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SIR के बीच मुख्य चुनाव अधिकारी ने EC से कर दी बड़ी मांग, 2 चुनाव आयुक्त भी साथ

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस चोक्कलिंगम ने चुनाव आयोग से ECINet सॉफ्टवेयर में चार बदलाव करने की मांग की है।

झटपट समझें

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस चोक्कलिंगम ने चुनाव आयोग से ECINet सॉफ्टवेयर में चार बदलाव करने की मांग की है। यह मांग राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के नोटिस चरण को लेकर की गई है।

मुख्य बातें

  • महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस चोक्कलिंगम ने चुनाव आयोग से ECINet सॉफ्टवेयर में चार बदलाव करने की मांग की है।
  • यह मांग राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के नोटिस चरण को लेकर की गई है।
  • महाराष्ट्र CEO ने खास तौर पर चुनावी रजिस्ट्रेशन अधिकारियों यानी ERO को कुछ मामलों में ज्यादा अधिकार देने की मांग की है।
भारत निर्वाचन आयोग के बाहर पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी पीले बैरिकेड के पास खड़े हैं।
SIR के बीच मुख्य चुनाव अधिकारी ने EC से कर दी बड़ी मांग, 2 चुनाव आयुक्त भी साथ

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस चोक्कलिंगम ने चुनाव आयोग से ECINet सॉफ्टवेयर में चार बदलाव करने की मांग की है। यह मांग राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के नोटिस चरण को लेकर की गई है। महाराष्ट्र CEO ने खास तौर पर चुनावी रजिस्ट्रेशन अधिकारियों यानी ERO को कुछ मामलों में ज्यादा अधिकार देने की मांग की है। दो चुनाव आयुक्त भी कुछ इसी तरह की मांगों का समर्थन कर चुके हैं।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र इस समय SIR के नोटिस चरण में है। CEO एस चोक्कलिंगम ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि EROs को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाले मामलों में सुनवाई के बाद फैसला लेने की अधिक स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।

क्या है ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’? SIR के दौरान ECINet सॉफ्टवेयर मतदाता के रिकॉर्ड को पिछली SIR की मतदाता सूची में दर्ज उसके माता-पिता या दादा-दादी के रिकॉर्ड से जोड़ने की कोशिश करता है। इस दौरान कुछ मामलों में जानकारी का मिलान नहीं होने पर ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सामने आती है।

मसलन, माता-पिता के नाम में अंतर या उम्र से जुड़ी जानकारी का मेल नहीं होना। इसका मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति मतदाता नहीं है। यह केवल रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी के बीच मेल न खाने की स्थिति है।

EROs को क्या ज्यादा अधिकार देने की मांग? इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र CEO ने मांग की है कि SIR के नोटिस पर कार्रवाई करते समय EROs को ज्यादा विकल्प दिए जाएं। कानून के तहत मतदाता सूची की जिम्मेदारी ERO की होती है और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक ERO होता है।

EROs आम तौर पर SDM स्तर के अधिकारी होते हैं। उनका काम मतदाता सूची तैयार करना, दावों और आपत्तियों की सुनवाई करना और यह तय करना होता है कि किन नामों को सूची में शामिल किया जाए या हटाया जाए।

महाराष्ट्र CEO की एक अन्य मांग यह है कि यदि ERO किसी व्यक्ति की ओर से जमा किए गए दस्तावेजों से संतुष्ट है तो उसे उस व्यक्ति को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने का अधिकार भी होना चाहिए।

आयोग ने 26 सितंबर को क्या कहा? 26 सितंबर को पूरी चुनाव आयोग की बैठक के बाद जारी बयान में महाराष्ट्र की मांगों के एक हिस्से को संबोधित किया गया। आयोग ने EROs को उन लोगों को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने का अधिकार दिया, जिनके रिकॉर्ड में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ पाई गई है।

आयोग ने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेड किए जा चुके हैं। अगर फील्ड अधिकारियों को आगे किसी अतिरिक्त लचीलेपन की जरूरत होगी तो उसे भी लागू किया जाएगा।

पहले भी उठ चुका है ERO के अधिकार का मुद्दा रिपोर्ट के मुताबिक, EROs को ज्यादा अधिकार देने की मांग पहले भी चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू की ओर से उठाई जा चुकी है। संधू ने 14 अगस्त को कहा था कि मतदाता सूची से जुड़े वैधानिक अधिकारी- CEO, DEO और ERO शिकायत कर रहे थे कि वे अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर पा रहे हैं। उनके मुताबिक ERONet पर DG (IT) स्तर से केंद्रीकृत नियंत्रण के कारण उनके अधिकार सीमित हो रहे थे।

महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 21.1% मतदाता कम महाराष्ट्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त को प्रकाशित हुई थी। इसमें राज्य के कुल मतदाताओं में 21.1 फीसदी की कमी हुई है। अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को जारी होनी है। महाराष्ट्र के CEO एस चोक्कलिंगम ने NDTV को बताया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान महाराष्ट्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची से दो करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। उनके मुताबिक इनमें ज्यादातर ऐसे मतदाता हैं जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह जा चुके हैं।

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