भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक रिपोर्ट में भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के गिरोह ‘डी-कंपनी’ को ‘भारत-आधारित’ आपराधिक संगठन बताए जाने पर आपत्ति जताई है। यह मुद्दा 21 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में उठाया गया। भारत की ओर से प्रथम सचिव रघु पुरी ने रिपोर्ट में तथ्यात्मक गलतियों का आरोप लगाया।
भारत ने क्या कहा?
भारतीय राजनयिक ने कहा कि रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम और अल-कायदा से जुड़े वर्ष 2003 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया, लेकिन भारत में 1993 के मुंबई बम धमाकों के संबंध में उसकी तलाश किए जाने का संदर्भ पर्याप्त रूप से नहीं दिया गया।
भारत का कहना है कि दाऊद इब्राहिम भारत छोड़ चुका था और पाकिस्तान में रह रहा है। यह भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में रखा गया पक्ष है।
रिपोर्ट को लेकर क्यों उठा विवाद?
यह विवरण आतंकवाद-रोधी मामलों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल की रिपोर्ट में आया था। भारत ने रिपोर्ट की शब्दावली और तथ्यों की प्रस्तुति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में निष्पक्षता और सटीकता जरूरी है।
भारत ने यह भी कहा कि ऐसी रिपोर्टों में तथ्यात्मक त्रुटियां संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं।
भारत ने पाकिस्तान के बयान पर भी जताई आपत्ति
इसी चर्चा के दौरान भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल की टिप्पणियों का विरोध किया और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद संयुक्त राष्ट्र के मंच पर फिर सामने आए।
प्रकाशित: गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 | 3:33 PM IST

