केरलम बाल अधिकार आयोग ने तिरुवनंतपुरम के कझक्कूटम में बेटे को गोद में बिठाकर तेज रफ्तार कार का स्टीयरिंग संभालने देने के लिए एक व्यक्ति के खिलाफ मंगलावर को मामला दर्ज किया। पुलिस के मुताबिक, कार की रफ्तार 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा थी। आयोग के एक प्रवक्ता ने बताया कि केरलम राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मीडिया में आई खबरों के आधार पर मामले का संज्ञान लिया और घटना के संबंध में जिला पुलिस प्रमुख तथा क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) से रिपोर्ट तलब की।
तीन-चार साल का बच्चा
आयोग के मुताबिक सामने आई तस्वीरों में करीब तीन से चार साल का बच्चा चालक की सीट पर अपने पिता की गोद में बैठा दिखाई दे रहा है। बच्चा कझक्कूटम हवाई अड्डे की सड़क पर चलती कार में स्टीयरिंग पकड़े हुए था। बताया जा रहा है कि यह घटना एक फ्लाईओवर पर हुई। दूसरी कार में सवार लोगों ने बच्चे के स्टीयरिंग पकड़ने का वीडियो बना लिया। वीडियो में दिखा कि कार में सवार लोगों को जब कथित तौर पर एहसास हुआ कि उनका वीडियो बनाया जा रहा है, तो उन्होंने कार की रफ्तार बढ़ा दी। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने कहा कि उन्होंने इस घटना को इसलिए रिकॉर्ड किया, क्योंकि इतनी खतरनाक हरकत को नजरअंदाज करना उनके लिए संभव नहीं था।
गौरतलब है कि इससे पहले रविवार को केरलम में एक नाबालिग द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही मर्सिडीज-बेंज कार की टक्कर से दोपहिया वाहन सवार 54 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, यह दुर्घटना चेरानेल्लूर के पास तड़के दो से तीन बजे के बीच हुई। यह मामला काफी ज्यादा चर्चा में है। इस मामले में न्यायाधीश को आरोपी बनाया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि मामले की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए सोमवार को इसकी जांच जिला अपराध शाखा को सौंप दी गई। पुलिस ने बताया कि त्रिशूर जिले के इरिंजालकुडा की एक अदालत के न्यायाधीश को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए के तहत आरोपी बनाया गया है। इस धारा के तहत नाबालिग द्वारा अधिनियम के तहत अपराध किए जाने पर उसके अभिभावक या वाहन के पंजीकृत मालिक को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
प्रकाशित: मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 | 8:58 PM IST

