भारत पर टला नहीं खतरा, 100 फीसदी टैरिफ लगाने के लिए कुछ भी करेगा अमेरिका!

रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर अमेरिका की ओर से भारी अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने का खतरा बना हुआ है।

भारत पर टला नहीं खतरा, 100 फीसदी टैरिफ लगाने के लिए कुछ भी करेगा अमेरिका!
भारत पर टला नहीं खतरा, 100 फीसदी टैरिफ लगाने के लिए कुछ भी करेगा अमेरिका!
मुख्य बातें

रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर अमेरिका की ओर से भारी अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने का खतरा बना हुआ है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रूस से डीजल खरीदने का फैसला भारत को इस मामले में राहत दिलाने का आधार बन सकता है।

  • रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर अमेरिका की ओर से भारी अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने का खतरा बना हुआ है।
  • हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रूस से डीजल खरीदने का फैसला भारत को इस मामले में राहत दिलाने का आधार बन सकता है।
  • भारत अमेरिका से छूट देने की मांग कर सकता है, लेकिन फिर भी यह स्पष्ट नहीं है कि वाशिंगटन इस तर्क को स्वीकार करेगा या नहीं।

रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर अमेरिका की ओर से भारी अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने का खतरा बना हुआ है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रूस से डीजल खरीदने का फैसला भारत को इस मामले में राहत दिलाने का आधार बन सकता है। भारत अमेरिका से छूट देने की मांग कर सकता है, लेकिन फिर भी यह स्पष्ट नहीं है कि वाशिंगटन इस तर्क को स्वीकार करेगा या नहीं। अमेरिका के नए कानून में अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है।

कानून के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति उन देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगा सकते हैं, जो पिछले 12 महीनों में रूसी तेल या गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हों और कानून लागू होने के 30 दिन बाद भी खरीद जारी रखें। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत पर स्वतः इतनी ही दर से शुल्क लग जाएगा। अमेरिकी संसद ने हाल ही में इस कानून को मंजूरी दी थी।

भारत के लिए रूसी तेल छोड़ना क्यों मुश्किल? भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। रूस से मिलने वाले कच्चे तेल ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिफाइनरियों को अपेक्षाकृत सस्ता तेल उपलब्ध कराया है। सितंबर में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 35 फीसदी थी। जुलाई में यह हिस्सेदारी 56 फीसदी तक थी। रूस से आपूर्ति में कमी और नए अमेरिकी कानून के संभावित प्रभाव के बीच भारत की निर्भरता घटी है, लेकिन रूस अब भी प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। वित्त मंत्री भी कह चुकी हैं कि रूस से तेल खरीदना अचानक बंद करके दूसरे देशों से आपूर्ति बढ़ाने पर बाजार में उपलब्ध तेल की सीमित मात्रा पर दबाव पड़ेगा।

भारत के पक्ष में क्या तर्क? भारत के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यह है कि रूस से तेल की आपूर्ति अचानक कम करने से वैश्विक बाजार में उपलब्ध कच्चे तेल पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में भारत का रूसी तेल खरीदना केवल द्विपक्षीय व्यापार का मामला नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा है। दूसरी ओर, अमेरिका रूस की कमाई सीमित करने की अपनी नीति पर कायम रह सकता है। ट्रंप प्रशासन व्यापार समझौते को लेकर दबाव बनाने के लिए भी कर सकता है।

प्रकाशित: गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 | 2:08 PM IST

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