अक्टूबर में भारत की व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ीं, पर नौकरियों की रफ्तार धीमी

नए ऑर्डर और सेवा क्षेत्र में सुधार से कारोबार में तेजी, लेकिन रोजगार सृजन में सावधानी बरती गई।

एक व्यस्त कार्यालय में कई भारतीय कर्मचारी लैपटॉप पर काम कर रहे हैं।
अक्टूबर 2026 में भारत के निजी क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियों में तेजी आई, जो नए ऑर्डर और सेवा क्षेत्र में सुधार से प्रेरित थी।
मुख्य बातें

अक्टूबर 2026 में भारत की कारोबारी गतिविधियों में तेजी आई है, लेकिन रोजगार के मोर्चे पर उतनी मजबूती नहीं दिखी है क्योंकि कंपनियों ने नई भर्तियां बढ़ाने में सावधानी बरती है।

  • अक्टूबर 2026 में भारत का संयुक्त परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) बढ़कर 56.7 हो गया, जो जून के बाद सबसे तेज वृद्धि है।
  • सेवा क्षेत्र का पीएमआई सूचकांक सितंबर के 55.2 से बढ़कर अक्टूबर में 56.2 पर पहुंच गया, जिससे समग्र वृद्धि को सहारा मिला।
  • विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन बढ़ा, लेकिन इस क्षेत्र का पीएमआई सितंबर के 55.1 से घटकर अक्टूबर में 54.9 रहा, जिसका एक कारण धीमी भर्ती है।
  • कंपनियां बढ़ते काम को संभालने के लिए मौजूदा कर्मचारियों पर अधिक निर्भर रहीं, जिससे सेवा क्षेत्र में 9 महीने से जारी भर्ती का सिलसिला थम गया।
  • अक्टूबर में अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में सुधार हुआ, जो 6 महीनों के सबसे तेज स्तर पर पहुंचा, खासकर वस्तुओं के निर्यात में।
  • कंपनियों की इनपुट लागत में महंगाई की रफ्तार कम हुई और ग्राहकों से ली जाने वाली कीमतों में वृद्धि भी धीमी रही।

भारत के निजी क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियों ने अक्टूबर 2026 में तेजी के संकेत दिए हैं। नए ऑर्डर बढ़ने और सेवा क्षेत्र में सुधार के कारण कारोबार की रफ्तार पिछले चार महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, इस तेजी के साथ रोजगार के मोर्चे पर उतनी मजबूती दिखाई नहीं दी और कंपनियों ने नई भर्तियां बढ़ाने में सावधानी बरती।

रॉयटर्स की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, एचएसबीसी और एसएंडपी ग्लोबल के प्रारंभिक सर्वेक्षण में भारत का संयुक्त परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) सितंबर के 55.9 से बढ़कर अक्टूबर में 56.7 हो गया। जून के बाद यह इसकी सबसे तेज वृद्धि बताई गई है। पीएमआई में 50 से ऊपर का आंकड़ा सामान्यतः कारोबारी गतिविधियों के विस्तार का संकेत देता है।

सेवा क्षेत्र बना तेजी का प्रमुख आधार अक्टूबर में सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार ने समग्र वृद्धि को सहारा दिया। सेवा क्षेत्र का पीएमआई सूचकांक सितंबर के 55.2 से बढ़कर 56.2 पर पहुंच गया। नए ऑर्डर में बढ़ोतरी से कंपनियों के कामकाज को गति मिली।

सेवा क्षेत्र में बैंकिंग, परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन, संचार और विभिन्न व्यावसायिक सेवाओं जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। इन क्षेत्रों में मांग बढ़ने से कारोबार का विस्तार हो सकता है। हालांकि, सर्वेक्षण के आंकड़े पूरे देश की प्रत्येक कंपनी या उद्योग की स्थिति का प्रत्यक्ष माप नहीं हैं।

विनिर्माण क्षेत्र में भी विस्तार, लेकिन भर्ती धीमी कारखानों और विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन बढ़ा, लेकिन इस क्षेत्र की समग्र पीएमआई रीडिंग सितंबर के 55.1 से घटकर अक्टूबर में 54.9 रही। इसका एक कारण रोजगार बढ़ने की धीमी गति बताया गया।

सर्वेक्षण के मुताबिक, कंपनियां बढ़ते काम को संभालने के लिए मौजूदा कर्मचारियों पर अधिक निर्भर रहीं। सेवा क्षेत्र में रोजगार का स्तर लगभग स्थिर रहा, जिससे नौ महीने से जारी भर्ती बढ़ने का सिलसिला थम गया। विनिर्माण क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या में केवल मामूली वृद्धि दर्ज की गई।

यह स्थिति अर्थव्यवस्था के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है: यदि कारोबार और ऑर्डर बढ़ते हैं, तो क्या आने वाले महीनों में कंपनियां अधिक लोगों को रोजगार देंगी, या मौजूदा कर्मचारियों और तकनीक की मदद से ही बढ़ते काम को पूरा करती रहेंगी?

निर्यात से भी मिला समर्थन अक्टूबर में अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में सुधार भी कारोबार के लिए सकारात्मक रहा। सर्वेक्षण के अनुसार, कुल नए निर्यात ऑर्डर में वृद्धि छह महीनों के सबसे तेज स्तर पर पहुंची। हालांकि, यह सुधार मुख्य रूप से वस्तुओं के निर्यात में दिखाई दिया, जबकि सेवाओं के लिए विदेशी मांग की वृद्धि अपेक्षाकृत कमजोर रही।

निर्यात में मजबूती भारतीय कंपनियों को घरेलू बाजार से बाहर भी कारोबार बढ़ाने का अवसर दे सकती है। फिर भी, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि विदेशी मांग कितनी टिकाऊ रहती है और कंपनियां नए ऑर्डर को उत्पादन तथा रोजगार में किस हद तक बदल पाती हैं।

लागत के मोर्चे पर राहत के संकेत सर्वेक्षण में यह भी संकेत मिला कि कंपनियों की इनपुट लागत में महंगाई की रफ्तार कम हुई। कच्चे माल, परिवहन और अन्य व्यावसायिक खर्चों में बढ़ोतरी का दबाव कुछ हल्का पड़ा। कंपनियों की ओर से ग्राहकों से ली जाने वाली कीमतों में वृद्धि भी धीमी रही।

यदि यह रुझान आगे भी बना रहता है, तो कंपनियों को लागत संभालने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सर्वेक्षण के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बाजार में सभी वस्तुओं और सेवाओं की खुदरा कीमतें घट जाएंगी।

आम लोगों और नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए क्या मायने हैं? कारोबारी गतिविधियों में तेजी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसका लाभ आम लोगों तक पहुंचने के लिए रोजगार, आय और मांग में भी सुधार जरूरी है।

नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए: फिलहाल भर्ती में व्यापक तेजी की पुष्टि इस सर्वेक्षण से नहीं होती। अलग-अलग क्षेत्रों में अवसरों की स्थिति अलग हो सकती है।

छोटे कारोबारियों के लिए: नए ऑर्डर और मांग में सुधार संभावित अवसर पैदा कर सकते हैं, लेकिन स्थानीय बाजार की स्थिति देखना जरूरी है।

उपभोक्ताओं के लिए: लागत का दबाव कम होने के संकेत मिले हैं, पर इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि रोजमर्रा की चीजें तुरंत सस्ती हो जाएंगी।

नीति निर्माताओं के लिए: कारोबार की वृद्धि के साथ रोजगार सृजन पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अक्टूबर में दर्ज हुई तेजी अंतिम पीएमआई आंकड़ों में भी कायम रहती है या नहीं। इसके साथ ही नई भर्तियों, घरेलू मांग, निर्यात और कंपनियों की कारोबारी उम्मीदों में होने वाले बदलाव अर्थव्यवस्था की दिशा समझने में मदद करेंगे।

ध्यान रहे कि यह प्रारंभिक पीएमआई सर्वेक्षण है, सरकारी रोजगार गणना या राष्ट्रीय आय के आधिकारिक आंकड़ों का विकल्प नहीं। इसलिए इसे अर्थव्यवस्था की ताजा कारोबारी स्थिति का शुरुआती संकेत माना जाना चाहिए।

प्रकाशित: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 | 7:08 PM IST

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