यूपी चुनाव: AAP ने बदली रणनीति, अब कम सीटों पर लड़ेगी चुनाव

पिछली बार 1% से भी कम वोट मिलने के बाद पार्टी ने लिया बड़ा फैसला।

एक व्यक्ति नीली शर्ट पहने हुए माइक्रोफ़ोन के सामने बोल रहा है, उसकी उंगली ऊपर की ओर इशारा कर रही है।
आम आदमी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति में बदलाव की घोषणा की है।
मुख्य बातें

आम आदमी पार्टी (AAP) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी रणनीति बदल दी है, अब वह पिछली बार की तरह 349 सीटों पर चुनाव लड़ने के बजाय कुछ चुनिंदा सीटों पर ही मजबूती से चुनाव लड़ेगी।

  • AAP ने पिछली बार यूपी में 349 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
  • पार्टी को पिछले चुनाव में 1% से भी कम वोट मिले थे।
  • राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने नई रणनीति का खुलासा किया।
  • नगर पालिका चुनाव में AAP ने बेहतर प्रदर्शन किया था, जिसमें 250-300 सभासद-पार्षद और 10 चेयरमैन जीते।
  • AAP इस बार केवल उन सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी जहां उसे जीत की उम्मीद है।
  • पिछले चुनाव में AAP सपा से गठबंधन करना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस के साथ होने के कारण ऐसा नहीं हो सका।

दिल्ली में सत्ता जाने के बाद पंजाब में सरकार बचाने और गुजरात, गोवा जैसे राज्यों में विस्तार के लिए मेहनत कर ही आम आदमी पार्टी (आप) ने उत्तर प्रदेश में हुई एक गलती का अहसास करते हुए अपनी रणनीति में बदलाव कर लिया है। जनसंख्या के हिसाब से देश के सबसे बड़े और 400 से अधिक विधानसभा सीटों वाले एकमात्र राज्य उत्तर प्रदेश में अगले ही साल विधानसभा का चुनाव होना है। भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा जैसी बड़ी पार्टियों के अलावा यहां कई छोटे दल भी दमखम तैयारी में जुटे हैं। इस बीच 'आप' ने भी अधिक क्षेत्रों की बजाय कुछ ही सीटों पर लेकिन दमदार तरीके से लड़ने का मन बनाया है।

उत्तर प्रदेश में पार्टी के विस्तार के लिए कई सालों से पसीना बहा रहे राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने नई रणनीति का खुलासा किया है। उन्होंने माना कि पिछली बार पार्टी का 349 सीटों पर लड़ने का फैसला मुफीद नहीं था। पार्टी को 1 पर्सेंट से भी कम वोट मिलने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि परिणाम उनके लिए ठीक नहीं था। न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में संजय सिंह ने कहा, 'उत्तर प्रदेश में पिछली बार हम लोग करीब साढ़े तीन सौ सीटों पर लड़े। परिणाम हमारे हक में बहुत अच्छा नहीं आया। एक पर्सेंट से भी कम वोट हमें मिला। लेकिन कुछ सीटों पर हमें 25-26 हजार, कहीं 10 हजार वोट मिले।'

राज्यसभा सांसद ने नगर पालिका चुनाव के नतीजों को बेहतर बताते हुए कहा कि इस बार बदली रणनीति के साथ उनकी पार्टी कम सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सांसद ने कहा, 'नगर पालिका में हमने बेहतर प्रदर्शन किया। नगर पालिका के चुनाव में हमारी करीब 250-300 सभासद-पार्षद जीते। हमारे करीब 10 चेयरमैन जीते। रामपुर जैसे नगर पालिका के चेयरमैन आम आदमी पार्टी के हैं। केमरी नगर पंचायत के चेयरमैन आम आदमी पार्टी के हैं। बरसाना में चेयरमैन आम आदमी पार्टी के हैं। ऐसे कई जगहों पर हमारे चेयरमैन जीतकर आए। तो नगर पालिका के चुनाव में हमने बेहतर प्रदर्शन किया। उसके बाद लगातार यूपी में हमारी पार्टी की सक्रियता बनी रही।'

सिर्फ लड़ने के लिए नहीं लड़ेंगे: संजय सिंह

संजय सिंह ने यह साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी इस बार पिछली बार की तरह यूपी की अधिकतर सीटों पर उम्मीदवार नहीं देगी, बल्कि मजबूत इलाकों में फोकस करेगी। उन्होंने कहा, 'इस बार वह 349 वाली तो बात नहीं रहेगी कि हम केवल चुनाव लड़ने के लिए चुनाव लड़ेंगे। इस बार की हमारी रणनीति है कि जहां भी लड़ेंगे मजबूती से लड़ेंगे। हालांकि, उन्होंने कोई आंकड़ा तो नहीं दिया, लेकिन यह साफ कर दिया है कि पार्टी सिर्फ उन सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी जहां उसे जीत की उम्मीद दिखेगी।

पिछले चुनाव में भी सपा से गठबंधन चाहती थी AAP, पर कांग्रेस से दिक्कत

आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह के सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से अच्छे रिश्ते हैं। पार्टी पिछले चुनाव में भी सपा से गठबंधन की चाह रखती थी, लेकिन कांग्रेस और सपा के साथ होने की वजह से उसे दूरी रखनी पड़ी। पार्टी ने अकेले ही 349 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए थे। इस बार फिर यदि सपा और कांग्रेस का गठबंधन हो जाता है तो पंजाब, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों की वजह से अरविंद केजरीवाल को यूपी में इस गठबंधन से दूर रहना पड़ेगा। क्योंकि इन राज्यों में आप को कांग्रेस से मुकाबला करना है।

प्रकाशित: मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 | 2:20 PM IST

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