केंद्र सरकार का 'खेत बचाओ अभियान' रबी फसलों के लिए, 30 नवंबर तक चलेगा

किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के लिए देशव्यापी पहल

एक किसान खेत में खड़ा है, और उसके पीछे एक ट्रैक्टर खेत जोत रहा है।
केंद्र सरकार ने रबी फसलों की बुवाई के मौसम में किसानों को जागरूक करने के लिए 'खेत बचाओ अभियान–रबी 2026' शुरू किया है।
मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने रबी फसलों की बुवाई के मौसम में किसानों को खेती से जुड़ी बेहतर पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के लिए 'खेत बचाओ अभियान–रबी 2026' शुरू किया है, जो 30 नवंबर 2026 तक चलेगा।

  • केंद्र सरकार ने 'खेत बचाओ अभियान–रबी 2026' शुरू किया है।
  • यह अभियान 30 नवंबर 2026 तक चलेगा।
  • इसका उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़ी बेहतर पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है।
  • रबी सीजन में गेहूं, सरसों, चना, मटर और जौ जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
  • अभियान मिट्टी की जांच, प्रमाणित बीज और समय पर बुवाई पर जोर देता है।
  • किसानों को स्थानीय कृषि सलाह और मौसम की जानकारी के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

रबी फसलों की बुवाई के मौसम में किसानों को खेती से जुड़ी बेहतर पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के लिए केंद्र सरकार ने ‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ शुरू किया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह अभियान 30 नवंबर 2026 तक चलने के लिए निर्धारित है।

रबी सीजन में गेहूं, सरसों, चना, मटर और जौ जैसी फसलें उगाई जाती हैं। इस दौरान समय पर बुवाई, मिट्टी में नमी का प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज और संतुलित उर्वरक उपयोग फसल की अच्छी शुरुआत के लिए अहम होते हैं। अभियान किसानों तक खेती संबंधी जानकारी पहुंचाने और खेतों की देखभाल के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर है। किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?

खेती में कई बार छोटी-छोटी गलतियां भी उत्पादन और लागत पर असर डालती हैं। बिना मिट्टी की जरूरत समझे खाद डालना, खराब गुणवत्ता वाले बीज खरीदना या सिंचाई का सही समय न अपनाना किसानों के खर्च को बढ़ा सकता है।

किसानों को इन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:

मिट्टी की जांच: मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का इस्तेमाल करें।

प्रमाणित बीज: स्थानीय जलवायु और क्षेत्र के अनुकूल किस्मों का चयन करें।

समय पर बुवाई: फसल और इलाके के अनुसार कृषि विशेषज्ञों की सलाह मानें।

पानी का प्रबंधन: खेत में जरूरत के मुताबिक सिंचाई करें और पानी की बर्बादी रोकें।

फसल की निगरानी: खरपतवार, कीट और रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।

गेहूं और सरसों की बुवाई में रखें सावधानी

रबी मौसम में गेहूं और सरसों अनेक राज्यों की प्रमुख फसलें हैं। लेकिन हर क्षेत्र में बुवाई की तारीख, किस्म और सिंचाई की जरूरत एक जैसी नहीं होती। इसलिए किसानों को अपने जिले की कृषि सलाह और स्थानीय मौसम की जानकारी के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

खेत तैयार करते समय मिट्टी की स्थिति देखें। अत्यधिक सिंचाई या बिना जरूरत खाद का उपयोग करने से लागत बढ़ सकती है। इसी तरह कीटों और रोगों के नियंत्रण के लिए दवाओं का इस्तेमाल केवल अनुशंसित मात्रा और सुरक्षा निर्देशों के अनुसार करना चाहिए। अभियान से किसानों को क्या लाभ हो सकता है?

यदि अभियान के दौरान किसानों तक व्यावहारिक और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप जानकारी पहुंचती है, तो उन्हें बेहतर कृषि निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। इससे खेती की लागत नियंत्रित करने, संसाधनों का सही इस्तेमाल करने और फसल की देखभाल में सुधार के अवसर बन सकते हैं।

हालांकि, अभियान शुरू होने की आधिकारिक घोषणा अपने आप में उत्पादन बढ़ने या किसानों की आय में वृद्धि का प्रमाण नहीं है। इसके वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि किसानों तक जानकारी और सहायता कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है।

प्रकाशित: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 | 7:12 PM IST

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