चुनाव आयोग के अंदर दो चुनाव आयुक्तों की असहमतियों के बीच उपजे विवाद पर चुनाव आयोग ने सफाई दी है और कहा है कि आयोग के अंदर सभी फैसले सर्वसम्मति से हो रहे हैं। आयोग ने एक बयान जारी कर कहा है कि वैचारिक मतभेद का मतलब टकराव नहीं समझा जाना चाहिए। बयान में आयोग ने कहा, "किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है। ये अंतिम फैसला लेने से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। न केवल तीनों आयुक्तों, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है।"
SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर तीन सदस्यीय आयोग में दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर मीडिया में आई खबरों के बाद चुनाव आयोग ने ये बयान जारी किया है। आयोग ने निकाय के भीतर मतभेद की खबरों पर कहा कि चुनाव आयुक्तों के सुझाव चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार के लिए थे और अलग-अलग राय और टिप्पणियां संस्थानों में चर्चा की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा, अंतिम निर्णय से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का ही अंग है।
आयोग ने सर्वसम्मति से लगभग 40 नई पहलें शुरू की हैं बयान में कहा गया है, “10 महीनों के दौरान की कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों/अवलोकनों को उजागर करना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, तस्वीर का केवल एक हिस्सा ही दिखाता है। हाल के महीनों में, आयोग ने कई फैसले लिए हैं और निर्देश जारी किए हैं, लगभग 40 नई पहलें शुरू की हैं और देश भर में मतदाता सूची संशोधन (SIR सहित) के संचालन सहित कई चुनावी सुधार किए हैं। ये सभी फैसले पिछले एक साल में पूरे आयोग के सर्वसम्मत फैसलों के परिणाम हैं।”
क्यों और कैसे शुरू हुआ विवाद? बता दें कि आयोग की तरफ से यह सफाई 'इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR प्रक्रिया के दौरान लिए गए फैसलों और जारी किए गए आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। इस रिपोर्ट के बाद एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। कुछ विपक्षी दलों ने जहां सुप्रीम कोर्ट से मामले में दखल देने की मांग की तो कुछ ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।
रिपोर्ट पर पूछे गए सवालों के जवाब में, चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि दोनों आयुक्तों ने वोटर लिस्ट को ठीक करने (क्लीनअप) के दौरान अलग-अलग राज्यों में नाम हटाने और वोटर डेटाबेस को संभालने से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई थी। हालांकि, आयोग का कहना है कि इन घटनाओं को SIR को लेकर आयोग के भीतर असहमति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

