एक घने जंगल में गोलू नाम का हाथी रहता था। वह बहुत ताकतवर था, लेकिन उसे अपनी ताकत पर थोड़ा घमंड भी था।
एक दिन गोलू पेड़ के नीचे खेल रहा था। खेलते-खेलते उसने अपनी सूँड से पेड़ की एक डाल हिला दी। उस डाल पर एक नन्ही चिड़िया का घोंसला था। घोंसला नीचे गिर गया।
चिड़िया बहुत दुखी होकर बोली,
“गोलू भाई, मेरे छोटे-छोटे बच्चे डर गए हैं।”
गोलू को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत अपनी सूँड से घोंसला उठाया और सावधानी से पेड़ की सुरक्षित डाल पर रख दिया।
चिड़िया खुश होकर बोली,
“धन्यवाद गोलू भाई!”
कुछ दिन बाद जंगल में शिकारी आए। उन्होंने गोलू को पकड़ने के लिए रस्सियों का जाल बिछा दिया। गोलू उसमें फँस गया।
वह जोर-जोर से चिंघाड़ने लगा,
“बचाओ! कोई मेरी मदद करो!”
चिड़िया ने गोलू की आवाज़ सुनी। उसने अपने दोस्तों को बुलाया। सभी पक्षी मिलकर शिकारी के आसपास जोर-जोर से उड़ने लगे। शिकारी घबरा गए और वहाँ से भाग गए।
गोलू ने अपनी ताकत से रस्सियाँ तोड़ दीं और आज़ाद हो गया।
वह चिड़िया से बोला,
“आज समझ आया कि छोटा या बड़ा होना जरूरी नहीं। हर किसी की अपनी ताकत होती है।”
उस दिन से गोलू और चिड़िया पक्के दोस्त बन गए।
🌟 सीख:
किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए। अच्छे काम का फल किसी न किसी रूप में जरूर मिलता है।
प्रकाशित: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 | 8:30 PM IST

