सबूत मिटाने के आरोप में जज पर नया केस, बेटे ने स्कूटर सवार को कुचला था

केरल में नाबालिग बेटे की कार से मौत के मामले में जज की मुश्किलें बढ़ीं, 4 पुलिसकर्मी निलंबित।

एक लकड़ी का हथौड़ा, एक खुली किताब, और न्याय का तराजू एक मेज पर रखे हैं।
केरल में एक अतिरिक्त जिला जज पर सबूत मिटाने का नया केस दर्ज किया गया है, उनके बेटे की कार से हुए हादसे के बाद।
मुख्य बातें

केरल के अतिरिक्त जिला जज के खिलाफ सबूत मिटाने का नया केस दर्ज किया गया है क्योंकि उनके नाबालिग बेटे की कार से हुए हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और उन पर सबूत मिटाने का आरोप है।

  • केरल के अतिरिक्त जिला जज पर सबूत मिटाने का नया केस दर्ज किया गया है।
  • यह मामला 25 अक्टूबर को हुए सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें जज के 17 वर्षीय बेटे की कार से जयबालकृष्णन की मौत हो गई थी।
  • मृतक के परिवार ने आरोप लगाया कि जज ने घटनास्थल पर सबूत मिटाने की कोशिश की और थाने में बेटे की तस्वीर डिलीट करवाई।
  • इस मामले में 4 पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया है।
  • जज के बेटे को पहले जमानत मिल गई थी, लेकिन पुलिस अब उसकी जमानत रद्द कराने के लिए विशेष अदालत गई है।

कोच्चि में नाबालिग बेटे की कार से कुचलकर एक व्यक्ति की मौत के मामले में केरल के अतिरिक्त जिला जज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने सोमवार को जज के खिलाफ सबूत मिटाने की कोशिश करने के आरोप में नया केस दर्ज किया है। इससे पहले उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से गाड़ी चलाने के आरोप में केस दर्ज किया गया था। यह मामला 25 अक्टूबर को हुए सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें जज के 17 वर्षीय बेटे की मर्सिडीज-बेंज कार ने स्कूटर को टक्कर मार दी थी। हादसे में स्कूटर सवार जयबालकृष्णन की मौके पर ही मौत हो गई थी। वह चिट्टूर इलाके में सड़क किनारे खाने का ठेला लगाते थे और मंजली के रहने वाले थे।

चेरानल्लूर पुलिस के मुताबिक, मृतक के परिवार ने रविवार को नई शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि हादसे के बाद जज काफी देर तक घटनास्थल पर मौजूद रहे और मामले से जुड़े सबूत मिटाने की कोशिश की। परिवार ने आरोप लगाया कि जज हादसे के बाद चेरानल्लूर पुलिस थाने पहुंचे थे। वहां उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर दबाव डालकर अपने बेटे की वह तस्वीर डिलीट करवा दी, जिसे मृतक के परिवार के एक सदस्य ने खींचा था।

4 पुलिसकर्मी हुए सस्पेंड

कोच्चि की पुलिस कमिश्नर आर. निशांतिनी ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। पुलिस ने इसके बाद जज के खिलाफ सबूत मिटाने की कोशिश का मामला भी दर्ज कर लिया। इस अपराध में तीन साल तक की जेल, 5 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। इस मामले में चार पुलिसकर्मियों को भी सस्पेंड किया गया है। पुलिस ने निलंबन की वजह आधिकारिक तौर पर नहीं बताई है। हालांकि, मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में केस दर्ज नहीं करने और तस्वीर डिलीट किए जाने की घटना को लेकर यह कार्रवाई हुई है।

जज का बेट मौके से पकड़ा गया

पुलिस कमिश्नर ने कहा कि उन्होंने पीड़ित परिवार से बात की है और उन्हें भरोसा दिलाया कि चिंता करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने भी परिवार से बातचीत की है। हादसे के बाद जज के बेटे को मौके पर ही पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया था। उसे पहले थाने से जमानत मिल गई थी। बाद में किशोर न्याय बोर्ड ने उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने के आधार पर जमानत दे दी थी। हालांकि, पुलिस ने अब उसकी जमानत रद्द कराने के लिए विशेष अदालत का रुख किया है।

प्रकाशित: सोमवार, 2 नवंबर 2026 | 5:26 PM IST

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