जस्टिस कौल के आरोपों पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ का पलटवार: 'कभी आपत्ति नहीं जताई'

पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने जस्टिस कौल के सभी आरोपों को खारिज किया, पारदर्शिता पर जोर दिया।

एक व्यक्ति एक छोटे कुत्ते को पकड़े हुए है और दूसरा व्यक्ति काले गाउन में बैठा है।
पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने जस्टिस कौल के आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कॉलेजियम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
मुख्य बातें

पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने जस्टिस कौल के आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि उनके कार्यकाल में कॉलेजियम के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और जस्टिस कौल ने हर सिफारिश का समर्थन किया था, कभी आपत्ति नहीं जताई।

  • पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने जस्टिस कौल के आरोपों को खारिज किया है।
  • चंद्रचूड़ ने कहा कि उनके कार्यकाल में कॉलेजियम के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए थे।
  • जस्टिस कौल ने कॉलेजियम की हर सिफारिश का समर्थन किया था और कभी आपत्ति नहीं जताई।
  • कॉलेजियम के सभी प्रस्ताव और सिफारिशें सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाती थीं।
  • चंद्रचूड़ ने कहा कि कॉलेजियम की बैठकों का माहौल सौहार्दपूर्ण था और कौल ने कभी वॉकआउट नहीं किया।
  • जस्टिस कौल ने अपनी किताब में पूर्व CJI पर सरकार के प्रति 'जरूरत से ज्यादा नरम' होने का आरोप लगाया है।

देशभर में चुनाव आयोग के बीच कथित आंतरिक मतभेदों को लेकर मचे बवाल के बाद देश की उच्चतम न्यायालय के पूर्व जजों के बीच ठन गई है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल ने हाल ही में देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी याई चंद्रचूड़ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अपनी नई किताब में जस्टिस कौल ने आरोप लगाते हुए कहा है कि पूर्व CJI फैसले लेने में सरकार के आगे नरम पड़ जाते थे। उन्होंने यह भी कहा है कि जस्टिस चंद्रचूड़ कॉलेजियम की चर्चा से पहले सरकार की सहमति लेते थे। इन आरोपों पर अब पूर्व CJI की प्रतिक्रिया सामने आई है। पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने स्पष्ट किया है कि उनके कार्यकाल में कॉलेजियम के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और जस्टिस कौल ने हर सिफारिश का समर्थन किया था।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने जस्टिस कौल की आने वाली किताब "विदाउट फियर ऑर फेवर" का जिक्र करते हुए कहा कि बिना किताब को पढ़े वे इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन जस्टिस कौल ने कभी उनकी बातों पर असहमति नहीं जताई थी। उन्होंने अन्य आरोपों को भी खारिज किया।

रिकॉर्ड में एक भी असहमति दर्ज नहीं'

पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने कॉलेजियम की कार्यप्रणाली की पारदर्शी प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि कॉलेजियम के हर प्रस्ताव और सिफारिशों की वजह सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक तरीके से जारी की जाती थी। वहीं इन सभी फैसलों में जस्टिस कौल की सहमति शामिल थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भी कॉलेजियम ने सरकार को जजों की नियुक्ति का औपचारिक प्रस्ताव भेजा, जस्टिस कौल ने एक पर भी अपनी आपत्ति नहीं जताई थी।

कभी उठकर नहीं गए जस्टिस कौल- पूर्व CJI

जस्टिस कौल के एक अन्य गंभीर आरोप को भी जस्टिस चंद्रचूड़ ने सिरे से नकार दिया। पूर्व CJI ने बताया कि कॉलेजियम के फैसले कभी अचानक नहीं लिए जाते थे। सिफारिशें भेजने से पहले जजों के बीच कई दौर की औपचारिक और अनौपचारिक चर्चाएं होती थीं। उन्होंने कहा कि बैठकों का माहौल बेहद सौहार्दपूर्ण रहा और जस्टिस कौल ने कभी किसी बैठक से वॉकआउट नहीं किया था।

जस्टिस कौल ने अपनी किताब में क्या दावे किए?

दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए जस्टिस संजय किशन कौल ने अपने संस्मरण में कॉलेजियम और सरकार के रिश्तों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक जस्टिस कौल ने लिखा कि पूर्व CJI सरकार के प्रति ‘जरूरत से ज्यादा नरम’ थे। कौल ने एक घटना का जिक्र करते हुए लिखा कि अल्पसंख्यक समुदाय के एक योग्य जज की पदोन्नति पर सरकार ने सवाल खड़े किए थे। सरकार ने पूछा था कि क्या सुप्रीम कोर्ट में उस धर्म के और प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है और धर्म परिवर्तन से पहले उस परिवार की जाति क्या थी।

जस्टिस कौल के मुताबिक उन्होंने इन तर्कों पर ऐतराज जताया और CJI से कहा कि अगर इन्हीं पैमानों पर नियुक्तियां होनी हैं तो सरकार खुद ही जज नियुक्त कर ले। इसके बाद वह फाइल बंद कर बैठक छोड़ बाहर आ गए थे। इसके बाद बैठक स्थगित करनी पड़ी थी और बाद में सरकार पीछे हट गई थी। एक अन्य आरोप में उन्होंने कहा कि पूर्व CJI ने उनसे PMLA वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर फिर से विचार करने वाली याचिकाओं में बीच का रास्ता अपनाने को कहा था।

प्रकाशित: सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 | 11:32 AM IST

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