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विजय थलपति का OBC दांव: कामराज के नाम पर योजना, DMK को चुनौती और BJP को 2029 का अवसर

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय ने ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम बदला, जिससे DMK और BJP दोनों पर असर दिख रहा है।

झटपट समझें

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज के नाम पर इसलिए रखा है क्योंकि यह DMK को चुनौती देने, नादर समुदाय तक पहुंचने और अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने का एक सोचा-समझा कदम है। यह कदम BJP को भी 2029 के लिए एक OBC कार्ड के रूप में संभावना दिखा रहा है।

मुख्य बातें

  • तमिलनाडु सरकार ने 22 सितंबर को मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम बदलकर ‘पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम’ कर दिया।
  • यह योजना सितंबर 2022 में DMK सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी और 15 जुलाई को इसका विस्तार किया गया था।
  • कामराज का नाम जोड़ने से विजय DMK को चुनौती दे रहे हैं और दक्षिणी तमिलनाडु के नादर समुदाय तक पहुंच बना रहे हैं।
  • कामराज की राजनीति कांग्रेस, ग्रामीण विकास, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी रही है।
  • नादर समुदाय का दक्षिणी तमिलनाडु की राजनीति में खास महत्व है, जिसकी राज्य के कुल मतदाताओं में 6 से 8 फीसदी हिस्सेदारी है।
  • BJP समर्थक कामराज को व्यापक OBC प्रतीक के तौर पर देख रहे हैं और केंद्र सरकार से किसी योजना का नाम उनके नाम पर रखने की अपील की है।
एक व्यक्ति माइक्रोफ़ोन पर बोल रहा है, जबकि दूसरा व्यक्ति पृष्ठभूमि में हाथ से इशारा कर रहा है।
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम बदलने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य की विस्तारित ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम बदलकर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता के. कामराज के नाम पर कर दिया है। पहली नजर में यह एक कल्याणकारी योजना के नाम में बदलाव लगता है, लेकिन इसके पीछे राजनीतिक संदेश काफी बड़ा माना जा रहा है। कामराज को योजना से जोड़कर विजय ने एक तरफ DMK पर निशाना साधा है, वहीं दक्षिणी तमिलनाडु में प्रभाव रखने वाले नादर समुदाय तक पहुंच बनाने की कोशिश भी की है।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों को विजय के इस कदम में भाजपा के लिए एक अलग राजनीतिक संभावना नजर आ रही है। उनका मानना है कि कामराज को तमिलनाडु की राजनीति के दायरे से निकालकर व्यापक OBC प्रतीक के तौर पर पेश किया जा सकता है। इसी कड़ी में एक भाजपा समर्थक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्र सरकार की किसी योजना का नाम कामराज के नाम पर रखने की अपील भी की है।

22 सितंबर को बदला योजना का नाम तमिलनाडु सरकार ने 22 सितंबर को आदेश जारी कर मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम बदलकर ‘पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम’ कर दिया था। यह योजना सितंबर 2022 में तत्कालीन DMK सरकार और एमके स्टालिन के कार्यकाल में शुरू हुई थी। शुरुआत में इसका लाभ सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को दिया जाता था।

इसके बाद विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार के सत्ता में आने के बाद योजना का विस्तार किया गया। 15 जुलाई को कामराज की जयंती के मौके पर इसमें कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को भी शामिल किया गया। अब योजना के साथ कामराज का नाम जोड़ने को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

कामराज के नाम के पीछे क्या है राजनीतिक संदेश? 1956 में कामराज ने तत्कालीन मद्रास स्टेट में स्कूल मील कार्यक्रम के राज्यव्यापी विस्तार की शुरुआत की थी। इसके तहत गरीब प्राथमिक स्कूल के बच्चों को मुफ्त दोपहर का भोजन दिया जाता था। कामराज की राजनीति कांग्रेस, ग्रामीण विकास, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी रही। इसके अलावा उनकी पहचान नादर समुदाय के प्रमुख नेताओं में भी होती है।

विजय की राजनीति फिलहाल DMK और AIADMK के पारंपरिक द्रविड़ राजनीतिक ढांचे से अलग अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में कामराज का नाम उन्हें द्रविड़ राजनीति की विचारधारा से अलग एक राजनीतिक विरासत से जुड़ने का अवसर देता है।

इंडिया टुडे से बात करते हुए BJP समर्थक संगठन टीम आरडी मोदीजी फॉर 2029 के प्रमुख रविंद्रन दुरईसामी ने कहा कि विजय का कामराज को चुनना कोई संयोग नहीं बल्कि सोचा-समझा कदम है। उन्होंने कहा कि विजय कामराज के नाम के जरिए DMK को चुनौती देने के साथ-साथ हिंदू नादरों को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

नादर समुदाय पर विजय की नजर? खबर के मुताबिक, नादर समुदाय का दक्षिणी तमिलनाडु की राजनीति में खास महत्व है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन, तेनकासी और विरुधुनगर जैसे दक्षिणी जिलों में इस समुदाय की अच्छी मौजूदगी है। रविंद्रन दुरईसामी के मुताबिक, राज्य के कुल मतदाताओं में नादर समुदाय की हिस्सेदारी करीब 6 से 8 फीसदी हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में इसका प्रभाव अलग-अलग है।

विजय खुद ईसाई हैं और ईसाई नादर समुदाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वहीं कामराज का नाम हिंदू नादरों तक पहुंच बनाने के लिए एक राजनीतिक सेतु के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी वजह से ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम बदलना सिर्फ सम्मान देने का कदम नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विजय के लिए कामराज क्यों अहम? विजय ने अपनी पार्टी की स्थापना के बाद से ही कामराज को स्वच्छ शासन और शिक्षा पर जोर देने वाले आदर्श के तौर पर पेश किया है। TVK की राजनीतिक छवि में तमिलनाडु और भारत के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास से जुड़े पांच प्रमुख नामों को जगह दी गई है। इनमें पेरियार ईवी रामासामी, के. कामराज, बीआर आंबेडकर, रानी वेलु नचियार और अंजलाई अम्मल शामिल हैं।

कामराज को सामने लाकर विजय यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि तमिलनाडु की राजनीतिक विरासत सिर्फ द्रविड़ आंदोलन तक सीमित नहीं है और कल्याणकारी राजनीति की एक दूसरी विरासत भी मौजूद है। दुरईसामी के मुताबिक, विजय ‘एंटी-ड्रविड़ियन’ राजनीतिक लाइन पर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, जिस दौर में कामराज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे और करुणानिधि तथा एमजीआर ने DMK की शुरुआत की थी, तब राजनीति द्रविड़ बनाम एंटी-द्रविड़ धड़े में बंटी हुई थी। अब विजय उसी तरह की राजनीतिक जमीन को DMK के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।

BJP को क्यों दिख रही बड़ी संभावना? मोदी समर्थक समूह कामराज को सिर्फ तमिलनाडु के नेता के तौर पर नहीं, बल्कि व्यापक OBC चेहरे के रूप में पेश करने की संभावना देख रहा है। रविंद्रन दुरईसामी ने बताया कि उनकी टीम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने केंद्र सरकार की किसी योजना का नाम कामराज के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा है। उनका तर्क है कि इससे BJP को तमिलनाडु के बाहर भी OBC समुदायों के साथ जुड़ने में मदद मिल सकती है।

इस प्रस्ताव में नादर, इझावा, भंडारी, जायसवाल, अहलूवालिया, गौड़ और इडिगा जैसे अलग-अलग OBC समुदायों को कामराज की विरासत के इर्द-गिर्द जोड़ने की बात कही गई है। BJP तमिलनाडु और केरल में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में उसके कुछ समर्थक कामराज की विरासत को व्यापक OBC गठजोड़ बनाने के संभावित माध्यम के तौर पर देख रहे हैं।

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