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तमिलनाडु सरकार ने आरटीआई छूट का आदेश वापस लिया, कांग्रेस ने उठाए थे सवाल

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार ने लॉ एंड ऑर्डर विभाग को आरटीआई से छूट देने का फैसला पलटा

झटपट समझें

तमिलनाडु सरकार ने आरटीआई एक्ट के तहत लॉ एंड ऑर्डर विभाग को दी गई छूट का अपना पुराना आदेश वापस ले लिया है, जिसकी विपक्षी दलों ने आलोचना की थी।

मुख्य बातें

  • तमिलनाडु सरकार ने लॉ एंड ऑर्डर विभाग को आरटीआई से छूट देने का आदेश रद्द किया।
  • कांग्रेस और सीपीएम ने सरकार के इस फैसले की आलोचना की थी।
  • आरटीआई एक्ट के सेक्शन 24(4) के तहत दी गई छूट को वापस लिया गया।
  • लॉ एंड ऑर्डर विभाग इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी से जुड़े मामलों को देखता है।
  • कांग्रेस नेता कार्ति पी. चिदंबरम ने आदेश वापसी का स्वागत किया।
एक व्यक्ति काले रंग की शर्ट पहने हुए कुर्सी पर बैठा है, उसके सामने दो छोटे भारतीय झंडे हैं।
तमिलनाडु सरकार ने आरटीआई छूट का आदेश वापस लिया, जिसके बाद कांग्रेस नेता कार्ति पी. चिदंबरम ने इस कदम का स्वागत किया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय अपने एक फैसले को लेकर बैकफुट पर आ गए हें। उन्होंने रविवार को पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) विभाग को आरटीआई एक्ट से छूट देने वाले अपने पुराने ऑर्डर को वापस ले लिया है। उनके इस फैसले की पहले टीवीके की सहयोगी सीपीएम, कांग्रेस ने कड़ी आलोचना की थी।

अब राज्य सरकार के ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ने नया आदेश जारी करके कहा है कि आरटीआई एक्ट के सेक्शन 24(4) के तहत 21 सितंबर को जारी छूट का तरीका रद्द कर दिया गया है। पहले के ऑर्डर में पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) डिपार्टमेंट को एक इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑर्गनाइज़ेशन के तौर पर क्लासिफाई किया गया था। इसके बाद, यह आरटीआई छूट के तहत आ गया था।

इस विभाग का काम सांप्रदायिक और जातिगत झगड़ों, राजनीतिक आंदोलनों, प्रिवेंटिव डिटेंशन, कस्टोडियल डेथ और पुलिस टॉर्चर के आरोपों जैसे मामलों को देखना है और उस पर ऐक्शन लेना है। आरटीआई एक्ट के सेक्शन 24 के तहत, सरकार द्वारा बताए गए इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन को कुछ छूट के साथ, जिसमें करप्शन और ह्यूमन राइट्स वायलेशन से जुड़ी जानकारी शामिल है, कानून से छूट दी जा सकती है।

विजय सरकार में शिक्षा मंत्री राज मोहन ने कहा है कि वह मामले की स्टडी करेंगे। साथ ही यह भी कहा कि बोलने की आजादी में कोई रुकावट नहीं आएगी। उन्होंने लक्ष्मण रेखा पर विचार करने की भी बात कही। कांग्रेस नेता कार्ति पी चिदंबरम ने भी ओरिजिनल कदम की आलोचना की। उन्होंने कहा था कि यह कदम एक अच्छी मिसाल नहीं है। यह याद दिलाया कि RTI एक्ट UPA सरकार ने डेमोक्रेटिक अकाउंटेबिलिटी को मजबूत करने के लिए लाया था।

कांग्रेस के चिदंबरम ने उठाए थे सवाल कार्ति चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट किया, "लॉ एंड ऑर्डर डिपार्टमेंट पुलिस फायरिंग, कस्टोडियल डेथ, टॉर्चर और रिमांड कैदियों की मौत, सिक्योरिटी से जुड़े डिटेंशन केस, कम्युनल और कास्ट क्लैश रिपोर्ट, पॉलिटिकल रूप से सेंसिटिव केस वापस लेने की रिक्वेस्ट और बदनाम करने वाले आर्टिकल, न्यूज आइटम और भाषणों के लिए केस चलाने की मंजूरी जैसे जरूरी मामलों को देखता है। यह जरूरी जानकारी अब जनता से छिपाई जा रही है। इस तरह के रोलबैक ट्रांसपेरेंट गवर्नेंस के हिसाब से नहीं हैं। आरटीआई को बढ़ाया जाना चाहिए, रोका नहीं जाना चाहिए।"

ऑर्डर रद्द होने का चिदंबरम ने किया स्वागत वहीं, ऑर्डर के रद्द होने के बाद चिदंबरम ने इस कदम का स्वागत किया और कहा, "टीवीके सरकार और CMO तमिलनाडु को मेरी बिना मांगी और दोस्ताना सलाह है- ब्यूरोक्रेट्स को एडमिनिस्ट्रेशन का टोन, टेम्पररी और डायरेक्शन तय न करने दें।" भाजपा नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने भी ओरिजिनल फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने कहा, "तो वे प्रेस से मिलने से डरते हैं, वे लोगों से मिलने से डरते हैं, और वे लीगल प्रोसीजर से डरते हैं। अगर आप फ्री और फेयर हैं, तो आप RTI से क्यों डरते हैं?

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