नए वायुसेना प्रमुख का बड़ा बयान: हर चुनौती के लिए तुरंत तैयार रहे वायुसेना

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने पदभार संभालने के बाद अपनी प्राथमिकताएं बताईं।

एक भारतीय वायु सेना अधिकारी एक मंच पर बोल रहा है, जिसके सामने फूल और एक भारतीय झंडा है।
भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने पदभार संभालने के बाद अपनी प्राथमिकताएं बताईं।
मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा है कि वायुसेना को बदलती सुरक्षा चुनौतियों के लिए हर समय तैयार रहना चाहिए, जिसमें लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाना और आत्मनिर्भरता शामिल है।

  • वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हर स्क्वाड्रन, रडार और वायु सैनिक आपात स्थिति में तुरंत जवाब देने को तैयार रहे।
  • लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाना, हथियारों में आत्मनिर्भरता और तीनों सेनाओं में तालमेल उनकी प्राथमिकताएं हैं।
  • उन्होंने अपनी सोच को 'वायु' नाम दिया है, जिसके 4 लक्ष्य हैं: सतर्कता, आत्मनिर्भरता, रणनीतिक कौशल और एकजुटता।
  • एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने भारतीय तकनीक से बने सेंसर, प्लेटफॉर्म और हथियारों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
  • उन्होंने कहा कि वायुसेना की जिम्मेदारी दुश्मन को संघर्ष शुरू करने से रोकना भी है।
  • रणनीतिक कौशल के तहत सैन्य योजनाओं, काम करने के तरीकों और तकनीक में लगातार बदलाव की जरूरत है।

भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने पदभार संभालने के एक दिन बाद रविवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वायुसेना का हर स्क्वाड्रन, हर रडार, हर वायु रक्षा इकाई और हर वायु सैनिक किसी भी आपात स्थिति में तुरंत जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए। देश की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में वायुसेना को हर समय युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। लड़ाकू विमानों की संख्या को स्वीकृत स्तर तक पहुंचाना, हथियारों और सैन्य उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताएं होंगी।

वायुसेना प्रमुख ने अपनी सोच को 'वायु' नाम दिया है। इसके तहत 4 प्रमुख लक्ष्य तय किए गए हैं। इनमें सतर्कता और अभियान की तैयारी, आत्मनिर्भरता, रणनीतिक कौशल और तीनों सेनाओं के बीच एकजुट होकर काम करना शामिल है। उन्होंने कहा कि आज युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। ड्रोन, लंबी दूरी तक मार करने वाले सटीक हथियार, अंतरिक्ष तकनीक, साइबर हमले, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम जैसी नई तकनीकें युद्ध की दिशा बदल रही हैं। ऐसे में भारतीय वायुसेना को अगले दशक की जरूरतों के हिसाब से खुद को तैयार करना होगा।

आत्मनिर्भरता पर दिया जोर

एयर चीफ मार्शल ने कहा कि वायुसेना का पहला काम अपनी लड़ाकू क्षमता को स्वीकृत स्क्वाड्रन संख्या के करीब पहुंचाना होगा। इसके साथ ही हर रडार, वायु रक्षा प्रणाली और सैन्य इकाई को चौबीसों घंटे सतर्क रहना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने कहा कि भारतीय तकनीक से बने सेंसर, सैन्य प्लेटफॉर्म और हथियार वायुसेना की सबसे बड़ी प्राथमिकता होंगे। उन्होंने कहा कि वायुसेना को भारतीय समाधानों के साथ लड़ने की क्षमता विकसित करनी होगी और इनकी पर्याप्त संख्या भी सुनिश्चित करनी होगी, ताकि लंबे समय तक अभियान चलाए जा सकें।

दुश्मन को संघर्ष शुरू करने से रोकना

आशुतोष दीक्षित का कहना था कि वायुसेना की जिम्मेदारी सिर्फ युद्ध लड़ना और जीतना नहीं, बल्कि अपनी मजबूत हवाई ताकत के दम पर दुश्मन को संघर्ष शुरू करने से रोकना भी है। उन्होंने रणनीतिक कौशल के तहत सैन्य योजनाओं, काम करने के तरीकों और तकनीक में लगातार बदलाव की जरूरत बताई। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस कमांड सिस्टम, ड्रोन से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, विमानों और उपकरणों की समय पर मरम्मत व सैन्य ठिकानों की सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में लगातार सुधार किया जाएगा।

प्रकाशित: रविवार, 1 नवंबर 2026 | 5:04 PM IST

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