यूपी के प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट रूम में बवाल हो गया है। कुर्सी पर बैठने को लेकर अधिवक्ता से दुर्व्यवहार के बाद सरकारी वकील तक की पिटाई कर दी गई। वकीलों ने डायस पर कुर्सियां और फर्नियर फेंके। तोड़फोड़ भी की गई।वकीलों ने कोर्ट का बहिष्कार किया और जमकर हंगामा, नारेबाजी की। दो अन्य जजों ने वकीलों के हंगामे से न्यायिक कार्य प्रभावित होने के संबंध में आदेश जारी किए हैं।
हाईकोर्ट बार के नव निर्वाचित पदाधिकारियों की ओर से चीफ जस्टिस को मंगलवार को भेजे गए पत्र के मुताबिक मंगलवार को कोर्ट (जिसका बुधवार को बहिष्कार हुआ) में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के लिए अगली पंक्ति में अलग कुर्सी रखी गई थी। एक वकील ने एसपी से पीछे बैठने को कहा तो सरकारी वकील ने इसकी शिकायत जज से कर दी। बार पदाधिकारियों ने पत्र के जरिए आरोप लगाए हैं कि वकील को फटकार लगाई गई, धमकी देते हुए एसपी से माफी मांगने को कहा गया।
पत्र में एक वरिष्ठ अधिवक्ता का भी मजाक उड़ाने का आरोप लगाया गया है। हाईकोर्ट बार के नवनिर्वाचित अध्यक्ष व महासचिव ने इस पत्र के जरिए कार्रवाई की मांग करते हुए उक्त कोर्ट के बहिष्कार की धमकी दी थी। उनका कहना था कि वकीलों की गरिमा का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोर्ट बैठते ही वकीलों ने शुरू कर दी नारेबाजी
बुधवार को जब कोर्ट बैठी तो वकीलों ने नारेबाजी शुरू कर दी। वकीलों का रुख देख कर दोनों जज वापस अपने चैंबर में चले गए। इसके बाद विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। गुस्साए अधिवक्ताओं ने डायस की तरफ कुर्सियां और अन्य फर्नीचर फेंके। बताया जाता है कि शिकायत करने वाले सरकारी वकील को भी वकीलों के गुस्से का कोपभाजन बनना पड़ा। कुछ वकीलों ने सरकारी वकील की पिटाई कर दी। अन्य सरकारी वकील किसी प्रकार से उनको बचाकर कोर्ट से बाहर ले गए। कोर्ट रूम में अफरातफरी मच गई।
कोर्ट के बाहर भी जमकर नारेबाजी हुई। बवाल के कारण चीफ जस्टिस कोर्ट में भी लगभग एक घंटा कार्य प्रभावित हुआ। उस दौरान वहां फ्रेश केस नम्बर 13 की सुनवाई चल रही थी। तभी कोर्ट में चीफ जस्टिस के पीपीएस आए और उन्होंने चीफ जस्टिस को कुछ बताया। उसके बाद कोर्ट उठकर चैंबर में चली गई। वहां फिर लगभग 12 बजे सुनवाई शुरू हो सकी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ हंगामे का वीडियो
हंगामे और तोड़फोड़ का वीडियो और फोटो बुधवार सुबह से ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कई अधिवक्ताओं ने वीडियो शेयर करते हुए अलग-अलग तरीके से इस पर टिप्पणी भी की। हालांकि आपका अपना अखबार हिन्दुस्तान इस तरह के किसी वीडियो व फोटो की पुष्टि नहीं करता है।
वकीलों के खिलाफ अवमानना व अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिसर के कॉरिडोर में नारेबाजी करने और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने की घटना पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस आचरण को पूरी तरह अवमाननापूर्ण मानते हुए इसमें शामिल अधिवक्ताओं की पहचान कर उनके खिलाफ अवमानना एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने देवेंद्र कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
कोर्ट ने कहा कि दूरदराज से गरीब वादकारी अपनी समस्याओं के निवारण के लिए हाईकोर्ट आते हैं। यदि किसी अधिवक्ता को किसी विशेष न्यायालय से कोई समस्या है, तो भी उन्हें अन्य कोर्ट के बाहर चिल्लाने, नारेबाजी करने, न्यायिक कार्यवाही बाधित करने या न्यायालय को डराने-धमकाने वाले शब्दों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इस व्यवहार को पूरी तरह अनुचित और घोर अवमाननापूर्ण करार दिया।
कोर्ट ने रजिस्ट्रार प्रोटोकॉल को निर्देश दिया कि न्याय कक्ष के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज प्राप्त करें, घटना में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान करें और अगली सुनवाई तक अपनी रिपोर्ट सौंपें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहचान के बाद संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला यूपी बार कौंसिल को भेजा जा सकता है और उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को तय की गई है।
वहीं, इस कारण एक अन्य कोर्ट में एक अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायिक कार्यवाही बाधित हो गई। न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने मामले की सुनवाई को स्थगित कर दिया और आदेश की प्रति चीफ जस्टिस के समक्ष रखने के निर्देश दिए।
प्रकाशित: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 | 1:22 PM IST

