केरल के एर्नाकुलम जिले में रविवार तड़के एक कार ने एक बाइक सवार को टक्कर मार दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी अपने माता-पिता को बताए बिना उनके नाम पर रजिस्टर्ड मर्सिडीज-बेंज कार लेकर निकल गया था। वह कार में अकेला था और वल्लारपदम से कलामासेरी की ओर जा रहा था। कार उसी दिशा में जा रहे एक स्कूटर से टकरा गई। इस हादसे के बाद बाइक सवार की मौत हो गई।
17 साल का आरोपी एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश का बेटा है। यह दुर्घटना चेरानल्लूर में कंटेनर रोड पर मारापरम्बु में फोर्ड शोरूम के पास तड़के करीब 2:20 बजे हुई। मृतक जयाबालकृष्णन चेरानल्लूर के साउथ चित्तूर स्थित नेल्लुवेलिल के रहने वाले थे। वह अपनी छोटी सी दुकान बंद करके घर लौट रहे थे।
चेरानल्लूर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) और 281 के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं लापरवाही से मौत होने और लापरवाही से गाड़ी चलाने से संबंधित हैं। पुलिस ने बताया कि लड़के को हिरासत में ले लिया गया है। उसके पिता त्रिशूर जिले में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हैं।
मृतक के परिवार ने जज पर लगाए दखल देने के आरोप
मृतक के परिवार का आरोप है कि जज ने अपने बेटे को बचाने के लिए मामले में दखल दिया। परिवार का दावा है कि लड़के के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। पुलिस ने कहा कि वे वाहन मालिक की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। साथ ही वे मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि दुर्घटना के समय नाबालिग शराब के नशे में था या नहीं।
किस बात पर भड़क गए जज?
मृतक की रिश्तेदार जयालक्ष्मी ने आरोप लगाया कि दुर्घटना के बाद जज पुलिस स्टेशन पहुंचे। जब परिवार ने घटना के लिए उनकी जिम्मेदारी पर सवाल उठाया तो उन्होंने परिवार को धमकाया। उन्होंने मीडिया से कहा, "जब मैंने जज से पूछा कि क्या उन्हें उस कानून के बारे में पता है जो नाबालिगों को कार चलाने से रोकता है तो वे भड़क गए। हमसे कहा कि हमें उन्हें कानून नहीं सिखाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'उससे सवाल मत पूछो'। पुलिस ने भी सबूत मिटाने के लिए तुरंत कार को मौके से हटा दिया। हम इस मामले को लड़ेंगे क्योंकि यह घटना एक न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति के अहंकार को दिखाती है।"
क्या था हाईकोर्ट का फैसला?
इससे पहले 2024 में केरल हाईकोर्ट ने कहा था कि किसी नाबालिग के अभिभावक या नाबालिग द्वारा चलाई जा रही गाड़ी के मालिक पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। यह धारा नाबालिगों द्वारा मोटर वाहन चलाने से जुड़े अपराधों से संबंधित है। इस प्रावधान के तहत कानूनी शर्तों के अधीन, अभिभावक या वाहन मालिक को तीन साल तक की कैद और 25,000 रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
प्रकाशित: रविवार, 25 अक्टूबर 2026 | 3:30 PM IST

