भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मुंबई में महत्वपूर्ण चर्चा

मार्को रुबियो और एस. जयशंकर ने व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर बात की।

दो पुरुष अमेरिकी और भारतीय झंडों के सामने हाथ मिला रहे हैं।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मुंबई में महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
मुख्य बातें

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मुंबई में मुलाकात की, जहां उन्होंने व्यापार, ऊर्जा सहयोग, निवेश, रक्षा और उभरती तकनीकों में साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया।

  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर हैं और उन्होंने मुंबई में एस. जयशंकर से मुलाकात की।
  • बातचीत का मुख्य केंद्र व्यापार, ऊर्जा सहयोग, निवेश, रक्षा और उभरती तकनीकों में साझेदारी को मजबूत करना है।
  • दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की बातचीत शुल्क और अन्य मुद्दों के कारण अटकी हुई थी।
  • भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदना दोनों देशों के बीच बातचीत का एक संवेदनशील विषय रहा है।
  • अमेरिकी प्रशासन ने रूसी तेल खरीद से जुड़े प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्कों पर फिलहाल छूट दी है।
  • यदि समझौता होता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में शुल्क संबंधी स्पष्टता मिल सकती है।

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर हैं। मंगलवार को मुंबई में उनकी भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अहम मुलाकात हुई। बातचीत का मुख्य केंद्र व्यापार, ऊर्जा सहयोग, निवेश, रक्षा और उभरती तकनीकों में दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करना है।

बातचीत में किन मुद्दों पर जोर है?

1. व्यापार समझौते की राह आसान बनाने की कोशिश अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की बातचीत पिछले कई महीनों से शुल्क और अन्य मुद्दों के कारण अटकी हुई थी। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि समझौता अब काफी करीब है और कुछ बिंदुओं पर सहमति बनना बाकी है। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर होने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

2. भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदना दोनों देशों के बीच बातचीत का एक संवेदनशील विषय रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों, कीमतों और आपूर्ति की स्थिरता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग देशों से तेल खरीदता है। अमेरिकी प्रशासन ने हाल में रूसी तेल खरीद से जुड़े प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्कों पर फिलहाल छूट दी है, जिससे व्यापार वार्ता आगे बढ़ने की गुंजाइश बनी है।

3. भारतीय कारोबार और रोजगार पर क्या असर हो सकता है? यदि दोनों देश व्यापार समझौते के बाकी मुद्दों पर सहमत हो जाते हैं, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में शुल्क संबंधी स्पष्टता मिल सकती है। इससे कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, दवाइयां और अन्य उद्योगों की कंपनियों को अपनी लागत और कारोबार की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। लेकिन अंतिम लाभ समझौते की शर्तों, लागू शुल्क दरों और किन उत्पादों को रियायत मिलती है, इस पर निर्भर करेगा। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी भारतीय उत्पादों पर शुल्क कम हो जाएगा।

आगे क्या होगा? रुबियो के भारत दौरे में मुंबई के बाद गुजरात के जामनगर में रिफाइनरी का दौरा और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात भी निर्धारित है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि व्यापार वार्ता में शेष मुद्दों पर सहमति बनती है या नहीं और क्या दोनों देश समझौते की कोई समय-सीमा घोषित करते हैं।

प्रकाशित: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 | 5:19 PM IST

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