रोजगार सर्वेक्षण में होगा बड़ा बदलाव: गिग और अवैतनिक कार्यों का भी होगा हिसाब

सरकार आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण में संशोधन कर रही है, जिसमें गिग वर्कर्स और बिना वेतन वाले काम शामिल होंगे।

एक नीले बैनर के सामने एक मेज पर बैठे तीन पुरुष एक बैठक में भाग ले रहे हैं।
रोजगार सर्वेक्षण में प्रस्तावित बदलावों से गिग वर्कर्स की स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
मुख्य बातें

भारत सरकार आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) में बदलाव कर रही है ताकि रोजगार के आँकड़ों को अधिक व्यापक बनाया जा सके, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग वर्कर्स और घरों में बिना वेतन किए जाने वाले काम की जानकारी भी शामिल की जाएगी।

  • सरकार रोजगार के आँकड़ों को अधिक व्यापक बनाने के लिए PLFS में बदलाव कर रही है।
  • नए सर्वेक्षण में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग वर्कर्स की जानकारी शामिल होगी।
  • बिना वेतन किए जाने वाले घरेलू उत्पादन, देखभाल और स्वयंसेवी कार्यों को भी दर्ज किया जाएगा।
  • इन बदलावों से देश में काम और रोजगार की वास्तविक तस्वीर समझने में मदद मिलेगी।
  • संशोधित सर्वेक्षण व्यवस्था जनवरी 2027 से लागू होने की योजना है।
  • बदलावों के कारण पुराने और नए आँकड़ों की सीधी तुलना करना कठिन हो सकता है।

भारत सरकार रोजगार से जुड़े आँकड़ों को अधिक व्यापक और वास्तविक स्थिति के करीब लाने के लिए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) में बदलाव करने की योजना बना रही ह रॉयटर्स की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, नए सर्वेक्षण में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए काम करने वाले गिग वर्कर्स और बिना वेतन किए जाने वाले कई प्रकार के कामों की जानकारी भी शामिल की जाएगी।

गिग वर्कर्स की जानकारी क्यों जरूरी है?

आज बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिलीवरी, टैक्सी सेवा और दूसरे काम करते हैं। ऐसे कामगारों की रोजगार स्थिति को समझना जरूरी है, क्योंकि उनकी कमाई, काम के घंटे और रोजगार की स्थिरता पारंपरिक नौकरी से अलग हो सकती है

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित बदलावों में डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कामगारों की पहचान के लिए सर्वे में अलग श्रेणी शामिल करने की योजना है। ग्रामीण और शहरी परिवारों से भी इस बारे में अधिक जानकारी पूछी जा सकती है।

घर में बिना वेतन किए जाने वाले काम का भी रिकॉर्ड प्रस्तावित सर्वेक्षण में घर के लिए किए जाने वाले उत्पादन, देखभाल संबंधी गतिविधियों, स्वयंसेवी काम और बिना वेतन वाले प्रशिक्षण जैसे कार्यों की जानकारी भी दर्ज करने की योजना है।

ऐसे काम अक्सर परिवार और समाज के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन पारंपरिक रोजगार आँकड़ों में इनका पूरा विवरण सामने नहीं आ पाता। बेहतर जानकारी से देश में काम और रोजगार की तस्वीर समझने में मदद मिल सकती है।

बदलाव कब से लागू हो सकते हैं?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, संशोधित सर्वेक्षण व्यवस्था जनवरी 2027 से लागू करने की योजना है और 2027–28 के लिए नए नमूने इस्तेमाल किए जाने हैं। सरकार ने प्रस्तावों पर विशेषज्ञों और आम लोगों से प्रतिक्रिया भी आमंत्रित की है।

हालाँकि, सर्वेक्षण में बदलाव होने पर पुराने और नए आँकड़ों की सीधे तुलना करना कठिन हो सकता है। इसलिए रोजगार के आँकड़ों में किसी भी बदलाव को समझते समय सर्वेक्षण की नई परिभाषाओं और पद्धति पर ध्यान देना जरूरी होगा।

प्रकाशित: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 | 6:45 PM IST

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