मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग बढ़ती जा रही है। विपक्षी दल और कॉकरोच जनता पार्टी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को मुंबई में शिवसेना यूबीटी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और मनसे चीफ राज ठाकरे ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए सड़कों पर उतरे। इस रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। इस विरोध प्रदर्शन पर सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके ने रिएक्ट किया है। उन्होंने कहा कि अभी नहीं तो कभी नहीं। सभी भारतीयों को एक साथ आ जाना चाहिए।
अभिजीत दीपके ने उद्धव और राज ठाकरे के प्रोटेस्ट का वीडियो शेयर करते हुए कहा, ''मुंबई फिर से फ्री और फेयर चुनाव के लिए सड़कों पर है। सभी प्रोटेस्टर्स के साथ सॉलिडैरिटी। सभी भारतीयों को एक साथ आने की जरूरत है। अभी नहीं तो कभी नहीं। पीएस- यह मत पूछो कि मुंबई में प्रोटेस्ट की इजाजत कैसे दी जा रही है। महाराष्ट्र पुलिस और दिल्ली पुलिस के बीच बड़ा कल्चरल फर्क है।''
उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के वरिष्ठ नेता रविवार को मुंबई की सड़कों पर उतरे और चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विशाल 'विराट गर्जना मोर्चा' की अगुवाई की। मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर सीएसएमटी के पास बीएमसी मुख्यालय के बाहर एक जनसभा में खत्म हुए इस विरोध-प्रदर्शन में शामिल लोगों ने किसी पार्टी का झंडा नहीं उठाया था, बल्कि वे सिर्फ भारत का तिरंगा और संविधान की प्रतियां लिए हुए थे। यह विशाल प्रदर्शन चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) प्रक्रिया के तरीके पर सीधा हमला था। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया ने महाराष्ट्र और पूरे देश में लाखों मतदाताओं को गैर-कानूनी तरीके से मताधिकार से वंचित कर दिया है।
कांग्रेस के दिग्गज नेता बालासाहेब थोराट और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के नेता अनिल देशमुख और शशिकांत शिंदे समेत एमवीए के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सरकार पर सुनियोजित तरीके से 'वोट चोरी' करने और चुनावी नतीजों को अपने पक्ष में करने के लिए संवैधानिक ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगाया। पारंपरिक पार्टी झंडों को दरकिनार करते हुए इस मार्च में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और संविधान का एकजुट प्रदर्शन किया गया, जिससे यह आंदोलन पूरी तरह से लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनता का आंदोलन बन गया।
मुंबई में भी दीपके ने किया था प्रदर्शन नेताओं ने तीखा तेवर अपनाया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में पक्षपातपूर्ण हेरफेर और संस्थागत पक्षपात के आरोपों के लिए उनकी कानूनी जवाबदेही की मांग की। विपक्ष ने ढांचागत सुधारों पर जोर देते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को खत्म करने और चुनावी निष्पक्षता में जनता का भरोसा बहाल करने के लिए पारंपरिक पेपर बैलेट व्यवस्था को वापस लाने की अपनी मांग दोहराई। इससे पहले अभिजीत दीपके के नेतृत्व में मुंबई में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। शिवाजी पार्क में हुए प्रोटेस्ट में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।
10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित उसका प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा और उसने निर्वाचन प्रक्रिया में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के पक्षधर प्रत्येक नागरिक से इसमें शामिल होने की अपील की। सीजेपी ने कहा कि अगर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को प्रदर्शन किया जाएगा। दीपके ने कहा, ''अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो देशभर से 'कॉकरोच' दिल्ली कूच करेंगे और 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे।'' उन्होंने कहा, ''अगर दिल्ली पुलिस हमें रोकने की कोशिश करती है, तो जिस जगह हमें रोका जाएगा, वही हमारा जंतर-मंतर बन जाएगी। हमारा प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा। हम महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलेंगे।''

