचीत में अपने संवेदनशील क्षेत्रों के हितों को ध्यान में रख रहा है। यूरोपीय आयोग के मुताबिक, भारत और EU ने 27 जनवरी 2026 को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की बातचीत पूरी की थी। सितंबर में यूरोपीय आयोग ने इस समझौते पर हस्ताक्षर और उसे लागू करने की दिशा में EU काउंसिल से अनुमति मांगी।

सीतारमण ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यापार माहौल में भारत का लक्ष्य ऐसे समझौते करना है, जो बाजार के अवसर बढ़ाने के साथ घरेलू और संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की भी रक्षा करें। भारत-अमेरिका डील को लेकर फिलहाल बातचीत जारी है, लेकिन वित्त मंत्री के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि अगली बड़ी रियायत पर दोनों देशों के लिए सहमति बनाना आसान नहीं होगा।

यह खबर शेयर करें

WhatsAppXFacebook