देश भर में लोग नवरात्रि के दौरान डांडिया का आयोजन किया जाता है। तेलंगाना में भी ऐसे कई आयोजन किए जा रहे हैं। हालांकि, वहां के कुछ डांडिया इवेंट के आयोजकों ने मुस्लिम बाउंसरों को काम पर नहीं रखने का फैसला किया है। इस मुद्दे पर राजनीति भी हो रही है। हैदराबाद के सांसद और एआईएमएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इसकी निंदा की है और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, बीजेपी से सस्पेंड किए गए विधायक टी. राजा सिंह ने डांडिया नाइट्स इवेंट में सिर्फ हिंदू बाउंसरों को तैनात करने के इस कदम का बचाव किया है।
इस विवाद के बाद हैदराबाद में बाउंसर एजेंसियों के प्रतिनिधियों और हिंदू-मुस्लिम सुरक्षाकर्मियों के एक समूह ने रोजगार के समान अवसरों के लिए सार्वजनिक रूप से अपील की है।
ओवैसी और राजा सिंह के बीच टकराव 6 अक्टूबर को यह विवाद तब चर्चा का विषय बन गया जब ओवैसी ने उन खबरों पर चिंता जताई जिनमें कहा गया था कि डांडिया आयोजक कट्टरपंथी संगठनों के दबाव में मुस्लिम बाउंसरों को काम पर रखने से इनकार कर रहे थे। AIMIM प्रमुख ने तेलंगाना के सभी धर्मों के लोगों से इस भेदभाव के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया और चेतावनी दी कि अगर इस तरह का बंटवारा जारी रहा तो राज्य की प्रगति और विकास पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, "अगर पुलिस सख्त कार्रवाई करे तो इस जहर को रोका जा सकता है।"
इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए राजा सिंह ने ओवैसी के दखल पर सवाल उठाया और पूछा कि AIMIM अध्यक्ष कौन होते हैं यह तय करने वाले कि हिंदू त्योहारों के दौरान हिंदू बाउंसर रखे जाएं या मुस्लिम बाउंसर। एक वीडियो बयान में उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम त्योहारों के दौरान हिंदुओं को न तो प्रवेश दिया जाता है और न ही नौकरी दी जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कुछ सालों में मुस्लिम बाउंसरों की मदद से डांडिया कार्यक्रमों में हिंदू लड़कियों को निशाना बनाकर लव जिहाद के मामले बढ़े हैं। उन्होंने डांडिया आयोजकों की तारीफ की कि उन्होंने सिर्फ हिंदू बाउंसर रखने का फैसला किया है और चेतावनी दी कि वे ऐसे कार्यक्रमों को रोक देंगे जिनमें गैर-हिंदू सुरक्षाकर्मी रखे जाएंगे।
हम रोजगार के लिए लड़ें, धर्म के लिए नहीं इस महीने की शुरुआत में मोहम्मद फिरोज ने कहा कि यह मुद्दा धर्म से नहीं बल्कि बहुत से लोगों की आजीविका से जुड़ा है। मोहम्मद फिरोज ने कहा कि मुस्लिम बाउंसरों के बहिष्कार से प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री में सैकड़ों लोग प्रभावित हो रहे हैं। ये अपनी आजीविका के लिए त्योहारों के मौसम में मिलने वाले काम पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने कहा, "हम रोजगार के लिए लड़ रहे हैं, धर्म के लिए नहीं। मुसलमानों, हिंदुओं, ईसाइयों और सिखों सभी को समान अवसर मिलने चाहिए। किसी को भी उनके नाम या धार्मिक पहचान के कारण काम से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।" फिरोज ने बताया कि इसके बाद उन्होंने ओवैसी से संपर्क किया और उनसे इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाने और कथित भेदभाव की ओर ध्यान आकर्षित करने का अनुरोध किया।
लव जिहाद के आरोपों को किया खारिज प्राइवेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर्स के समूह ने मुस्लिम कर्मचारियों को लव जिहाद के आरोपों से जोड़ने की बात को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि त्योहारों के आयोजन स्थलों पर उनकी भूमिका केवल सुरक्षा प्रदान करने, भीड़ को संभालने और गड़बड़ी को रोकने तक ही सीमित होती है। फिरोज ने कहा, "हमारा काम इवेंट की सुरक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि वह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो। आयोजक हमें सुरक्षा सेवाओं के लिए काम पर रखते हैं। हम वहां किसी धार्मिक या राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए नहीं होते हैं।"
उन्होंने कहा, "अगर कोई अपराध करता है, तो कानून के मुताबिक उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करें। लेकिन कुछ लोगों पर लगे आरोपों की वजह से पूरे समुदाय को नौकरी न देना गलत है।" उन्होंने बताया कि उनकी टीम में 10 गैर-मुस्लिम बाउंसर भी शामिल थे, जो उनके साथ पांच साल से काम कर रहे थे।

