गिग वर्कर्स और घरेलू काम का भी होगा हिसाब, रोजगार सर्वेक्षण में बदलाव की तैयारी

केंद्र सरकार जनवरी 2027 से श्रम सर्वेक्षण में बदलाव की योजना बना रही है।

एक डिलीवरी ड्राइवर नारंगी जैकेट और हेलमेट पहने स्कूटर पर बैठा है और फोन देख रहा है।
केंद्र सरकार भारत में रोजगार की तस्वीर को अधिक स्पष्ट बनाने के लिए श्रम सर्वेक्षण में बदलाव करने की योजना बना रही है।
मुख्य बातें

केंद्र सरकार जनवरी 2027 से श्रम सर्वेक्षण में बदलाव करने की योजना बना रही है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोगों और घर में बिना वेतन किए जाने वाले काम की बेहतर जानकारी जुटाई जा सके।

  • केंद्र सरकार जनवरी 2027 से श्रम सर्वेक्षण में बदलाव करने की योजना बना रही है।
  • इसका उद्देश्य गिग वर्कर्स और बिना वेतन किए जाने वाले काम की जानकारी जुटाना है।
  • प्रस्तावित बदलावों पर विशेषज्ञों और आम लोगों से सुझाव मांगे गए हैं।
  • बदलाव से नीति निर्माताओं को रोजगार के बदलते स्वरूप को समझने में मदद मिलेगी।
  • सर्वेक्षण में घरेलू उपयोग के लिए उत्पादन और परिवार की देखभाल जैसे काम शामिल होंगे।
  • नए आंकड़ों की तुलना पुराने आंकड़ों से करना जटिल हो सकता है।

गिग वर्कर्स और बिना वेतन किए जाने वाले काम का भी होगा बेहतर हिसाब केंद्र सरकार जनवरी 2027 से श्रम सर्वेक्षण में बदलाव करने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोगों और घर में बिना वेतन किए जाने वाले काम की बेहतर जानकारी जुटाना है।

भारत में रोजगार की तस्वीर को अधिक स्पष्ट बनाने के लिए केंद्र सरकार श्रम सर्वेक्षण में बदलाव करने की योजना बना रही है। नए प्रस्ताव के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम करने वाले गिग वर्कर्स और बिना वेतन किए जाने वाली कई गतिविधियों का बेहतर रिकॉर्ड जुटाने पर ध्यान दिया जाएगा।

रॉयटर्स की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव जनवरी 2027 से लागू करने की योजना है। सरकार ने इन बदलावों पर विशेषज्ञों और आम लोगों से सुझाव भी मांगे हैं।

गिग वर्कर्स की जानकारी क्यों जरूरी है?

आज बड़ी संख्या में लोग डिलीवरी, ऑनलाइन टैक्सी सेवाओं और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम करते हैं। इन लोगों की आमदनी और काम के घंटे नियमित वेतन वाली नौकरियों से अलग हो सकते हैं।

यदि सर्वेक्षण में इनकी स्थिति का बेहतर रिकॉर्ड रखा जाता है, तो नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि कितने लोग इस तरह के काम पर निर्भर हैं और रोजगार के बदलते स्वरूप में क्या बदलाव आ रहे हैं।

घर में बिना वेतन किए जाने वाले काम पर भी ध्यान प्रस्तावित सर्वेक्षण में घरेलू उपयोग के लिए उत्पादन, परिवार की देखभाल, स्वयंसेवी गतिविधियों और बिना वेतन प्रशिक्षण जैसे कामों की जानकारी भी जुटाई जाएगी।

घर में बच्चों, बुजुर्गों या अन्य परिवारजनों की देखभाल करने वाले लोग कई घंटे काम करते हैं, लेकिन उनका काम सामान्य वेतन-आधारित रोजगार के आंकड़ों में पूरी तरह दिखाई नहीं देता। बेहतर जानकारी से देश में कामकाज और आर्थिक गतिविधियों की व्यापक तस्वीर समझने में सहायता मिल सकती है।

क्या इससे रोजगार के आंकड़े बदल जाएंगे?

सर्वेक्षण के तरीके में बदलाव होने पर पुराने और नए आंकड़ों की तुलना करना अधिक जटिल हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञों को यह देखना होगा कि नई परिभाषाओं और प्रश्नों के आधार पर जुटाए गए आंकड़ों को किस तरह समझा जाए।

रिपोर्ट में श्रम अर्थशास्त्री ने यह भी चिंता जताई कि यदि सर्वेक्षण केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स को बेहतर दर्ज करता है, तो अनौपचारिक तरीके से काम करने वाले कुछ लोग फिर भी छूट सकते हैं।

आम लोगों के लिए इसका क्या महत्व है?

इस पहल का उद्देश्य रोजगार की बदलती दुनिया को बेहतर ढंग से दर्ज करना है। इससे भविष्य में नीति निर्माण, श्रम बाजार के विश्लेषण और घरों में किए जाने वाले अवैतनिक काम को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, प्रस्तावित बदलावों से अपने आप नई नौकरियां पैदा होने या किसी व्यक्ति की आय बढ़ने की गारंटी नहीं मिलती।

प्रकाशित: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 | 7:20 PM IST

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