दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच शुक्रवार देर रात और शनिवार को कई ट्रेनें रद्द कर दी गई थीं या फिर उनका मार्ग परिवर्तन किया गया था। हालांकि यात्रियों के बड़ी राहत देते हुए उत्तर रेलवे ने कहा है कि रविवार से सभी ट्रेनें अपने निर्धारित समय से चलेंगी। रेलवे ने कहा कि अब यातायात पूरी तरह सामान्य हो चुका है। यह जानकारी उत्तर रेलवे के सीपीआरओ हिमांशु शेखर उपाध्याय ने दी।
कितनी ट्रेनें हो गई थीं रद्द शुक्रवार रात से ही कई ट्रेनें रद्द हो गई थीं। जानकारी के मुताबिक दिल्ली, नई दिल्ली और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर आने या फिर यहां से जाने वाली करीब 250 ट्रेनों को रद्द किया गया था। इसके अलावा अचानक इतनी संख्या में ट्रेनें रद्द होने से यात्रियों में अफरा-तफरी और स्टेशन पर भी भीड़ देखने को मिली। रविवार को भी कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदर्शन का ऐलान किा है। हालांकि ट्रेनों को रोकने या रद्द करने का कोई आदेश नहीं जारी किया है।
दो दिन में यात्रियों के डूबे एक करोड़ रुपये रेल मंत्रालय के 9-10 अक्तूबर को अचानक मेल-एक्सप्रेस सहित 250 से अधिक ट्रेन रद्द करने के निर्णय से लाखों यात्रियों को मानसिक व आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। यात्रा नहीं करने के बावजूद जीएसटी और पेमेंट गेटवे चार्ज के रूप में 75 लाख से एक करोड़ रुपये तक डूब गए। जानकारों का कहना है कि रेलवे प्रशासनिक कारणों से भले ही ट्रेन रद्द होने पर 100 फीसदी मूल किराया वापस कर देता है, लेकिन ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान वसूले गए थर्ड-पार्टी चार्ज और करों का नुकसान पूरी तरह यात्रियों को उठाना पड़ता है। आईआरसीटीसी से टिकट बुक करते समय नॉन एसी और एसी टिकटों पर क्रमशः 15 से 40 रुपये तक सेवा शुल्क (कन्वीनियंस फीस) और पेमेंट गेटवे शुल्क वसूला जाता है। इन पर 18 फीसदी जीएसटी भी लगता है, जो पूरी तरह गैर-वापसी योग्य (नॉन-रिफंडेबल) है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, विभिन्न ट्रेन के रद्द होने से ढाई से तीन लाख यात्री प्रभावित हुए हैं। प्रति टिकट औसतन 30 से 45 रुपये सेवा शुल्क व कर मान लिया जाए तो अनुमान के अनुसार, यात्रियों के बैंक खातों से 75 लाख से एक करोड़ रुपये कट गए, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी।
रेलवे को भी 12-15 करोड़ रुपये का नुकसान : रेल विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में ट्रेन रद्द होने से रेलवे को भी 12-15 करोड़ रुपये रिफंड के रूप में नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा लोको पायलट, कर्मचारियों का वेतन और स्टेशनों पर रैकों के खड़े रहने से रेलवे को परोक्ष वित्तीय नुकसान हुआ है। वहीं, मालगाड़ियों का संचालन गड़बड़ाने से रेलवे के राजस्व पर भी असर पड़ा है। (हिन्दुस्तान प्रिंट के सहयोग से)

