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क्या मेडिटेशन के साइड इफेक्ट्स भी होते हैं? जानें कब रहना चाहिए सावधान

ध्यान के दौरान कुछ लोगों को बेचैनी, चक्कर आना या उदासी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

झटपट समझें

हाँ, मेडिटेशन के कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे बेचैनी, चक्कर आना, या पुरानी यादों से उदासी महसूस होना, खासकर यदि आप इसे सही तरीके से न करें।

मुख्य बातें

  • मेडिटेशन के दौरान गहरी सांस लेने से चक्कर आ सकते हैं।
  • पुरानी यादें ताज़ा होने से अचानक रोना या उदास महसूस हो सकता है।
  • लंबे समय तक मेडिटेशन से आसपास की दुनिया से कटा हुआ महसूस हो सकता है।
  • कुछ लोगों को मेडिटेशन के बाद रात में नींद आने में परेशानी होती है।
  • पहले से एंग्जायटी या डिप्रेशन वाले लोगों को कुछ मेडिटेशन से दिक्कत बढ़ सकती है।
एक महिला पार्क में ध्यान कर रही है।
मेडिटेशन के दौरान अपने विचारों और भावनाओं पर ध्यान केंद्रित करने से अप्रत्याशित अनुभव हो सकते हैं।

जब भी मेडिटेशन की बात होती है, तो यही कहा जाता है कि इससे स्ट्रेस कम और मन शांत होता है। लेकिन जरा सोचिए, अगर मेडिटेशन करने के बाद सुकून मिलने के बजाय घबराहट होने लगे या पुरानी बातें याद करके मन उदास हो जाए, तो? सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन कुछ लोगों के साथ ऐसा होता है। मेडिटेशन के दौरान जब हम अपने विचारों और भावनाओं पर ध्यान देते हैं, तो कई ऐसी बातें भी सामने आने लगती हैं, जिन्हें हम रोजमर्रा की भागदौड़ में इग्नोर कर देते हैं। ब्राउन यूनिवर्सिटी समेत कई संस्थानों में हुई रिसर्च में भी मेडिटेशन से जुड़े ऐसे अनुभवों पर बात की गई है। आइए जानते हैं मेडिटेशन के बाद होने वाली 7 परेशानियों के बारे में।

मेडिटेशन से होने वाले कुछ साइड इफेक्ट्स 1. बेचैनी और घबराहट होना मेडिटेशन करते समय जब आप शांत बैठकर अपने विचारों पर ध्यान देते हैं, तो मन में चल रही चिंताएं ज्यादा परेशान करने लगती हैं। ऐसे में घबराहट, बेचैनी या बार-बार उठने का मन करता है। अगर आपके साथ ऐसा हो, तो खुद को जबरदस्ती शांत करने की कोशिश न करें। कुछ देर मेडिटेशन रोकें और आराम से बैठें।

2. चक्कर आना मेडिटेशन के दौरान कुछ लोग बहुत गहरी या तेजी से सांस लेने लगते हैं। इससे शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल बदलता है और चक्कर आने लगते हैं। इसलिए मेडिटेशन करते समय सांसों को जबरदस्ती तेज या गहरा न करें। आराम से और अपने नेचुरल तरीके से सांस लें। चक्कर आए, तो तुरंत रुक जाएं।

3. अचानक रोना या उदास होना कभी-कभी मेडिटेशन करते समय पुरानी बातें याद आने लगती हैं। कुछ लोगों को पुरानी घटनाओं का दुख महसूस होता है, तो किसी को अचानक रोना आ जाता है। दिनभर काम में उलझे रहने के कारण जिन भावनाओं पर ध्यान नहीं जाता, वे शांत बैठने पर सामने आने लगती हैं। ऐसा होने पर खुद को कमजोर न समझें। अगर उदासी लंबे समय तक बनी रहे, तो मदद लें।

4. आसपास की चीजों से कटा हुआ महसूस करना कुछ लोगों को लंबे समय तक मेडिटेशन करने के बाद ऐसा लगता है जैसे वे अपने आसपास की दुनिया से कट गए हों। सब कुछ अजीब या सपने जैसा लगने लगता है। ऐसा महसूस होने पर मेडिटेशन बंद कर दें। अपने आसपास की चीजों को ध्यान से देखें, पैरों को जमीन पर टिकाएं और थोड़ा टहल लें

5. रात में नींद न आना मेडिटेशन करने के बाद आमतौर पर मन रिलैक्स होता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके बाद ज्यादा एक्टिव महसूस होता है। ऐसे में रात को बिस्तर पर जाने के बाद भी नींद नहीं आती। अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है, तो सोने से ठीक पहले मेडिटेशन न करें।

6. शरीर में दर्द और झनझनाहट होना मेडिटेशन करते समय लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से कमर, गर्दन और कंधों में दर्द होने लगता है। कई बार हाथ-पैरों में झनझनाहट भी महसूस होती है। शांत बैठने पर शरीर में पहले से मौजूद खिंचाव ज्यादा महसूस होने लगता है इसलिए आरामदायक पोजिशन में बैठें।

7. एंग्जायटी और डिप्रेशन बढ़ना जिन लोगों को पहले से एंग्जायटी, डिप्रेशन या किसी पुरानी दुखद घटना से जुड़ी परेशानी है, उन्हें कुछ तरह के मेडिटेशन से ज्यादा दिक्कत हो सकती है। इससे पुरानी यादें और बेचैनी बढ़ने लगती हैं। ऐसे में खुद पर मेडिटेशन करने का दबाव न डालें। बेहतर है कि मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

इन बातों का ध्यान रखें मेडिटेशन करने के बाद बेचैनी होना हर किसी के साथ नहीं होता। लेकिन अगर आपको बार-बार ऐसा महसूस हो रहा है, तो इसे इग्नोर न करें। शुरुआत में 5 से 10 मिनट ही मेडिटेशन करें और ऐसी जगह बैठें, जहां आपको आराम महसूस हो। अगर घबराहट या चक्कर आने लगें, तो तुरंत रुक जाएं। परेशानी लंबे समय तक बनी रहे या रोजमर्रा के कामों पर असर डालने लगे, तो डॉक्टर से बात करें। याद रखें, मेडिटेशन का मकसद मन को बेहतर महसूस कराना है, न कि खुद को परेशानी में डालना।

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