आईआईटी बॉम्बे के सेकंड ईयर के छात्र के सुसाइड करने पर सीजेपी के अभिजीत दीपके ने कहा कि दूरदराज के आदिवासी इलाकों में भी छात्र मर रहे हैं और मुंबई जैसे बड़े शहर में भी। यह संकट हर जगह फैला हुआ है। छात्रों की जिंदगी को प्राथमिकता देने से पहले और कितने छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ेगी? वहीं, आईआईटी बॉम्बे के छात्रों ने इस मामले को लेकर शुक्रवार देर रात विरोध प्रदर्शन किया।
इससे पहले अभिजीत दीपके ने यूपीआई के लिए प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ट्रांजैक्शन चार्ज को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस कदम को खुली लूट बताया और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। मीडिया से बात करते हुए दीपके ने कहा कि नोटबंदी के बाद सरकार ने कैशलेस इकॉनमी की बात की थी। अब जब लोगों ने इसे अपना लिया है तो सरकार ने इस पर टैक्स लगा दिया है।
दीपके ने एएनआई से कहा कि मुझे लगता है कि यह खुली लूट है। यूपीआई पर लगाए जा रहे चार्ज वापस लिए जाने चाहिए। जब नोटबंदी लागू की गई थी तब सरकार ने कैशलेस इकॉनमी की बात की थी। और अब जब लोगों ने असल में कैशलेस इकॉनमी को अपना लिया है तो आप उस पर भी टैक्स लगा रहे हैं। इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
इसी तरह की चिंता जताते हुए कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने पहले दिए गए आश्वासनों के बावजूद चार्ज लागू करने की आलोचना की। शुक्ला ने पत्रकारों से कहा कि पार्टी ने यूपीआई के बारे में अपना रुख साफ कर दिया था। सरकार को यूपीआई टैक्स वापस लेना चाहिए। वित्त मंत्रालय ने पहले कहा था कि कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा, फिर भी अब यह टैक्स लागू कर दिया गया है।
बीजेडी के राज्यसभा सांसद सुभाषिश खुंटिया ने भी यूपीआई ट्रांज़ैक्शन पर लगने वाले चार्ज के असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस टैक्स से छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। खुंटिया ने एएनआई से कहा कि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज का सीधा असर छोटे व्यवसायों और सड़क किनारे सामान बेचने वालों पर पड़ेगा। सामान्य ट्रांजैक्शन भी 2000 रुपये से ज्यादा के हो सकते हैं और ऐसे टैक्स से छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सरकार को इस प्रस्ताव पर फिर से विचार करना चाहिए और इसे लागू नहीं करना चाहिए।
यह बयान तब आया है जब व्यापारियों के संगठनों ने 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस कदम से व्यवसायों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने इसे लागू किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
इस बीच, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव मेहता ने कहा है कि चुनिंदा यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करना देश के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने और उसका विस्तार करने की लागत को पूरा करने के लिए जरूरी है। मेहता ने कहा कि कोई न कोई तो वह लागत उठाएगा ही। उन्होंने आगे कहा कि पूरे पेमेंट इकोसिस्टम को मुफ्त में चलाना टिकाऊ नहीं था।

