उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की सभी 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। समाजवादी पार्टी ने तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने का इशारा कर दिया है। भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशी अब राज्यसभा के सांसद बन जाएंगे। सपा के दोनों प्रत्याशी पहले ही नामांकन कर चुके हैं। भाजपा के आठों प्रत्याशी आज नामांकन दाखिल करेंगे। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने का इशारा मंगलवार की सुबह सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर किया।
अखिलेश यादव ने लिखा कि अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है। यूपी विधानसभा में 403 सीटें हैं। ऐसे में साफ हो गया है कि अखिलेश यादव राज्यसभा चुनाव में भाजपा से भिड़ने की जगह अब विधानसभा चुनाव में ही आर-पार करने के मूड में हैं। मंगलवार को नामांकन का अंतिम दिन है।
कौन-कौन बनने जा रहा है राज्यसभा सांसद भाजपा ने कल ही अपने आठों प्रत्याशियों का ऐलान किया था। सभी प्रत्याशी आज पर्चा दाखिल करेंगे। भाजपा ने योगी सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा, ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल, पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत, प्रदेश महामंत्री रामप्रताप सिंह चौहान और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया है। सपा की तरफ से वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव और उद्योगपति रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के निदेशक धनराज परिमल नथवानी को प्रत्याशी बनाया है।
राधाकांत ओझाः भाई शिवाकांत सपा सरकार में मंत्री रहे राज्यसभा के लिए नामित भाजपा प्रत्याशी राधाकांत ओझा का जन्म 10 फरवरी 1959 को प्रतापगढ़ में हुआ था। 1987 से लगातार वकालत कर रहे राधाकांत ओझा इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के दो बार (2015-16 और 2022-23) अध्यक्ष रहे। शुरुआती दिनों से आरएसएस के सहयोगी संगठनों और भाजपा से जुड़े रहे हैं। संवैधानिक और सिविल मामलों के विशेषज्ञ राधाकांत ओझा के बड़े भाई शिवाकांत ओझा लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहे एवं सपा और भाजपा सरकारों में मंत्री रहे।
धर्मपाल सिंहः योगी सरकार में मंत्री आंवला विधान सभा क्षेत्र से भाजपा विधायक धर्मपाल सिंह वर्तमान में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री हैं। वर्ष 1996 से राजनीति में सक्रिय धर्मपाल सिंह स्नातकोत्तर, एलएलबी, बीएड हैं। इनका जन्म 15 जनवरी 1953 को बरेली के गुलड़िया गौरीशंकर गांव में हुआ। पिता का नाम मिश्री सिंह है। धर्मपाल पिछड़ी जाति (लोधी-राजपूत) समुदाय से हैं। इनके तीन बेटे हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी मेंबर) से सियासत में आगाज करने वाले धर्मपाल सिंह पहली बार मंझगवां ब्लॉक से अक्तूबर 1988 में प्रमुख बने थे। इसके बाद 1996 में भाजपा के टिकट पर आंवला विधानसभा से पहली बार विधायक बने। फिर 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी उन्होंने भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की। इसके साथ ही योगी सरकार 1.0 में 2017 से 2019 तक सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे।
श्रुति गंगवारः झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी बरेली लोकसभा सीट से आठ बार के सांसद रहे और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की पुत्री श्रुति गंगवार अर्बन कोऑपरेटिव बैंक बरेली की चेयरमैन हैं। शिक्षा, तकनीक, बैंकिंग और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय श्रुति ने पहचान एक सफल उद्यमी और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बनाई है। श्रुति ने आईटी कंपनी इंफोसिस से अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। इसके बाद भारत और विदेश में काम करने का अनुभव हासिल किया। वर्ष 2012 में उन्होंने उद्यमिता की राह चुनी।
श्रुति ने आईआईटी रुड़की से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की शिक्षा वर्ष 2000 में पूरी की। वर्ष 2012 में उन्होंने आईआईएम बेंगलुरु से महिला उद्यमियों के लिए शॉर्ट टर्म मैनेजमेंट प्रोग्राम भी किया। श्रुति गंगवार 2024 से बरेली में अर्बन कोऑपरेटिक बैंक लिमिटेड की चेयरमैन हैं। श्रुति गंगवार वर्ष 2019 से भाजपा में सक्रिय पार्टी कार्यकर्ता के रूप में भी कार्य कर रही हैं। उनका फोकस सामाजिक सेवा के साथ शिक्षा, महिला उद्यमिता, तकनीक और जनसेवा से जुड़े क्षेत्रों पर रहा है।
विद्या सागर सोनकरः भाजपा के बड़े दलित चेहरा जौनपुर सदर के सुक्खीपुर निवासी 61 वर्षीय विद्यासागर सोनकर एमए, एलएलबी और बीएड हैं। वह भाजपा के बड़े दलित चेहरा माने जाते हैं। 1985 में शहर उत्तरी से भाजपा के बूथ अध्यक्ष बने। 1989 से 1994 तक जौनपुर नगर पालिका के सुक्खीपुर वार्ड के सभासद रहे। 1994 में भाजपा के जिला मंत्री बने। 1996 से 1998 तक सैदपुर (गाजीपुर) लोकसभा सीट से सांसद रहे। 2016 में भाजपा के प्रदेश महामंत्री बने। वर्ष 2017 में प्रदेश पंचायत प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष रहे। 2018 में पुन: प्रदेश महामंत्री बने। 2018 से 2024 तक विधान परिषद सदस्य रहे। फरवरी 2023 में विधान परिषद के उपनेता बने। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
प्रकाश पालः भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष 60 साल के प्रकाश पाल बर्रा कानपुर के रहने वाले हैं। संघ के प्रचारक के रूप में काम शुरू किया। वर्तमान में भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। संघ के प्रचारक के रूप में तीन साल पूर्णकालिक तहसील प्रचारक रहे। भाजपा जिला संगठन मंत्री फतेहपुर में वर्ष 1994 से 1997 तक, इसी पद पर 1997 में हमीरपुर एवं महोबा रहे। 1997 से 2000 तक अयोध्या, 2002 से इसी पद पर बांदा व 2002 से 2007 तक कानपुर एवं इटावा में यही दायित्व निभाया। वर्ष 2007 से 2013 तक भाजपा क्षेत्रीय संगठन मंत्री पश्चिम उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार किया। वर्ष 2013 से 2014 तक प्रदेश संगठन मंत्री पिछड़ा वर्ग मोर्चा में काम किया। वर्ष 2018 से भाजपा प्रदेश मंत्री के पद पर काम किया। 2018 से 2020 तक कार्यकारिणी सदस्य के पद पर भी रहे। प्रकाश पाल की निष्ठा को देखते हुए वर्ष 2020 से मार्च- 2023 तक भाजपा में प्रदेश उपाध्यक्ष का दायित्व मिला। मार्च - 2023 को भाजपा कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र का अध्यक्ष बनाया गया। वह इस पद पर 2026 तक काबिज रहे। 2026 में ही उन्हें भाजपा पिछड़ा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया।
राम प्रताप सिंह चौहानः पिता भाजपा के संस्थापक सदस्यों में रहे आगरा के गांधी नगर के निवासी राम प्रताप सिंह चौहान पोस्ट ग्रेजुएट हैं। पिता योगेंद्र सिंह चौहान भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं। राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1991 में भाजपा युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष के रूप में हुई। वर्ष 1991 से 1994 तक उन्होंने भाजयुमो आगरा में मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 1994 से 1998 तक महानगर उपाध्यक्ष और 1998 से 2001 तक महानगर अध्यक्ष रहे। संगठन में लगातार सक्रियता के चलते उन्हें 2001 से 2005 तक ब्रज क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया। इसके बाद प्रदेश संगठन में जिम्मेदारियां बढ़ती गईं। वर्ष 2005-06 में वह भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। वर्ष 2006-07 में आगरा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2007 से 2012 तक ब्रज क्षेत्र में प्रदेश महामंत्री और 2013 से 2016 तक प्रदेश मंत्री रहे। 2017 में एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। वर्तमान में प्रदेश महामंत्री हैं।
गोपी कृष्ण पांडेयः बजरंग दल और युवा वाहिनी से जुड़ाव कानपुर के बारादेवी क्षेत्र में रहने वाले गोपीकृष्ण पांडेय पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वह 12 साल की आयु में ही संघ के स्वयं सेवक बन गए थे। 1990 से 1992 तक बजरंग दल जिला सहसंयोजक का दायित्व निभाया। इसके बाद 1992 से 1995 तक उन्होंने हिन्दू जागरण मंच में प्रदेश युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष पद का निर्वहन किया। 1998 से 2002 तक भाजयुमो में प्रदेश उपाध्यक्ष का कार्यभार संभाला। वर्ष 2002 से 2005 तक भाजपा किसान मोर्चा में प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। भाजपा राष्ट्रीय किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य रहे। 2005 - 2008 तक मोर्चा के गुजरात.कर्नाटक, आंध्र प्रदेश प्रभारी भी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया
प्रियंका सिंह रावतः बाराबंकी से सांसद भी रहीं जन्म 7 अगस्त 1985 को हुआ। पति रघुनाथ आईआरएस अधिकारी हैं। इन्होंने राजनीतिक विज्ञान से एमए, मास कम्युनिकेशन एंड इलेक्ट्रानिक जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया। राजनीतिक सफर: 2 जून 2013 में भाजपा में शामिल हुईं। 2014 में बाराबंकी से सांसद निर्वाचित हुईं। 2019 में टिकट नहीं मिला। भाजपा की प्रदेश महामंत्री रहीं। वर्तमान में पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।
रामगोपाल यादवः रिश्ते में अखिलेश के चाचा और सपा के महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव रिश्ते में अखिलेश यादव के चाचा लगते हैं। समाजवादी पार्टी के रणनीतिकार माने जाते हैं। 29 जून 1946 को सैफई (इटावा) में जन्मे रामगोपाल यादव राजनीति से पहले अध्यापन क्षेत्र से जुड़े रहे। उन्होंने भौतिक विज्ञान में M.Sc. और राजनीति विज्ञान में Ph.D. की उपाधि हासिल की है।राजनीतिक सफर की शुरुआत 1989 में ब्लॉक प्रमुख और इटावा जिला परिषद के अध्यक्ष के रूप में की थी। वर्ष 1992 में वे पहली बार राज्यसभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद 2004 में संभल से लोकसभा सांसद चुने गए। संसद में सपा संसदीय दल के नेता रहे। लगातार कई बार से उच्च सदन में सपा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
धनराज परिमल नाथवानी: पिता भी रहे राज्यसभा सांसद धनराज परिमल नाथवानी देश के प्रमुख कॉरपोरेट एक्जीक्यूटिव, खेल प्रशासक के साथ ही रिलायंस ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी हैं। 5 फरवरी 1986 को जन्मे धनराज ने लंदन के रीजेंट्स बिजनेस स्कूल से इंटरनेशनल बिजनेस में स्नातक की उपाधि हासिल की है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में ग्रुप प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हैं और रिलायंस न्यू एनर्जी, जियो इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग एवं कंस्ट्रक्शन (EPC) जैसे कई प्रमुख व्यवसायों और प्रोजेक्ट्स की कमान संभालते हैं।
कॉरपोरेट जगत के अलावा खेल प्रशासन में भी उनकी मजबूत पकड़ है। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष हैं, जहां उन्होंने केंद्रीय मंत्री अमित शाह के बाद यह पदभार संभाला था। इसके अलावा वह गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन (GSFA) के अध्यक्ष भी हैं। उनके पिता परिमल नाथवानी भी देश के जाने-माने उद्योगपति और राज्यसभा सांसद रहे हैं।

