दिल्ली में यमुना नदी की सफाई को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। 24 अक्टूबर की सुबह कालिंदी कुंज के पास नदी की सतह पर सफेद झाग दिखाई दिया। यह दृश्य ऐसे समय सामने आया है, जब सरकार ने यमुना के पुनर्जीवन और सीवेज व्यवस्था में सुधार के लिए हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की हैं।
सरकार ने यमुना की सफाई के लिए ₹8,941 करोड़ की परियोजनाएं शुरू कीं 22 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में यमुना के पुनर्जीवन से संबंधित ₹8,941 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन योजनाओं में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्र और नई सीवर लाइनें शामिल हैं। इनका उद्देश्य गंदे पानी को बिना पर्याप्त उपचार के नदी में पहुंचने से रोकना और दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था में सुधार करना है।
सरकार ने यमुना को साफ करने के लिए मई 2029 का लक्ष्य भी बताया है। हालांकि, परियोजनाओं की घोषणा और नदी की वास्तविक जल गुणवत्ता में सुधार के बीच अंतर है। नतीजों का आकलन नियमित जल परीक्षण और परियोजनाओं के समय पर पूरा होने के आधार पर करना होगा।
नदी में झाग क्यों बनता है?
यमुना में दिखाई देने वाला सफेद झाग आम तौर पर पानी में मौजूद प्रदूषकों, डिटर्जेंट और कार्बनिक पदार्थों के कारण बन सकता है। जब पानी तेजी से बहता है या उसमें हवा मिलती है, तो ये पदार्थ झाग पैदा कर सकते हैं।
कालिंदी कुंज में दिखाई दिए झाग को लेकर चिंता इसलिए भी है, क्योंकि यह नदी में प्रदूषण की समस्या की ओर ध्यान खींचता है। हालांकि, किसी खास जगह पर झाग की तस्वीर देखकर सभी प्रदूषकों की पहचान या उनकी मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकती। इसके लिए पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच आवश्यक है।
यमुना किनारे बाढ़ से बचाव के लिए ₹99 करोड़ की दीवार की योजना
दिल्ली सरकार ने 23 अक्टूबर को बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ₹622 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी दी। इनमें यमुना के किनारे लगभग 4.7 किलोमीटर लंबी प्रबलित कंक्रीट दीवार बनाने की ₹99 करोड़ की परियोजना भी शामिल है। प्रस्तावित दीवार मैगजीन रोड नाले से पुराने रेलवे पुल तक बनाई जानी है।
इसका उद्देश्य नदी का जलस्तर बढ़ने पर आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने का जोखिम कम करना है। हालांकि, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है कि नदी के प्राकृतिक बहाव और बाढ़ के मैदानों पर पड़ने वाले असर का वैज्ञानिक आकलन किए बिना केवल दीवार बनाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
क्या केवल परियोजनाओं से साफ हो जाएगी यमुना?
यमुना को साफ करने के लिए सीवेज उपचार संयंत्र बनाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ कई दूसरे कदम भी आवश्यक हैं:
घरों और उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी का उचित उपचार।
सीवर नेटवर्क की मरम्मत और उसकी क्षमता में सुधार।
नालों में कचरा और प्लास्टिक डालने पर रोक।
नदी के पानी की नियमित जांच और परिणामों को सार्वजनिक करना।
बाढ़ के मैदानों और नदी के प्राकृतिक बहाव की सुरक्षा।
यदि इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो नदी में प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन इसका परिणाम तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं है।
आम लोगों के लिए जरूरी सावधानी यमुना में झाग या गंदा पानी दिखाई देने पर उसके संपर्क से बचना उचित है। नदी के पानी को बिना उचित उपचार के पीने या घरेलू उपयोग में लेने से बचें। नदी किनारे रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और जल विभाग की सलाह का पालन करना चाहिए।
प्रकाशित: शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 | 1:40 PM IST

