IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे नहीं चाहते कि उनके बच्चे भी उनकी तरह IAS अफसर बने। हाल ही में उन्होंने खुद इसका खुलासा किया है। दरअसल अपनी कड़क कार्यशैली और बेबाकी के लिए मशहूर महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर तुकाराम मुंढे का हाल ही में एक बयान सामने आया है। इसमें उन्होंने बताया है कि अगर उनके बच्चे पूछें कि IAS बने या ना, तो उनका जवाब ना ही होगा।
मुंढे ने यह बातें एक इंटरव्यू में कही हैं। न्यूज 18 मराठी के मुताबिक पिंपरी-चिंचवड़ में दिए एक इंटरव्यू के दौरान मुंढे ने कहा कि भविष्य में वह अपने बच्चों को अफसर की बजाय नेता या उद्यमी बनने की सलाह देंगे। मुंढे का मानना है कि आज की जेन जी को ऐसे रास्ते चुनने चाहिए जहां वे बिना किसी प्रशासनिक बंदिशों के, समाज के लिए खुलकर काम कर सकें।
क्या बोले तुकाराम मुंढे? तुकाराम मुंढे से इंटरव्यू में पूछा गया कि क्या वे अपने बच्चों को सिविल सर्विसेज में भेजना चाहेंगे? इस पर उन्होंने कहा, "अगर मेरे बच्चे मुझसे पूछेंगे कि क्या हमें आईएएस बनना चाहिए, तो मेरा सीधा जवाब होगा- बिल्कुल नहीं।" तुकाराम मुंढे चाहते हैं कि उनके बच्चे 'पब्लिक लीडर' या उद्यमी बनें ताकि वे बिना किसी सिस्टम के दबाव के समाज के विकास में अपना योगदान दे सकें। तुकाराम मुंढे के मुताबिक आज की युवा पीढ़ी के पास असीमित ऊर्जा और ज्ञान है। उन्हें ऐसे किसी करियर में नहीं बांधना चाहिए जो उनकी आजादी को सीमित कर दे।
21 साल की नौकरी में 25 तबादले भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त एक्शन के लिए जाने जाने वाले तुकाराम मुंढे का 21 साल की नौकरी में 25 बार ट्रांसफर हो चुका है। उनकी ईमानदारी की कीमत कई बार उनके परिवार को चुकानी पड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक उनके बेटे को 5वीं कक्षा में पहुंचने से पहले ही 6 बार अपने स्कूल बदलने पड़े। वहीं पत्नी को भी काफी परेशानियां हुईं। मुंढे ने कहा कि उन्होंने जनसेवा का यह कठिन रास्ता खुद चुना था और वे इन कठिनाइयों के लिए तैयार थे, लेकिन इस दौरान उनके परिवार ने भी काफी कुर्बानियां दी हैं और इसीलिए वे अपने बच्चों के लिए ये रास्ता नहीं चाहते।
प्रकाशित: सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 | 5:53 PM IST

