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मनोज जरांगे का 20 दिन का अनशन खत्म, पेरिस से हुई 3.5 घंटे की गुप्त बातचीत

महाराष्ट्र सरकार को तीन महीने का अल्टीमेटम, वरना आंदोलन मुंबई ले जाने की चेतावनी

झटपट समझें

मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार को तीन महीने का अल्टीमेटम देते हुए अपना 20 दिन का अनशन समाप्त कर दिया है, अन्यथा आंदोलन मुंबई ले जाने की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

  • मनोज जरांगे ने 20 दिन बाद अपना अनशन समाप्त किया।
  • महाराष्ट्र सरकार को तीन महीने का अल्टीमेटम दिया गया है।
  • अनशन खत्म करने से पहले 3.5 घंटे चली गुप्त बातचीत।
  • महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने पेरिस से बातचीत में अहम भूमिका निभाई।
  • सरकार ने जरांगे की 13 में से 12 मांगें स्वीकार कर ली हैं।
दो आदमी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठे हैं, एक बोल रहा है और दूसरा सुन रहा है।
मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार को तीन महीने का अल्टीमेटम देते हुए अपना 20 दिन का अनशन समाप्त कर दिया है।

मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने 20 दिन से जारी अपना अनशन आज (गुरुवार, 17 सितंबर को) समाप्त कर दिया है। हालांकि, इसके साथ ही जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर मराठा आरक्षण से जुड़ी उनकी मांगों पर तीन माह के भीतर विचार नहीं किया गया, तो वह अपना आंदोलन मुंबई ले जाएंगे। जरांगे ने बीड जिले के पाटोदा में मंत्रियों राधाकृष्ण विखे पाटिल और दादा भुसे, विधान परिषद सदस्य (MLC) प्रसाद लाड, विधायक सुरेश धस और वरिष्ठ अधिकारियों वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के बाद अनशन समाप्त करने की घोषणा की।

दरअसल, जरांगे के अनशन खत्म करने के पीछे एक लंबी बातचीत है, जिसमें मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक शामिल रहे हैं। NDTV की रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्दे के पीछे मनोज जरांगे से करीब साढ़े तीन घंटे तक बातचीत चली है। इसके बाद उन्होंने अनशन खत्म करने पर अपनी सहमति जाहिर की। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बातचीत में महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने अहम भूमिका निभाई है। सावंत जो फिलहाल एक इंटरनेशनल स्पेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए पेरिस गए हुए हैं, ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और जारांगे पाटिल के सहयोगियों के बीच बातचीत में मदद की।

पेरिस से ही कई दौर की बातचीत इससे पहले जरांगे की भूख हड़ताल और मुंबई तक प्रस्तावित उनके मार्च को लेकर राज्य की सियासी स्थिति नाजुक मोड़ पर पहुंच चुकी थी। हालांकि, उदय सामंत ने पेरिस से ही कई दौर की बातचीत के लिए तालमेल बिठाया और सभी के बीच कुल सात बार बातचीत हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि बातचीत के आखिरी क्रम में सामंत ने पेरिस से ही वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिए एक अहम कॉल की, जिसमें वे खुद, मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और बीजेपी नेता प्रसाद लाड शामिल थे।

पाटिल के करीबी सहयोगियों से भी सीधा संपर्क इस अहम कोशिश में सरकार ने मनोज जरांगे पाटिल के करीबी सहयोगियों से भी सीधा संपर्क किया। सूत्रों ने बताया कि इन बातचीत के दौरान भरोसा दिलाया गया कि उनके लंबित मांगों पर सकारात्मक फैसले लिए जाएंगे। हालांकि, सरकार के सामने दोहरी चुनौती थी। पहला, जरांगे के आंदोलन पर बातचीत के लिए दरवाजे खुले रखना और साथ ही यह सुनिश्चित करना कि मुंबई मार्च के प्रस्ताव के कारण स्थिति और न बिगड़े। सूत्रों ने बताया कि बातचीत के जरिए समाधान खोजने पर जोर दिया गया, खासकर इसलिए क्योंकि गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में लोगों की भारी भीड़ थी। हालांकि, अब सरकार के सामने आई तत्काल चुनौती टल गई और मुंबई मार्च को लेकर तनाव कम करने का रास्ता भी साफ हो गया है।

सरकार ने उनकी 13 में से 12 मांगें स्वीकार कर ली हैं बता दें कि इससे पहले भी उदय सामंत ने जरांगे के मुंबई मार्च से जुड़े घटनाक्रम में दखल दिया था। इस बार भी उनकी कोशिशों ने सरकार और जारांगे पाटिल के खेमे के बीच बातचीत को आसान बनाया। हालांकि जरांगे की भूख हड़ताल खत्म होने से तत्काल टकराव तो टल गया है, लेकिन आंदोलन की लंबित मांगों को लेकर लिए जाने वाले फैसले अब अहम होंगे। यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान के कुछ दिन बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार किसी भी तरह की डराने-धमकाने की रणनीति को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने गणेश उत्सव के दौरान आंदोलन किए जाने पर भी सवाल उठाया था। फडणवीस ने जरांगे के अनशन समाप्त करने के फैसले का स्वागत करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ने उनकी 13 में से 12 मांगें स्वीकार कर ली हैं और उनमें से प्रत्येक को पूरा करेगी।

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