डिजिटल धोखाधड़ी के शिकार लोगों को मिलेगा मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बैंकों की लापरवाही से हुए नुकसान की भरपाई उन्हें ही करनी होगी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय की इमारत, जिसके सामने एक मूर्ति और हरा-भरा बगीचा है।
डिजिटल धोखाधड़ी के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए बैंकों की जवाबदेही तय की गई है।
मुख्य बातें

डिजिटल धोखाधड़ी के पीड़ितों को मुआवजा मिलेगा यदि बैंक या वित्तीय संस्थान की लापरवाही के कारण उन्हें नुकसान हुआ है, सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही तय की है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी में बैंकों की जवाबदेही तय की है।
  • जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि होने पर पीड़ितों को मुआवजा मिलेगा।
  • 2026 के शुरुआती 8 महीनों में 21,928 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 647 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी हुई।
  • बैंकों को संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान करनी होगी और पुष्टि करनी होगी।
  • RBI को 30 नवंबर तक नए दिशानिर्देश अधिसूचित करने और 31 दिसंबर तक लागू करने हैं।
  • ऑनलाइन ठगी होने पर 1930 साइबर हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत करें।

नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में बैंकों और वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जांच में डिजिटल धोखाधड़ी की पुष्टि होती है, तो पीड़ितों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे पर विचार किया जाना चाहिए।

ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने आम नागरिकों के हित में महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। अदालत ने कहा है कि यदि बैंक या वित्तीय संस्थान की लापरवाही के कारण ग्राहक के साथ साइबर धोखाधड़ी होती है, तो बैंक को पीड़ित के नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रस्तावित नियमों में बैंकों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है। 647 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी

अदालत में पेश जानकारी के अनुसार, 2026 के शुरुआती आठ महीनों में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी 21,928 शिकायतें दर्ज हुईं। इन मामलों में 647 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की जानकारी सामने आई।

बैंक को किन बातों का ध्यान रखना होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों पर जोर दिया है:

संदिग्ध बड़े लेनदेन की तुरंत पहचान हो।

असामान्य लेनदेन को अस्थायी रूप से रोका जा सके।

ग्राहक से लेनदेन की पुष्टि की जाए।

बैंक अधिकारियों की मिलीभगत मिलने पर कार्रवाई हो।

बैंक की लापरवाही से ठगी होने पर मुआवजे की व्यवस्था हो।

RBI को कब तक तैयार करने हैं नए नियम?

RBI की प्रस्तावित KYC और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े दिशानिर्देशों को 30 नवंबर तक अधिसूचित करने और 31 दिसंबर तक लागू करने की योजना बताई गई है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।

एक हैकर लैपटॉप पर काम कर रहा है, जबकि एक फोन पर बैंक और सुरक्षा आइकन दिख रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की है।

आम नागरिकों के लिए जरूरी सलाह

अगर आपके साथ ऑनलाइन ठगी होती है, तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें और आधिकारिक पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें।

प्रकाशित: शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 | 7:24 AM IST

यह खबर शेयर करें

WhatsAppFacebookXTelegram