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20 बागी सांसदों पर लटकी अयोग्यता की तलवार, स्पीकर को जवाब देने से फिर चूके

ममता बनर्जी का साथ छोड़कर NCPI में शामिल हुए सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से मांगी और मोहलत

झटपट समझें

20 बागी सांसदों की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को जवाब देने की समय सीमा चूक दी है, जिससे उनकी सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा है।

मुख्य बातें

  • 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को जवाब देने की समय सीमा फिर चूक दी है।
  • सांसदों ने स्पीकर से जवाब देने के लिए 2 और सप्ताह का समय मांगा है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्यता के मुद्दे पर स्पीकर को जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया था।
  • तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने जून में इन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की याचिका दायर की थी।
  • सांसदों ने दस्तावेज जुटाने के लिए पहले भी कई बार समय विस्तार की मांग की है।
एक समूह बाहर सीढ़ियों के पास खड़ा है।
लोकसभा स्पीकर के फैसले का इंतजार कर रहे 20 बागी सांसदों की सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा है।

सायोनी घोष समेत 20 बागी सांसदों की मुश्किलें बढ़ने के आसार हैं। दरअसल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को जवाब देने की एक और डेडलाइन NCPI यानी नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करने वाले सांसदों से चूक गई है। खबरें हैं कि बिरला से विस्तार देने की मांग की गई है, लेकिन इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया। खास बात है कि अयोग्यता के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को जल्द फैसला लेने के लिए कहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा स्पीकर की तरफ से 20 सांसदों को जवाब देन के लिए गुरुवार तक का समय दिया था। अब खबरें हैं कि बागियों ने 2 और सप्ताह का समय मांगा है। खास बात है कि इससे पहले भी तीन बार विस्तार मांगा जा चुका है। सबसे पहले इन सांसदों को 7 दिनों का समय दिया गया था। इसके बाद 3 और 4 सप्ताह का समय जवाब देने के लिए दिया गया था।

दस्तावेज जुटाने के लिए मांगा था समय 22 सितंबर को दस्तीदार ने कहा था, 'हमने तब लोकसभा सचिवालय को पत्र लिखकर जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा था, जो हमें दे दिया गया। अब हमें कुछ और समय चाहिए क्योंकि 20 सांसदों को अभी सभी दस्तावेज एकत्र करने हैं। इसलिए हमने और चार सप्ताह का समय मांगा है।'

अब तक नहीं मिली मान्यता सायोनी घोष और यूसुफ पठान के अलावा काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय, जगदीश चंद्र वर्मा बासुनिया समेत 20 सांसद ममता बनर्जी का साथ छोड़कर NCPI में आ गए थे। अब उनके इस दल बदल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई थी और सांसद के रूप में अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। शीर्ष न्यायालय ने इस मामले पर जल्द फैसला लेने के लिए स्पीकर से कहा था। लोकसभा के रिकॉर्ड्स में उन्हें तृणमूल के सदस्य के रूप में दर्ज किया गया है।

अभिषेक बनर्जी ने दायर की थी याचिकाएं तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने जून में दसवीं अनुसूची के तहत उनकी अयोग्यता की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिकाएं दायर की थीं।

इसके बाद 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इसपर टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि बेंच लोकसभा स्पीकर को निर्देश नहीं दे सकता, लेकिन 'हम महज उन्हें मामले के शीघ्र समाधान के लिए याद दिलाना चाहते हैं।' भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा था, 'हमें उम्मीद है कि जिस मामले में जल्द फैसले की जरूरत है, उस पर तेजी से कार्रवाई होगी। मामले की प्रकृति ही ऐसी है कि उस पर जल्द निर्णय लेने की जरूरत है

जस्टिस बागची ने कहा था, 'हम बस प्राधिकार को याद दिला रहे हैं कि वे 10वीं अनुसूची के बेहद अहम होने को ध्यान में रखते हुए इस मामले का जल्द समाधान सुनिश्चित करें। हो सकता है कि हम कोई कड़ा निर्देश न दें, लेकिन केशम

मेघचंद्र सिंह मामले में आए निर्णय को ध्यान में रखते हुए... इस मुद्दे का जल्द समाधान किया जाए।'

दरअसल, केशम मेघचंद्र सिंह बनाम मणिपुर विधानसभा अध्यक्ष 2020 के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया था। अदालत ने कहा था कि अध्यक्ष को उचित समय के अंदर और बेहतर होगा कि 3 महीनों के अंदर फैसला लेना चाहिए।

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