आईआईटी बॉम्बे में 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद पिछले तीन दिनों से विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन के आगे अब प्रशासन झुकता नजर आ रहा है। आईआईटी ने अपने उस बयान पर माफी मांग ली है जो उसने साहिल की मौत के बाद जारी किया था। संस्थान ने पहले बताया था कि साहिल को परीक्षा के दौरान मोबाइल से नकल करते हुए पकड़ा गया था। इस पर सार्वजनिक माफी मांगते हुए संस्थान ने कहा है कि फिलहाल इस पूरे मामले की जांच चल रही है और जब तक जांच पूरी नहीं होती है, उस घटनाक्रम पर कोई भी टिप्पणी नहीं की जा सकती है।' इसके अलावा प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला डीनशिप से सस्पेंड कर दिए गए हैं। हालांकि इस कदम से प्रदर्शनकारी छात्र संतुष्ट नहीं हुए। छात्रों का कहना था कि उन्होंने प्रोफेसर के रूप में उन्हें सस्पेंड करने की मांग की थी, न कि केवल प्रशासनिक पद से हटाने की।
दूल्ला वही प्रोफेसर हैं, जिन्होंने सुसाइड वाले दिन एग्जाम हॉल में साहिल को फोन के साथ पकड़ा था। साहिल के माता-पिता ने प्रोफेसर पर FIR दर्ज कराई है। साहिल के पिता ने अपनी शिकायत में आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। उनका आरोप है कि साहिल को पिछले करीब तीन महीनों से जातिसूचक गालियां दी जा रही थीं। इसके अलावा उसे एक झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी गई थी।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक डीनशिप छीनने का फैसला सोमवार दोपहर IIT बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों को ईमेल के जरिए बताया। संस्थान ने डुल्ला के निलंबन को लेकर अलग से कोई बयान जारी नहीं किया है। प्रो. केदारे ने ईमेल में कहा, 'प्रो. सूर्यनारायण डुल्ला की डीनशिप तत्काल प्रभाव से निलंबित की जाती है। आगे की कार्रवाई जांच के बाद की जाएगी।' डुल्ला इससे पहले IIT बॉम्बे में डीन ऑफ स्टूडेंट्स अफेयर्स के पद पर थे और वर्तमान में डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स हैं। वह साहिल की परीक्षा के दौरान निरीक्षक की भूमिका में थे।
डूल्ला की तत्काल प्रभाव से निलंबन की मांग उन 18 मांगों में शामिल थी जिन्हें प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने रविवार को संस्थान प्रशासन के सामने रखा था। कैंपस में तीन दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद रविवार देर रात छात्रों ने IIT बॉम्बे के मुख्य द्वार पर प्रो. केदारे के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक की। इसी बैठक के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों का चार्टर उन्हें सौंपा। प्रो. केदारे ने मांगों के चार्टर पर हस्ताक्षर किए और छात्रों को आश्वासन दिया कि संस्थान उनकी मांगों को पूरा करने की दिशा में काम करेगा। सोमवार को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में इन मांगों पर चर्चा होनी थी। इसी बीच संस्थान ने सोमवार को साहिल की मौत के संबंध में अपने पहले की गई टिप्पणियों के लिए माफी भी मांगी। यह प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक थी। छात्रों का कहना था कि इन टिप्पणियों से साहिल की छवि खराब हुई। प्रदर्शनकारी छात्रों ने तर्क दिया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति के समक्ष चल रही कार्यवाही का निष्कर्ष आने तक उसे गोपनीय रखा जाना चाहिए था। जबकि संस्थान
क्या था आईआईटी का पहला वाला बयान इस बयान में लिखा था, "कल शाम एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सेकेंड ईयर के छात्र की मौत खुदकुशी के चलते हुई. इससे एक दिन पहले एग्जाम के दौरान छात्र को मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था. छात्र ने जवाब जानने के लिए क्वेश्चन पेपर को चैट जीपीटी पर अपलोड किया था. हालांकि इसके बाद छात्र के खिलाफ कोई भी एक्शन नहीं लिया गया. इंस्ट्रक्टर की तरफ से छात्र के साथ इस बारे में बातचीत भी की गई. फैकल्टी एडवाइजर और एचओडी की तरफ से छात्र की काउंसिलिंग की गई और बताया गया कि इस घटना से उसके एकेडमिक करियर पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इसके बाद छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में लौट ग

