जामिया में 'आजाद कश्मीर' के नारे पर बवाल, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने दी सफाई

कांग्रेस सांसद ने कहा कि उन्होंने ऐसे नारों की निंदा की और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।

कैमरा के सामने से गुजरते हुए वर्दीधारी पुलिसकर्मी, उनके पीछे एक लाल रंग का गेट है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान 'आजाद कश्मीर' के नारों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान 'आजाद कश्मीर' का कोई नारा नहीं लगाया गया और उन्होंने ऐसे नारों की कड़ी निंदा की।

  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान 'आजाद कश्मीर' के नारे लगाने के आरोप लगे।
  • कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि उन्होंने ऐसे नारों की निंदा की।
  • मसूद ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा।
  • उन्होंने परिसर में जम्मू-कश्मीर से जुड़े पोस्टर लगाने वालों की निंदा की और उन्हें आंदोलन को कमजोर करने वाला बताया।
  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने छात्रों की मांगों पर विचार करने के लिए 7 सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है।
  • यह समिति 18 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के बाद बनाई गई।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान 'आजाद कश्मीर' के नारे लगाने के आरोप लग रहे हैं। इस मामले पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सफाई दी है। आपको बता दें कि कांग्रेस सांसद विरोध कर रहे छात्रों से मिलने जामिया मिल्लिया इस्लामिया पहुंचे थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उन्होंने कहा, "वहां 'आजाद कश्मीर' का कोई नारा नहीं लगाया गया। एक भी नहीं। मैंने सबके सामने खड़े होकर ऐसे नारों की कड़ी निंदा की और कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।"

हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि जो लोग परिसर में जम्मू-कश्मीर से जुड़े पोस्टर लगा रहे थे वे इस आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे थे और उनका छात्रों के विरोध प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने कहा, "पुलिस को ऐसे पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा।"

आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश'

हिरासत में लिए जाने से पहले उन्होंने कहा, "यहां का एक बच्चा भी इसके उलट कुछ नहीं कहेगा। मैं ऐसे पोस्टर लगाकर इस आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश करने वालों की कड़ी निंदा करता हूं। छात्रों की चिंताएं जायज हैं। आप छात्र संघ को बहाल क्यों नहीं करते? वे इस देश का भविष्य हैं। इस देश के भविष्य को कुचलने की कोशिश क्यों की जा रही है?"

छात्रों की मांग को लेकर कमेटी

छात्रों की मांगों को लेकर भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करने, उनकी मांगों की जांच करने और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कदम उठाने के वास्ते सात सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है।

यह निर्णय 18 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक के बाद लिया गया। इस बैठक में कुलपति प्रो. मजहर आसिफ, रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिजवी, परीक्षा नियंत्रक प्रो. एहतेशामुल हक, विभिन्न संकायों के डीन, छात्र कल्याण डीन, शैक्षणिक मामलों के डीन, मुख्य प्रॉक्टर और हॉस्टल प्रोवोस्ट आदि शामिल थे।

यह समिति छात्रों के विरोध प्रदर्शन और अपनी शिकायतों पर कार्रवाई की मांग को लेकर की गई भूख हड़ताल के बीच गठित की गई है। विश्वविद्यालय ने बताया कि यह पैनल प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करेगा, उनकी मांगों की जांच करेगा और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए जरूरी कदम उठाने की सिफारिश करेगा।

प्रकाशित: शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 | 4:42 PM IST

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