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रूस से तेल खरीद पर भारत पर कार्रवाई से पहले सोचे अमेरिका: जेपी मॉर्गन के सीईओ

जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जेमी डिमॉन ने भारत के रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका को चेतावनी दी।

झटपट समझें

जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जेमी डिमॉन ने कहा कि अमेरिका को रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर कोई भी कार्रवाई करने से पहले उसके वैश्विक तेल बाजार पर पड़ने वाले असर को समझना चाहिए। उन्होंने मुंबई में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बात कही।

मुख्य बातें

  • जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जेमी डिमॉन ने भारत पर कार्रवाई से पहले उसके असर को समझने की सलाह दी।
  • डिमॉन ने कहा कि अमेरिका को भारत और दुनिया के तेल बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना चाहिए।
  • उन्होंने बताया कि रूसी तेल का कुछ हिस्सा भारत में रिफाइन होकर इस्तेमाल होता है और कुछ खास जरूरतों के लिए खरीदा जाता है।
  • डिमॉन का बयान अमेरिकी कांग्रेस द्वारा रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा विधेयक पास करने के बाद आया है।
  • इस कानून के तहत राष्ट्रपति को रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
  • भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और रूसी तेल के बड़े खरीदारों में से एक है।
तेल के ड्रम, रूस-भारत के झंडे और पृष्ठभूमि में जहाज।
जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जेमी डिमॉन ने भारत के रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका को चेतावनी दी है।

जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जेमी डिमॉन ने रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर कार्रवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को कोई सख्त कार्रवाई करने से पहले उसके असर को समझना चाहिए। यूएस को भारत और पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना होगा। डिमॉन ने यह बात मुंबई में जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कही। उन्होंने कहा, 'वॉशिंगटन को पहले समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनर रूस से मिलने वाले तेल का किस तरह इस्तेमाल करते हैं।'

जेमी डिमॉन ने कहा, 'उम्मीद है कि अमेरिका इन सभी मुद्दों को समझेगा और ऐसा नहीं करेगा कि रूस के खिलाफ जरूरी कदम उठाते हुए भारत और दुनिया के तेल बाजार को नुकसान पहुंचा दे।' उन्होंने भारतीय रिफाइनरियों में इस्तेमाल होने वाले रूसी तेल को लेकर भी बात रखी। डिमॉन के मुताबिक, रूस से आने वाले तेल का कुछ हिस्सा भारत में रिफाइन होकर इस्तेमाल होता है और कुछ तेल रिफाइनरियों की खास जरूरत के मुताबिक खरीदा जाता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत यह तेल रूस से नहीं खरीदेगा तो उसे किसी दूसरे देश से लेना होगा और हो सकता है कि वहां से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए सही न हो।

रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ डिमॉन का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी कांग्रेस ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा विधेयक पास किया है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। डिमॉन ने कहा कि अमेरिका को रूस पर दबाव बनाने के उपायों के साथ-साथ यह भी देखना चाहिए कि ऐसे कदमों का तेल बाजार पर कितना व्यापक असर पड़ सकता है। अमेरिका को यूक्रेन के समर्थन के लिए और कदम उठाने चाहिए।

भारत पर अमेरिका और यूरोपीय संघ का दबाव रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से दबाव बढ़ा हुआ है। भारत लगातार रूसी तेल खरीद को लेकर हो रही आलोचना को खारिज करता रहा है। नई दिल्ली ने अपनी ऊर्जा खरीद को निशाना बनाने को अनुचित और गैरवाजिब बताया है। रूस पर प्रतिबंध वाले अमेरिकी कानून पर भी भारत ने कहा कि इससे दोनों देशों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और रूसी तेल के बड़े खरीदारों में शामिल है।

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