कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। इसके दो बड़े नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका एक सप्ताह से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद भले ही बाहर निकल आए हैं, लेकिन उन्हें कानूनी 'जाल' से मु्क्ति नहीं मिली है। उनके खिलाफ दर्ज दो एफआईआर की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रान्च ने शुरू कर दी है, जिसके लिए उन्हें गुरुवार को पूछताछ के लिए समन भी किया गया। दूसरी तरफ सीजेपी के सभी बड़े नेताओं ने एक या एक से ज्यादा बॉन्ड साइन करके 'शांति' की शर्त भी कूबल की है। ऐसे में कॉकरोच जनता पार्टी और इसके प्रमुख अभिजीत दीपके को आने वाले दिनों में कम से कम 4 मुश्किलों का सामना करना होगा।
1. सीजेपी नेताओं के पैरों में कानूनी बेड़ियां नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद भले ही सरकार और अदालतों ने सीजेपी और इसके नेताओं को कानूनी मुश्किलों से राहत दे दी, लेकिन अब राजनीतिक मुद्दे पर नरमी नहीं बरती जा रही है। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन को लेकर सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके, सह संयोजक सौरभ दास, आशुतोष रांका और संगठन प्रभारी आजिंक्य शिंदे को हवालात तक जाना पड़ा है। सभी को कुछ शर्तों और बॉन्ड भरने के बाद छोड़ा गया है।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के इरादे से दिल्ली पहुंचे दीपके, दास और रांका को आईजीआई एयरपोर्ट पर ही एहतियातन हिरासत में लिया गया था और दिल्ली कैंट पुलिस थाने में एईएम की अदालत में पेश किया गया था। तीनों को 50-50 हजार रुपये के जमानती बांड भरने और एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छा आचरण करने का वचन देने के बाद रिहा कर दिया गया था। लेकिन 13 अक्टूबर को ही दास और रांका इसका उल्लंघन करके जंतर-मंतर गए तो उन्हें एक सप्ताह से अधिक समय तक तिहाड़ जेल में बिताना पड़ा। अब एक बार फिर उन्हें कई शर्तों के साथ जेल से बाहर आने का मौका मिला है। ऐसे में यदि उन्होंने शर्तों को तोड़ा तो आगे राहत मिलना और अधिक मुश्किल हो जाएगा।
2. कई शर्तों का करना है पालन, आंदोलन का बदलना होगा अंदाज सीजेपी और इसके नेता जो खुद को एक 'प्रेशर ग्रुप' कहते हैं, अब खुद अदालती शर्तों के दबाव में दिख रहे हैं। सीजेपी नेता अभी तक कहते रहे हैं कि वह आंदोलन या विरोध प्रदर्शन के लिए पुलिस से किसी तरह की अनुमति नहीं मांगेंगे। लेकिन अब बिना इजाजत ऐसा करने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। दीपके ने जहां एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छा आचरण करने की बात लिखित में दी है तो दीपके और दास ने भी जंतर-मंतर पर किसी तरह के प्रदर्शन की अपील ना करने और शांति भंग ना करने का हलफनामा दिया है। ऐसे में अब यह तय हो गया है कि यदि सीजेपी दिल्ली में कोई धरना-प्रदर्शन या आंदोलन करना चाहती है तो उसे दिल्ली पुलिस से इजाजत लेनी होगी और अधिसूचित स्थानों पर ही अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं। इसका मतलब है कि सीजेपी को अपने आंदोलन के अंदाज को बदलना होगा।
3. दिवाली तक ब्रेक, समर्थकों में जोश कामय रखना मुश्किल होगा सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने पहले ही आंदोलन को ठंडे बस्ते में डालने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को दिवाली तक परिवार के साथ वक्त बिताने को कहा है। ऐसे में सीजेपी नेताओं के सामने एक बड़ी चुनौती यह होगी कि बिना किसी कार्यक्रम और अजेंडे के कार्यकर्ताओं में किस तरह जोश और उत्साह कायम रखा जाए?
4. ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कई मोर्चे, क्रेडिट वॉर में पिछड़ तो नहीं जाएगी सीजेपी? नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन और शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए एकतरफा क्रेडिट हासिल करने वाली सीजेपी को ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। दीपके ने भले ही कुछ दिन ब्रेक का फैसला कर लिया है, लेकिन उनके साथ रहे सिविल सोइटीज के कुछ सदस्यों और वामपंथी छात्र संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का संकेत दे दिया है। ऐसे में दीपके के सामने यह भी मुश्किल है कि वह किस तरह सड़क से दूर रहकर क्रेडिट वॉर के मोर्चे पर खुद को पिछड़ने से रोकें।
प्रकाशित: गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 | 2:55 PM IST

