दिल्ली में फिर बिगड़ी हवा, कई इलाकों में AQI 250 के पार; GRAP-1 लागू

राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण बढ़ने से चिंता, CAQM ने लागू किए प्रतिबंध

धुंध भरे दिन में इंडिया गेट के सामने सड़क पर लोग और वाहन।
दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के कारणों और GRAP-1 के तहत लागू किए गए प्रतिबंधों का विवरण।
मुख्य बातें

दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब होने के कारण वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू किया है, जिसका उद्देश्य धूल, वाहनों के धुएं और अन्य प्रदूषण स्रोतों को नियंत्रित करना है।

  • 24 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के नरेला में AQI 278, जहांगीरपुरी में 270, मुंडका में 264 और विवेक विहार में 261 दर्ज किया गया।
  • नेहरू नगर में AQI 135 और अशोक विहार में 139 रहा, जो अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषण के स्तर में भिन्नता दर्शाता है।
  • वायु गुणवत्ता में गिरावट के कारण CAQM ने दिल्ली-NCR में GRAP के पहले चरण के प्रतिबंध लागू किए हैं।
  • दिल्ली में अक्टूबर और नवंबर में प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य, सड़क की धूल, मौसम और पराली जलाना हैं।
  • AQI 201-300 की श्रेणी 'खराब' मानी जाती है, जिसमें बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
  • GRAP-1 में धूल नियंत्रण, सड़कों की सफाई, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन और वाहनों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी पर जोर दिया जाता है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। शहर के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। आधिकारिक निगरानी पोर्टल के अनुसार, 24 अक्टूबर 2026 की सुबह 8 बजे नरेला में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 278, जहांगीरपुरी में 270, मुंडका में 264 और विवेक विहार में 261 दर्ज किया गया। इसके विपरीत, नेहरू नगर में AQI 135 और अशोक विहार में 139 रहा। इससे स्पष्ट है कि दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण का स्तर एक जैसा नहीं है।

वायु गुणवत्ता में गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण के प्रतिबंध लागू किए हैं। इन उपायों का उद्देश्य धूल, वाहनों से निकलने वाले धुएं और अन्य प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण करना है।

दिल्ली में हर साल अक्टूबर और नवंबर के दौरान प्रदूषण की समस्या गंभीर होने लगती है। इस अवधि में मौसम की परिस्थितियां, वाहनों का धुआं, निर्माण गतिविधियां, सड़क की धूल और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाएं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, किसी खास दिन प्रदूषण बढ़ने के पीछे किन स्रोतों की कितनी भूमिका रही, इसका निर्धारण संबंधित वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

AQI 250 के आसपास होने का क्या मतलब है?

वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर को समझने का एक तरीका है। भारत में इस्तेमाल होने वाली श्रेणियों के अनुसार:

AQI स्तर हवा की श्रेणी 0–50 अच्छी 51–100 संतोषजनक 101–200 मध्यम 201–300 खराब 301–400 बहुत खराब 401–500 गंभीर इस वर्गीकरण के मुताबिक, नरेला और जहांगीरपुरी जैसे इलाकों में दर्ज स्तर खराब श्रेणी में आते हैं। इस स्तर पर खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहें क्या हैं?

दिल्ली में वायु प्रदूषण किसी एक कारण से नहीं बढ़ता। कई स्रोत एक साथ हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।

1. वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं। पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन हवा में प्रदूषक कणों और गैसों की मात्रा बढ़ा सकते हैं। भारी ट्रैफिक और लंबे समय तक जाम रहने की स्थिति में स्थानीय प्रदूषण की समस्या और बढ़ सकती है।

2. निर्माण कार्य और सड़क की धूल निर्माण स्थलों, भवनों के मलबे, खुले में रखी निर्माण सामग्री और धूलभरी सड़कों से हवा में कण फैल सकते हैं। CAQM ने निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे तथा धूल के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया है।

3. मौसम और हवा की गति हवा की गति कम होने पर प्रदूषक कण आसानी से बिखर नहीं पाते और स्थानीय स्तर पर जमा हो सकते हैं। मौसम, नमी और वायुमंडल में हवा के मिश्रण की स्थिति भी प्रदूषण के फैलाव को प्रभावित करती है। IITM के पूर्वानुमान में 24 से 26 अक्टूबर के दौरान दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बने रहने की आशंका जताई गई थी।

4. क्षेत्रीय प्रदूषण और पराली दिल्ली-NCR की हवा पर आसपास के क्षेत्रों की गतिविधियों का भी असर पड़ सकता है। फसल अवशेष जलाने से निकलने वाला धुआं कुछ मौसम परिस्थितियों में राजधानी तक पहुंच सकता है। हालांकि, प्रदूषण के किसी खास स्तर के लिए पराली को ही जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा, जब तक उस दिन के स्रोत संबंधी आंकड़े उपलब्ध न हों।

GRAP-1 लागू होने से क्या बदलेगा?

GRAP का पहला चरण खराब वायु गुणवत्ता की स्थिति में प्रदूषण कम करने के लिए एहतियाती उपायों पर केंद्रित होता है। इसमें संबंधित एजेंसियों को धूल नियंत्रण, सड़कों की सफाई, निर्माण स्थलों पर नियमों के पालन और वाहनों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी पर ध्यान देना होता है।

इन उपायों का असर तभी बेहतर हो सकता है, जब सरकारी एजेंसियां नियमित निरीक्षण करें और नागरिक भी नियमों का पालन करें। खुले में कचरा जलाने से बचना, वाहन की समय पर सर्विसिंग कराना और छोटी दूरी के लिए संभव होने पर सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना प्रदूषण नियंत्रण में मददगार हो सकता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि GRAP का पहला चरण लागू होने का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली में सभी प्रकार के वाहनों या निर्माण कार्यों पर स्वतः पूर्ण प्रतिबंध लग गया है। किसी विशेष गतिविधि पर रोक के लिए संबंधित आदेश और नियम देखना जरूरी है।

खराब हवा में आम लोग अपनी सुरक्षा कैसे करें?

वायु प्रदूषण का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। प्रदूषण के स्तर के साथ-साथ बाहर रहने की अवधि, शारीरिक गतिविधि और व्यक्ति की सेहत भी महत्वपूर्ण होती है।

बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें: प्रदूषण ज्यादा होने पर लंबे समय तक सड़क किनारे या धूलभरे स्थानों पर रहने से बचें।

बाहर व्यायाम करने में सावधानी बरतें: खराब हवा के दौरान तेज दौड़ने या भारी शारीरिक गतिविधि को कम करना उचित हो सकता है।

जरूरत के अनुसार मास्क इस्तेमाल करें: प्रदूषण से बचाव के लिए अच्छी तरह फिट होने वाला N95 या समकक्ष रेस्पिरेटर उपयोगी हो सकता है। सामान्य कपड़े का मास्क सूक्ष्म कणों से सीमित सुरक्षा देता है।

घर के अंदर धुआं न बढ़ाएं: तंबाकू, कचरा या अन्य चीजें जलाने से बचें और घर में अनावश्यक धुएं के स्रोत कम रखें।

लक्षणों को नजरअंदाज न करें: सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या गंभीर असहजता होने पर चिकित्सा सहायता लें।

आगे दिल्ली की हवा कैसी रह सकती है?

IITM के वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान में 24 से 26 अक्टूबर के बीच हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रहने की संभावना बताई गई थी। हालांकि, प्रदूषण का वास्तविक स्तर हवा की गति, मौसम और उत्सर्जन में बदलाव के अनुसार ऊपर-नीचे हो सकता है। इसलिए पाठकों को ताजा AQI और आधिकारिक मौसम बुलेटिन देखते रहना चाहिए।

दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए केवल सर्दियों में कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। वाहनों के उत्सर्जन पर नियंत्रण, निर्माण की धूल का प्रबंधन, स्वच्छ ईंधन, कचरा जलाने पर रोक और क्षेत्रीय स्तर पर समन्वित प्रयास लंबे समय तक जरूरी रहेंगे।

प्रकाशित: शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 | 1:09 PM IST

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