MLC Election Results: चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों के नतीजों को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। मतपत्र से हुए इन चुनावों में दांव पर उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक शामिल हैं। खास बात है कि इनमें विधानसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़े राज्य यूपी में कुछ महीनों में चुनाव होने हैं। इस दौरान खासा चर्चा में लखनऊ में समाजवादी पार्टी की जीत, बैलेट पेपर कर्नाटक में कांग्रेस की हार और वाराणसी सीट पर भारतीय जनता पार्टी को झटके की है।
आंकड़ों में समझें, तो यूपी की 11, बिहार की 8, कर्नाटक की 4 और महाराष्ट्र की 5 सीटों पर विधान परिषद चुनाव हुए थे। एक ओर जहां भाजपा ने कांग्रेस को कोई सीट न मिलने पर तंज कसा, वहीं विपक्ष ने वाराणसी में सपा की जीत को लेकर भाजपा को आईना दिखाने की कोशिश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के बड़े नेताओं की टिप्पणियों से यह गरमाहट और बढ़ गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने नतीजों को लेकर कहा कि यूपी, महाराष्ट्र, बिहार व कर्नाटक जैसे चार बड़े राज्यों की 28 सीट पर विधान परिषद चुनाव हुए। चुनाव मतपत्रों से कराए गए। अंदाजा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीट जीतीं?’
सपा ने उठाया वाराणसी में हार का मुद्दा
वहीं, सपा नेता अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा है कि वाराणसी में एमएलसी चुनाव में हार से हताश भाजपा की हालत खराब है, लखनऊ वाले दिल्ली वालों का फोन नहीं उठा रहे हैं। कांग्रेस ने तो भाजपा को अब मतपत्र से ही आगे के चुनाव कराने की भी चुनौती दे दी है। मामला चाहे एसआईआर का हो, मुख्य चुनाव आयुक्त का भाजपा और कांग्रेस में तीखा टकराव बीते कुछ दिनों जारी है।
UP में क्या है भाजपा का हाल
यूपी की 11 में से 10 सीटों पर नतीजे सामने आ चुके हैं, जिनमें 6 भाजपा और 4 सपा जीत चुकी है। अब नजरें वाराणसी खंड स्नातक सीट पर हैं, जहां सपा आगे चल रही है। इससे पहले भाजपा यहां शिक्षक सीट गंवा चुकी है। खास बात है कि वाराणसी प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र है।
बिहार में जन सुराज का खाता खुला
बिहार की 8 सीटों पर हुए चुनाव में NDA यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस को 4 सीटें मिली हैं। जबकि, एक विधायक प्रशांत किशोर की जन सुराज और एक राष्ट्रीय जनता दल को मिली है। दो सीटों पर निर्दलीय विजयी रहे। खास बात है कि हाल किशोर ने हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में जीत हासिल की थी।
विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों (पटना, सारण, दरभंगा,तिरहुत) पर मौजूदा विधान पार्षद चुनाव हार गए। वहीं, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की तीन सीटों- पटना, तिरहुत और कोसी पर पुराने चेहरे जीत गए। पटना शिक्षक सीट से राजद के डॉ. संजीव कुमार ने पिछले 30 वर्षों से काबिज भाजपा के नवल किशोर यादव को हरा दिया। दरभंगा में कांग्रेस के मदनमोहन झा जनसुराज के सुरेश प्रसाद राय ने मात दी।
महाराष्ट्र में महायुति 2 पर विजयी
महाराष्ट्र की नागपुर स्नातक, पुणे स्नातक, पुणे शिक्षक, अमरावती शिक्षक और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक के लिए वोटिंग हुई थी। इनमें से अमरावती में शिवसेना के किरण सरनाईक, पुणे शिक्षक सीट पर भाजपा के कौस्तुफ गावडे, पुणे स्नातक से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी के हर्षदा देशमुक जाधव को जीत मिली है। नागपुर में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी जीते।
कर्नाटक में हार गई कांग्रेस
कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीट पर हुए चुनाव में विपक्षी भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) ने सभी चार सीट जीत लीं। भाजपा ने तीन सीट बरकरार रखीं, जबकि जद (एस) ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस को हराकर यह सीट जीत ली। खास बात है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार है और पार्टी खाता भी नहीं खोल सकी है। जदयू-भाजपा के पास अभी तीन सीटें थीं जो बढ़कर चार हो गई है।
UP में सपा को फायदा कैसे
यूपी में विधान परिषत की 11 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने समाजवादी पार्टी को मिशन-2027 के लिए ऑक्सीजन दे दी है। चुनाव नतीजे न केवल सपा के लिए मनोवैज्ञानिक राहत देने वाले हैं बल्कि नतीजों ने साफ कर दिया है कि यदि संगठन की तैयारियों और समय रहते बनाई गई दीर्घकालिक रणनीति व सधा लक्ष्य हो तो फतेह नामुमकिन नहीं है। सपा वैसे तो मिशन-2027 की तैयारियों में जुटी थी लेकिन उसने विधान परिषद चुनाव के लिए इस बार अपने ही प्रतिद्वंद्वी दल भाजपा से सबक लिया।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने समय से पहले ही प्रत्याशी घोषित कर दिए। करीब ढाई वर्ष पहले उन्हें घोषित कर जिलों में तैयारी के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाई गई। जिलों में प्रचार व मतदाता बनाने के लिए अव्वल तो जिला संगठन को लगाया गया। फिर इसकी समीक्षा के लिए अखिलेश यादव बैठकें करते रहे। इस काम में पार्टी ने दूरदर्शिता दिखाते हुए विधायकों, सांसदों के साथ ही पूर्व विधायकों व सांसदों की टीम को लगाया गया। अखिलेश चुनाव से काफी पहले सिर्फ जिताऊ प्रत्याशियों पर ही दांव लगाया।
प्रकाशित: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 | 1:14 PM IST

