Patna Seat Results: पटना स्नातक एमएलसी सीट के नतीजे लगभग तय हो चुके हैं। जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार ने शानदार जीत दर्ज की है। पहली वरीयता में लगातार आगे रहने के बाद उन्होंने दूसरी वरीयता में भी बढ़त बनाई। उनका मुकाबला भले ही राष्ट्रीय जनता दल द्वारा घोषित उम्मीदवार से था, लेकिन हार मोकामा से जेडीयू के ही बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने मानी है। इस चुनाव में उन्होंने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया। इसका सबसे बड़ा कारण यही था कि उन्हें नीरज कुमार से बदला लेना था। अनंत सिंह अक्सर आरोप लगाते रहते हैं कि उनके चुनाव में नीरज कुमार ने विरोध किया था। चुनाव के दौरान ललन सिंह ने भी उनके इस बयान को दोहराया था।
नीरज कुमार से बदला लेने की जिद के कारण उन्होंने इस एमएलसी चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह को अपना समर्थन दिया। इसके लिए उन्होंने खुलकर प्रचार भी किया। एक इंटरव्यू के दौरान तो अनंत सिंह ने नीरज कुमार की हार निश्चित बताते हुए 20 करोड़ रुपये की शर्त लगाने की बात भी कही थी।
पूरे चुनाव के दौरान जेडीयू खामोशी से पटना स्नातक चुनाव की सियासी गतिविधियों को देखती रही। जेडीयू के अंदरखाने दबी जुबान अनंत सिंह की बगावत के पीछ ललन सिंह की भूमिका की भी चर्चा होने लगी। इससे उस समय और बल मिल गया जब खबर आई कि ललन सिंह ने नीरज कुमार के लिए चुनाव प्रचार करने से साफ इनकार कर दिया। वहीं, इस चुनाव में नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने नीरज के पक्ष में प्रचार किया और लोगों से वोट देने की अपील की। आपको यह भी बता दें कि बीते विधानसभा चुनाव के दौरान ललन सिंह ने अनंत सिंह के लिए प्रचार किया था।
ललन सिंह ने हस्तक्षेप से किया था इनकार चुनाव प्रचार के दौरान ही विवाद बढ़ता देख जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था कि यह मामला केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पार्टी ने इसे सुलझाने की जिम्मेदारी उन्हें ही दी है। बाद में खबर आई कि ललन सिंह ने इस मामले में किसी भी तरह से हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
नीरज कुमार के विरोध में जेडीयू से बगावत करने वाले अनंत सिंह को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पहले तो उन्हें छह साल से पार्टी से निकाल दिया गया। वहीं, उनकी विधायकी खत्म करने के लिए जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा स्पीकर से मिलकर सबूत दिखाए हैं। अनंत सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। यही वजह है कि बतौर दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री के तौर पर मिला सरकारी बंगला खाली करने का भी आदेश दिया गया है।
अनंत सिंह ने की ललन सिंह से खुद को अलग करने की कोशिश चुनाव संपन्न होने के बाद अनंत सिंह से जब ललन सिंह को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने उनसे दूरी बनाकर एक संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बिहार में 100 ललन सिंह हैं, मैं उन्हें नहीं जानता हूं। उनके इस बयान को दो मायने हो सकते हैं। या तो इस पूरे प्रकरण में अनंत सिंह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं या फिर वह यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि इस लड़ाई में ललन सिंह की कोई भूमिका नहीं है। हालांकि, जेडीयू के अंदरखाने ललन सिंह की भूमिका की चर्चा शुरू हो चुकी है। केंद्र में मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार हो रहा है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्नातक सीट के नतीजों की आंच ललन सिंह के कैबिनेट मंत्री के पद तक पहुंचेगी?
प्रकाशित: बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 | 1:19 PM IST

