एक बहुत सुंदर जंगल था। उस जंगल में ऊँचे-ऊँचे पेड़, रंग-बिरंगे फूल, मीठे फलों से लदे पौधे और एक साफ पानी की नदी बहती थी। उसी जंगल में चिंटू नाम का एक छोटा-सा सफेद खरगोश रहता था। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी और कान लंबे थे। चिंटू बहुत प्यारा था, लेकिन उसे एक बात की आदत थी। वह हर काम जल्दी में करता था और बिना सोचे-समझे जंगल में इधर-उधर घूमता रहता था। उसकी माँ हमेशा कहती थीं, "बेटा चिंटू, अकेले जंगल के गहरे हिस्से में मत जाना। वहाँ रास्ते बहुत कठिन हैं।" चिंटू हर बार कहता, "माँ, आप चिंता मत करो। मैं बहुत समझदार हूँ। मुझे कोई परेशानी नहीं होगी।" एक दिन सुबह चिंटू अपनी माँ से छिपकर जंगल में घूमने निकल पड़ा। रास्ते में उसे एक सुंदर तितली दिखाई दी। तितली के पंख नीले और सुनहरे रंग के थे। चिंटू बोला, "वाह! कितनी सुंदर तितली है। मैं इसके पीछे-पीछे जाऊँगा।"
तितली उड़ती गई और चिंटू उसके पीछे दौड़ता गया। कुछ देर बाद वह जंगल के ऐसे हिस्से में पहुँच गया जहाँ उसने पहले कभी कदम नहीं रखा था। वहाँ अचानक उसे एक बहुत बड़ा सुनहरा पेड़ दिखाई दिया। उस पेड़ पर चमकते हुए फल लगे थे। पेड़ के नीचे एक छोटा-सा दरवाजा भी था। चिंटू हैरान होकर बोला, "अरे! जंगल में यह जादुई पेड़ कहाँ से आ गया?" जादुई पेड़ का रहस्य जैसे ही चिंटू पेड़ के पास पहुँचा, अचानक एक मीठी आवाज़ सुनाई दी। "कौन है जो मेरे पास आया है?" चिंटू डरकर पीछे हट गया और बोला, "क-कौन बोल रहा है?" पेड़ ने जवाब दिया, "डरो मत छोटे खरगोश! मैं इस जंगल का जादुई पेड़ हूँ। मैं उसी की मदद करता हूँ जिसका दिल साफ होता है।"
चिंटू खुशी से उछल पड़ा। उसने पूछा, "क्या आप सचमुच जादुई हैं? क्या आप मुझे कोई जादुई चीज़ दे सकते हैं?" पेड़ बोला, "मैं तुम्हें तीन इच्छाएँ दे सकता हूँ, लेकिन एक शर्त है। तुम्हारी आखिरी इच्छा किसी दूसरे की भलाई के लिए होनी चाहिए।" चिंटू ने तुरंत कहा, "मुझे बहुत सारे गाजर चाहिए!" अचानक पेड़ से ढेर सारी मीठी गाजर नीचे गिरने लगीं। चिंटू खुशी से गाजर खाने लगा। उसने दूसरी इच्छा माँगी, "मुझे जंगल का सबसे तेज़ दौड़ने वाला खरगोश बना दीजिए।" पेड़ ने अपनी सुनहरी पत्तियाँ हिलाईं और चिंटू पहले से भी तेज़ दौड़ने लगा। अब तीसरी इच्छा बाकी थी। चिंटू सोच ही रहा था कि तभी जंगल से किसी के रोने की आवाज़ आई। "बचाओ! कोई मेरी मदद करो!"
चिंटू आवाज़ की तरफ दौड़ा। वहाँ एक छोटा हिरन काँटेदार झाड़ियों में फँसा हुआ था। उसके पैर में चोट भी लगी थी। हिरन रोते हुए बोला, "मैं अपनी माँ से बिछड़ गया हूँ। कृपया मुझे बाहर निकाल दो।" चिंटू ने कहा, "तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हारी मदद करूँगा।" उसने बहुत कोशिश की, लेकिन काँटे बहुत घने थे। तब उसे जादुई पेड़ की तीसरी इच्छा याद आई। वह वापस पेड़ के पास पहुँचा और बोला, "हे जादुई पेड़! मेरी तीसरी इच्छा है कि इस छोटे हिरन को उसकी माँ मिल जाए और उसके पैर की चोट ठीक हो जाए।" पेड़ की सुनहरी रोशनी पूरे जंगल में फैल गई। देखते ही देखते हिरन के पैर की चोट ठीक हो गई। दूर से एक हिरनी दौड़ती हुई आई। "मेरा बच्चा! तुम यहाँ हो!" माँ और बच्चे ने एक-दूसरे को गले लगा लिया।
चिंटू यह देखकर बहुत खुश हुआ। उसे समझ आ गया कि दूसरों की मदद करने से मिलने वाली खुशी सबसे बड़ी होती है। जंगल में नया खतरा अभी चिंटू हिरन से बातें कर ही रहा था कि अचानक आसमान में काले बादल छा गए। तेज़ हवा चलने लगी और बारिश शुरू हो गई। जंगल की नदी का पानी बढ़ने लगा। कई छोटे जानवर अपने घरों में फँस गए। चिंटू ने देखा कि एक पेड़ के नीचे चिड़िया के तीन छोटे बच्चे बारिश में काँप रहे थे। उनका घोंसला टूटकर नीचे गिर गया था। चिंटू ने तुरंत हिरन और उसकी माँ को बुलाया। हिरन बोला, "हमें इन बच्चों को सुरक्षित जगह पहुँचाना चाहिए।" तीनों ने मिलकर बच्चों को एक बड़ी चट्टान के नीचे बने सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया।
इसके बाद चिंटू ने जंगल के दूसरे जानवरों को भी आवाज़ लगाई। "दोस्तों! सब लोग एक-दूसरे की मदद करो। अकेले रहने से अच्छा है कि हम मिलकर इस मुसीबत का सामना करें!" हाथी ने अपने मजबूत पैरों से पानी के रास्ते में पड़े बड़े-बड़े लकड़ी के तने हटाए। बंदर पेड़ों पर चढ़कर छोटे जानवरों को सुरक्षित जगह बताने लगे। हिरन ने घायल जानवरों को सहारा दिया। धीरे-धीरे बारिश रुक गई और जंगल के सभी जानवर सुरक्षित हो गए। चिंटू की सबसे बड़ी खुशी अगली सुबह जंगल में फिर से सूरज की सुनहरी किरणें फैल गईं। सभी जानवर चिंटू के पास आए और बोले, "चिंटू, तुमने आज हम सबकी जान बचाने में मदद की। तुम हमारे सच्चे दोस्त हो।"
चिंटू मुस्कुराकर बोला, "मैंने अकेले कुछ नहीं किया। हम सबने मिलकर यह काम किया है।" उसी समय उसकी माँ उसे ढूँढ़ती हुई वहाँ पहुँच गईं। माँ ने चिंटू को गले लगाया और कहा, "बेटा, मैं पूरी रात तुम्हें ढूँढ़ती रही। तुम ठीक तो हो?" चिंटू की आँखों में आँसू आ गए। उसने कहा, "माँ, मुझे माफ कर दीजिए। अब मैं कभी बिना बताए जंगल में नहीं जाऊँगा। आज मैंने सीखा है कि समझदारी का मतलब सिर्फ तेज़ दौड़ना नहीं, बल्कि सही समय पर सही काम करना भी है।" माँ ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा। उस दिन के बाद चिंटू जंगल के सभी जानवरों का प्यारा दोस्त बन गया। वह हमेशा दूसरों की मदद करता और अपनी माँ की बात भी मानता था। और वह सुनहरा जादुई पेड़ आज भी जंगल में खड़ा है। कहते हैं कि वह आज भी अच्छे दिल वाले जानवरों की मदद करता है।
प्रकाशित: शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 | 12:16 PM IST

