नई दिल्ली। देश में हवाई यात्रा के बढ़ते किराये को लेकर सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ हवाई मार्गों पर टिकटों के किराये में लगभग 700 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। याचिकाकर्ता ने इसे आम यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बताते हुए अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
हालांकि, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने इस दौरान मौखिक रूप से टिप्पणी भी की कि हवाई यात्रा नहीं करनी है तो हवाई जहाज से यात्रा न करें।
हवाई किराये में बढ़ोतरी की वजह क्या है?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि त्योहारों और अधिक मांग वाले दिनों में एयरलाइंस की डायनामिक प्राइसिंग व्यवस्था के कारण टिकटों के दाम सामान्य कीमत से कई गुना बढ़ जाते हैं।
याचिका में उदाहरण दिए गए हैं:
दिल्ली से कोलकाता का टिकट सामान्य दिनों में लगभग 10–11 हजार रुपये, जबकि 6 नवंबर के लिए 78,694 रुपये तक बताया गया।
बेंगलुरु से दिल्ली की एक उड़ान का किराया लगभग 15,901 रुपये और दूसरी उड़ान का 40,506 रुपये बताया गया। सरकार ने क्या कदम उठाया है?
केंद्र सरकार ने विमानन क्षेत्र के लिए नए नियम तैयार किए हैं। भारत सरकार ने भारतीय वायुयान नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
नए ढांचे में असाधारण परिस्थितियों में जनहित के लिए सरकार को हवाई किरायों पर हस्तक्षेप करने का अधिकार रहेगा।
अब आगे क्या होगा?
हवाई किराये में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों से जुड़ी मुख्य याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 16 नवंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित है।
यात्रियों के लिए इस खबर का महत्व त्योहारों, शादी-विवाह, बीमारी और आपातकालीन परिस्थितियों में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को महंगे टिकट खरीदने पड़ सकते हैं। ऐसे में किराये की पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
प्रकाशित: सोमवार, 2 नवंबर 2026 | 8:15 PM IST

