लद्दाख की स्थिति की तुलना तिब्बत से करने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के सदस्य सोनम वांगचुक के बयान पर सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) ने कड़ी आपत्ति जताई है। धर्मशाला स्थित तिब्बती प्रशासन ने वांगचुक की तुलना को गलत और वास्तविक स्थिति से परे बताया है।
CTA के आधिकारिक प्रवक्ता तेनजिन लेक्शे ने शुक्रवार शाम कहा कि वांगचुक ने लद्दाख में हालिया सार्वजनिक भाषण के दौरान लद्दाख की स्थिति की तुलना तिब्बत के अंदर की स्थिति से की थी। उन्होंने कहा कि सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन इस बयान को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है।
‘तिब्बत की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता वांगचुक का बयान’ तेनजिन लेक्शे के मुताबिक, वांगचुक का बयान तिब्बत के अंदर की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता। उन्होंने कहा कि तिब्बत अभी भी चीन के “सत्तावादी शासन” के अधीन है। CTA प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि वहां तिब्बतियों को उनके मौलिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में व्यवस्थित दमन का सामना करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक, तिब्बत की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को मिटाने के उद्देश्य से भी उपाय तेज किए जा रहे हैं।
क्या बोले थे सोनम वांगचुक? सोनम वांगचुक ने लेह में 24 सितंबर 2025 की हिंसा की पहली बरसी पर लोगों को संबोधित किया था। उन्होंने पिछले साल हुए प्रदर्शनों के पीछे लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा और राज्य का दर्जा देने के कथित वादों को पूरा न किए जाने को “मूल कारण” बताया था।
वांगचुक ने तिब्बत का उदाहरण देते हुए कहा था कि लद्दाख के लोगों ने लोकतंत्र की वजह से भारत को चुना था। उन्होंने दावा किया कि लद्दाख में ऐसी ज्यादतियां हो रही हैं, जैसी चीन भी तिब्बत में नहीं कर रहा है
24 सितंबर 2025 को क्या हुआ था? रिपोर्ट के मुताबिक, 24 सितंबर 2025 को छठी अनुसूची का दर्जा और लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद पुलिस ने कथित तौर पर गोलीबारी की थी।
इसमें चार लोगों की मौत और करीब 90 लोग घायल हुए थे। वांगचुक ने इन मौतों की जांच के लिए पीपुल्स ट्रिब्यूनल गठित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित न्यायिक आयोग ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे निहत्थे युवाओं पर स्वचालित हथियारों से गोलियां चलाई गईं। हालांकि, उन्होंने उन दावों को खारिज किया कि प्रदर्शन उनके कारण शुरू हुए थे।
वांगचुक ने सरकार पर क्या आरोप लगाया? वांगचुक ने आरोप लगाया कि 2020 के LAHDC-लेह चुनाव से पहले चुनाव कराने का विरोध कर रहे लद्दाखी प्रतिनिधियों को विशेष विमान से नई दिल्ली ले जाया गया था। उनके मुताबिक, वहां उन्हें राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने का वादा किया गया था। उन्होंने पिछले साल हुए प्रदर्शनों के लिए सरकार की ओर से कथित तौर पर इन वादों को पूरा न करने को जिम्मेदार ठहराया।
पिछले साल कथित आगजनी और दंगों के बाद लेह में कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लगाई गई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, एफआईआर दर्ज की गईं और वांगचुक समेत 81 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। वांगचुक पर NSA के तहत मामला दर्ज किया गया और उन्हें जोधपुर जेल भेजा गया। 170 दिन बाद केंद्र सरकार ने 14 मार्च को उनकी हिरासत वापस ले ली, जिसके बाद वह रिहा हुए।
‘मुठभेड़ में मारे जाने का डर’ वांगचुक ने लद्दाख में कथित ज्यादतियों के खिलाफ बोलने पर खुद को “मुठभेड़” में मारे जाने का डर भी जताया था। उन्होंने कहा कि उन्हें जेल भेजा गया, उनके खिलाफ जांच हुई और अब केवल मुठभेड़ ही बाकी है।
24 सितंबर को लेह में ‘शहीद दिवस’ के तौर पर पूर्ण बंद भी देखा गया। वांगचुक ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने लोगों को रैली में शामिल होने से रोका। हालांकि, पुलिस ने इस आरोप से इनकार किया।
पुलिस के मुताबिक, लद्दाख बौद्ध संघ ने लेह के एनडीएस स्टेडियम में सार्वजनिक बैठक की अनुमति मांगी थी। स्टेडियम की क्षमता 10,000 लोगों की है, लेकिन प्रशासन ने सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक प्रार्थना सभा की अनुमति दी थी। पुलिस ने कार्यक्रम में करीब 800 लोगों के शामिल होने का दावा किया और यह आरोप भी खारिज किया कि लोगों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे।

