भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए आठ अगली पीढ़ी के स्वदेशी कॉर्वेट युद्धपोतों की खरीद के लिए 53,800 करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंध किए हैं।
3 नवंबर 2026 की राष्ट्रीय समाचार अपडेट के अनुसार, ये समझौते गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के साथ किए गए हैं।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करना और देश में स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देना है।
क्या खास होगा इन नए युद्धपोतों में?
नए कॉर्वेट युद्धपोत आधुनिक समुद्री अभियानों के लिए तैयार किए जाएंगे। इनका उपयोग समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा और नौसेना के विभिन्न अभियानों में किया जा सकेगा।
देश को क्या फायदा होगा?
भारतीय नौसेना की ताकत में वृद्धि होगी।
घरेलू रक्षा कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिलेंगे।
रक्षा निर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा
भारत सरकार लगातार स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। युद्धपोतों का निर्माण भारतीय शिपयार्ड में होने से देश की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
प्रकाशित: मंगलवार, 3 नवंबर 2026 | 12:47 PM IST

