देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने एक और मोर्चा खोल दिया है। नया मामला चुनाव आयोग द्वारा युवा मतदाताओं को वोटर लिस्ट से जोड़ने का है। आरोप है कि बीते कुछ सालों से मतदाता सूची में युवा वोटर्स को जोड़ने पर रोक लगा दी गई है। इससे जुड़े एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए अब कांग्रेस ने चुनाव आयोग और भाजपा पर हमला बोला है।
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने एक और मोर्चा खोल दिया है। नया मामला चुनाव आयोग द्वारा युवा मतदाताओं को वोटर लिस्ट से जोड़ने का है। आरोप है कि बीते कुछ सालों से मतदाता सूची में युवा वोटर्स को जोड़ने पर रोक लगा दी गई है। इससे जुड़े एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए अब कांग्रेस ने चुनाव आयोग और भाजपा पर हमला बोला है।
रिपोर्ट में आयोग की वेबसाइट के हवाले से जानकारी देकर बताया गया है कि आखिरी बार SSR की प्रक्रिया 2024 में आयोजित की गई थी। इसके बाद 2025 में बिहार में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' शुरू हो गया और बाद में अन्य राज्यों में भी लागू हो गया। हालांकि सालाना SSR प्रक्रिया को रोक दिया गया। हर साल इस प्रक्रिया की घोषणा आमतौर पर मई के अंत में हो जाती है। हालांकि 2026-27 में होने वाली प्रक्रिया की इस साल भी कोई घोषणा नहीं की गई है।
दोनों आयुक्तों ने दिखाई थी हरी झंडी! रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा दोनों चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने युवाओं को वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए SSR प्रक्रिया को तुरंत फिर से शुरू करने की पुरजोर वकालत की थी। उनका तर्क था कि केवल SIR चलाने से सालाना SSR को बंद नहीं किया जाना चाहिए। वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने यह जानने के लिए कानूनी सलाह मांगी थी कि जारी SIR प्रक्रिया के बीच SSR की जरूरत है या नहीं।
ज्ञानेश कुमार पर कसता शिकंजा इससे पहले चुनाव आयोग पर इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद देशभर में संग्राम छिड़ा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के अलग अलग फैसलों पर 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। यह खबर सामने आते ही विपक्ष ज्ञानेश कुमार पर हमलावर हो गया है। विपक्ष उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। साथ ही CEC से इस्तीफे की मांग भी की जा रही है।
‘जेन जी से डरी सरकार’ युवा मतदाताओं को ना जोड़ने से जुड़ी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पीएम मोदी के फैसलों की तुलना करते हुए लिखा कि एक पीएम (राजीव गांधी) ने संसद के जरिए वोटिंग की उम्र 21 से घटाकर 18 साल करके युवाओं को अधिकार दिए थे, जबकि दूसरे पीएम (नरेंद्र मोदी) युवाओं की उम्मीदों को तोड़ने के बाद 2024 से SSR रोककर चोरी-छिपे युवाओं से वोटिंग का अधिकार छीन रहे हैं।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अगले साल उत्तर प्रदेश और गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन वहां SSR न कराए जाने से 18 साल के लाखों नए युवा वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने से वंचित रह गए हैं। यही हाल बिहार का भी है जहां पिछले साल SIR पूरा होने के बाद भी SSR शुरू नहीं किया गया। कांग्रेस ने इसे दिल्ली में परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ हुए युवाओं के आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि Gen Z के राजनीतिक रूप से सक्रिय होने से सरकार घबरा गई है। कांग्रेस ने कहा, “सरकार जेन-जी से डर गई है क्योंकि वह मोदी के खिलाफ खड़ी है। इसी घबराहट में मोदी ने ज्ञानेश कुमार के साथ मिलकर साजिश रची है।”
क्या बोला आयोग? इस बीच चुनाव आयोग ने आंकड़े जारी कर सफाई दी है। अधिकारियों के मुताबिक 2025 में आयोग द्वारा SIR की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद से 18 से 28 साल की उम्र के 2.73 करोड़ जेन-जी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं। आयोग ने युवा वोटरों के नाम न जुड़ने से जुड़ी शिकायतों को खारिज करते हुए कहा कि योग्य नागरिक एनुअल रिवीजन के अलावा भी मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

