मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन की मांगों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को दिल्ली में लगाई गई पाबंदियों पर विशेष सुनवाई की। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को सामान्य किया जाए। साथ ही राजधानी में किसी को भी गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में न लिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि शांतिपूर्ण और बिना हथियार वाले प्रदर्शनकारियों को कानून द्वारा तय प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की स्पेशल बेंच ने रविवार को पाबंदियों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। इनमें शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शन से पहले बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने, आवाजाही पर रोक लगाने, इंटरनेट बंद करने और ट्रांसपोर्ट पर लगी पाबंदियों को लेकर कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश का पालन न करने का आरोप लगाया गया था।
बेंच ने कहा कि सीनियर वकीलों ने बताया कि निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन हुआ है। मेट्रो रेल नहीं चल रही थी। नई दिल्ली और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन बंद थे। कोई ट्रैफिक एडवाइजरी जारी नहीं की गई थी। बड़ी संख्या में लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया। यह सब उस इलाके के बाहर भी हुआ जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा के दायरे में था।
पाबंदियों को लेकर 5 बड़े निर्देश 1. मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी, जब तक कि अनुच्छेद 19(2) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था में खलल को ध्यान में रखते हुए नियम लागू करने की जरूरत न हो।
2. ट्रैफिक नियमों के अधीन शहर में लोगों की आवाजाही की अनुमति होगी। कानून-व्यवस्था और अन्य ट्रैफिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए बैरिकेड लगाने की तुरंत समीक्षा की जाएगी।
3. इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी।
4. कानून के अनुसार शहर में लोगों की सुचारू आवाजाही की अनुमति होगी।
5. कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा किसी को हिरासत में नहीं लिया जाएगा। खासकर उन शांतिपूर्ण, निहत्थे लोगों के जमावड़े के संबंध में जो उस क्षेत्र से बाहर हैं, जहां धारा 163 लागू है।
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को यह सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने में कोई बाधा न आए। शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी नामक प्रेशर ग्रुप द्वारा सीईसी के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से एक दिन पहले मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार करें। जनता को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए मेट्रो और रेल सेवाओं को पूरी तरह से रोकने के बजाय उन्हें नियंत्रित तरीके से संचालित करें।

