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ट्रंप ने H-1B वीज़ा शुल्क 1 साल के लिए बढ़ाया, भारतीयों की बढ़ी चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा शुल्क में 1 लाख डॉलर की बढ़ोतरी को 1 साल के लिए बढ़ा दिया है।

झटपट समझें

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा शुल्क में 1 लाख डॉलर की बढ़ोतरी को 1 साल के लिए बढ़ा दिया है, जिससे भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करना और महंगा हो जाएगा, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय इस वीज़ा के माध्यम से अमेरिका जाते हैं।

मुख्य बातें

  • ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा के लिए 1 लाख डॉलर का शुल्क 1 साल के लिए बढ़ाया है।
  • यह फैसला 21 सितंबर 2025 को लागू होने के बाद से 700 से अधिक लोगों ने फीस चुकाई है।
  • अमेरिकी कंपनियों ने H-1B रजिस्ट्रेशन में 92% की कमी देखी है, जो 24946 से घटकर 2055 हो गया है।
  • 2024 में अमेरिका में 71% H-1B वीज़ा धारक भारतीय थे, जबकि चीन के 12% थे।
  • शुल्क बढ़ाने के 2025 के आदेश को अदालत में चुनौती दी गई है और यह मामला दो संघीय अदालतों में विचाराधीन है।
  • ट्रंप ने H-1B वीज़ा आवेदनों की जांच कड़ी करने का भी निर्देश दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप एक गहरे नीले रंग के सूट और लाल टाई पहने हुए बोल रहे हैं।
H-1B वीज़ा शुल्क में बढ़ोतरी से भारतीय पेशेवरों पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं जिससे पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। वहीं भारत पर भी उनके फैसलों का सीधा असर पड़ रहा है। 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले कानून को मंजूरी देने के अलावा ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा पर लगने वाले शुल्क को एक साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा के लिए 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाया है। अमेरिका की कोर्ट में उनके इस फैसले के खिलाफ केस भी चल रहा है।

ट्रंप प्रशासन का पहले का आदेश सितंबर 2026 तक ही लागू था। बता दें कि एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां दुनियाभर के कुशल लोगों को हायकर करती हैं। आईटी सेक्टर में भी बड़ी संख्या में लोगों को अमेरिका में नौकरियां मिलती हैं। इनमें भारतीयों की संख्या काफी ज्यादा है। वाइट हाउस का कहना है कि ये कंपनियां विदेश से लोगों को सस्ते में हायर करती हैं और अमेरिकियों के लिए रोजगार का संकट पैदा हो जाता है। ऐसे में दोनों तरफ से कंपनियां ही शोषण कर रही हैं।

जानकारी के मुताबिक 21 सितंबर 2025 को यह फैसला लागू होने के बाद से 700 से ज्यादा लोगों ने फीस चुकाई है। वहीं अब डिपार्टमेंट ऑफ होम सिक्योरिटी ने एच-1बी के लिए चयन प्रक्रिया में भी परिवर्तन करने का ऐालान कर दिया है। बताया गया है कि अमेरिकी कंपनियों ने एच-1बी रजिस्ट्रेशन को 24946 से घटाकर 2055 कर दिया है। इसमें 92 फीसदी की कमी देखी गई है।

भारतीयों के लिए क्यों टेंशन की बात भारत के बड़ी संख्या में प्रेफेशनल एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में काम करने जाते हैं। यूएससीआईएस के डेटा के मुताबिक 2024 ममें अमेरिका में 71 फीसदी एच-1बी वीजा वाले लोग भारतीय थे। वहीं चीन के 12 फीसदी लोग ही थे। भारतीय लोगों के लिए अमेरिका में काम करने का मौका एच-1बी वीजा के जरिए ही मिलता है। हालांकि अब 1 लाख डॉलर चुकाना आसान नहीं है।

2025 में एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है और यह मामला दो अलग-अलग संघीय अदालतों में विचाराधीन है। शुल्क बढ़ाने संबंधी 2025 के इस आदेश की अवधि इस महीने समाप्त होने वाली थी। यह आदेश उन विदेशी नागरिकों को दिए गए वीजा पर लागू नहीं है जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं और नए एच-1बी वीजा पाने वालों में जिनकी बड़ी हिस्सेदारी है। यह मौजूदा वीजा के नवीनीकरण पर भी लागू नहीं था।

राष्ट्रपति ने एक अलग घोषणा भी जारी की है, जिसमें विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के जरिये एच-1बी वीजा आवेदनों की जांच और कड़ी करने का प्रावधान है। आदेश में विदेश मंत्री, श्रम मंत्री और गृह सुरक्षा मंत्री को निर्देश दिया गया है कि एच-1बी वीजा आवेदनों पर विचार करते समय वे यह भी देखें कि क्या आवेदनकर्ता नियोक्ता ने समान पदों पर कार्यरत अमेरिकी कर्मचारियों की हाल में छंटनी की है या वह ऐसा करने की योजना बना रहा है।

ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में कहा कि एच-1बी गैर प्रवासी वीजा कार्यक्रम की शुरुआत अत्यधिक विशिष्ट कौशल वाले विदेशी अस्थायी कर्मचारियों की पहचान करने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को रणनीतिक रूप से पूरा करने के लिए की गई थी। ट्रंप ने कहा, ''इसके बजाय कुछ नियोक्ताओं, तीसरे पक्ष के जरिये कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाले समूहों और आउटसोर्सिंग कंपनियों ने अमेरिकी कुशल श्रमिकों को कम वेतन देने और उन्हें नौकरियों से निकालने के लिए इस कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया है।''

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