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पुलिसकर्मियों ने क्यों हटाए नेम प्लेट? जंतर-मंतर प्रदर्शनों में दिखा था खाली बैज

सोशल मीडिया पर टारगेट होने से बचने के लिए दिल्ली पुलिस ने उठाया कदम, अधिकारियों ने बताई वजह

झटपट समझें

सोशल मीडिया पर टारगेट होने से बचने के लिए दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और जवानों ने प्रदर्शनों के दौरान नेम प्लेट हटा दी थी। लाठीचार्ज के बाद पुलिसकर्मियों के परिवारों को भी निशाना बनाया जा रहा था।

मुख्य बातें

  • दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर टारगेट होने से बचने के लिए पुलिसकर्मियों की नेम प्लेट हटवाई।
  • 20 जुलाई को संसद मार्ग पर लाठीचार्ज के बाद पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा था।
  • पुलिसकर्मियों के परिवारों को भी सोशल मीडिया पर टारगेट किया जा रहा था।
  • आईपीएस अधिकारियों ने अपनी नेम प्लेट लगाई, क्योंकि वे आसानी से पहचाने जाते हैं।
  • नक्सल प्रभावित इलाकों और जम्मू-कश्मीर में भी नेम टैग हटाने के कदम उठाए जाते रहे हैं।
पुलिसकर्मी लाठी, ढाल और हेलमेट लेकर सड़क पर चल रहे हैं।
जंतर-मंतर पर विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों के नेम बैज न लगाने का मामला सामने आया।

नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन हो या फिर सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन। दोनों बार दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और जवानों के नाम वाले बैज का गायब होना काफी सुर्खियों में था। विरोध को कवर करने वाले यूट्यूबर या फिर पत्रकार जब पुलिस कर्मियों से सवाल करते थे कि आपके नाम का बैच कहां चला गया तो कई बार उन्हें कोई जवाब ही नहीं मिलता था। कभी जवाब मिलता भी था तो गोलमोल। कोई कहता था कि कहीं गिर गया है तो कोई कहता था कि लगाना भूल गए हैं। हालांकि अब दिल्ली पुलिस के ही अधिकारियों ने बताया है कि सोच-समझकर पुलिसकर्मियों और आरएएफ के जवानों की नेम प्लेट हटवा दी गई थी।

अधिकारियों का कहना है कि पुलिसकर्मी और अधिकारी सोशल मीडिया पर टारगेटिंक से बचने के लिए बैज नहीं लगा रहे थे। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को संसद मार्ज के दौरान लाठीचार्ज के बाद पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर टारगेट किया जा रहा था। इसी से बचने के लिए बैज हटाने का फैसला किया गया।

परिवारों को टारगेट किया जा रहा- पुलिस अधिकारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भी कई ऐसे वीडियो और फोटोग्राफ सोशल मीडिया पर शेयर किए गए जिसमें सवाल किया जा रहा था कि पुलिसकर्मी बैज क्यों नहीं लगाए हुए हैं। पुलिसवालों ने भी अपने-अपने हिसाब से अलग-अलग जवाब दिए। वहीं अधिकारियों का कहना है कि 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज के बाद सबक भी मिला कि पुलिसकर्मियों की पहचान सोशल मीडिया पर सामने आने की जरूरत नहीं है। एक अधिकारी ने कहा कि बहुत सारे लोगों का नाम सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके परिवार को भी टारगेट किया जाने लगा।

अधिकारी ने कहा कि अगर कोई अपनी ड्यूटी ठीक से कर रहा है तो वह अपना नेम प्लेट लगाए या ना लगाए, उसपर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इस बार जंतर-मंतर पर कई आईपीएस अधिकारियों ने अपना टैग लगा लिया था। क्योंकि उन्हें वैसे भी लोग आसानी से पहचान जातते हैं। वहीं जूनियर पुलिसकर्मियों को बिना टैग के भी जाने की अनुमति थी। उनका कहना है कि बहुत सारे इन्फ्लुएंसर नाम देखकर टारगेट करने की कोशिस करते हैं। नक्सवाद प्रभावित इलाकों और जम्मू-कश्मीर में भी नेम टैग हटाने वाला कदम उठाया जाता रहा है। आपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को एक बार फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

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